सर्च करे
Home

Trending

    करोड़ों की सैलरी पाने वाले प्राइवेट वालों को सिर्फ इतनी पेंशन, सरकारी वालों को कई गुना; एक्सपर्ट ने बताया गणित

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 05:00 PM (IST)

    भारत में सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था में बड़ा अंतर है। विशेषज्ञ डॉ. राहुल सिंह बताते हैं कि निजी क्षेत्र में उच्च वेतन के ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    करोड़ों की सैलरी पाने वाले प्राइवेट वालों को सिर्फ इतनी पेंशन, सरकारी वालों को कई गुना; एक्सपर्ट ने बताया गणित

    नई दिल्ली। नौकरी करने वाले ज्यादातर लोगों की आर्थिक सुरक्षा रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन (Pension After Retirement) पर टिकी होती है। देश में पुरानी पेंशन योजना खत्म होने के बाद से यह मुद्दा समय-समय पर चर्चा में बना रहता है।

    खासकर निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी अक्सर यह सवाल उठाते हैं कि उनकी पेंशन सरकारी कर्मचारियों (EPFO Pension) की तुलना में इतनी कम क्यों होती है। भारत में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था अलग-अलग नियमों पर आधारित है, और यही वजह है कि दोनों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। इस पहेली के पीछे क्या गणित है इसे जानने के लिए जागरण बिजनेस की टीम ने एक्सपर्ट से बात की। आइए जानते हैं कि उन्होंने हमें क्या बताया।

    अलग अलग पेंशन व्यवस्थाएं

    O. P. Jindal Global University के एसोसिएट प्रोफेसर Dr. Rahul Singh ने बताया कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों और निजी क्षेत्र में काम करने वालों के लिए अलग-अलग पेंशन व्यवस्थाएं लागू हैं। कई बार ऐसा देखा जाता है कि निजी कंपनी में करोड़ों रुपये सालाना कमाने वाला कर्मचारी भी रिटायरमेंट के बाद उतनी पेंशन नहीं पा पाता, जितनी एक सरकारी कर्मचारी को मिलती है। इसका कारण उनकी आय नहीं, बल्कि पेंशन की संरचना और गणना का तरीका है।

    PSU कर्मचारी भी EPFO के तहत पाते हैं पेंशन

    भारत में निजी क्षेत्र, सार्वजनिक उपक्रम (PSU Pension Rule), राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग प्रावधान बनाए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति निजी कंपनी या PSU में काम करता है, तो उसका भविष्य निधि का रिकॉर्ड Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) के पास रहता है और उसकी सैलरी से पीएफ काटा जाता है। इसी के आधार पर आगे चलकर उसे पेंशन का लाभ मिलता है।

    यह भी पढ़ें- EPFO: जिसका कटता है PF उसे अधिकतम कितनी मिल सकती है पेंशन, कैलकुलेशन से समझें

    वहीं, केंद्र या राज्य सरकार के वे कर्मचारी जिन्होंने 2004 से पहले नौकरी ज्वाइन की थी, वे जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) के तहत आते थे। उस समय पुरानी पेंशन योजना लागू थी, जिसमें रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलती थी। लेकिन 1 जनवरी 2004 के बाद केंद्र सरकार में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को नई पेंशन प्रणाली (NPS) के दायरे में लाया गया। इस व्यवस्था में कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं और पेंशन की राशि बाजार से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है।

    सरकार ने दिया UPS और NPS का विकल्प

    डॉक्टर राहुल ने बताया कि पुरानी पेंशन योजना को लेकर लंबे समय तक बहस और विरोध चलता रहा। इसके बाद सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का विकल्प भी पेश किया, जिससे कर्मचारियों को पेंशन प्रणाली चुनने का विकल्प मिल सके। अब केंद्र सरकार के कर्मचारियों के पास यह विकल्प होता है कि वे NPS चुनें या UPS को अपनाएं।

    2004 से पहले वालों को कितनी मिलती है मिलेगी पेंशन?

    O. P. Jindal Global University के एसोसिएट प्रोफेसर Dr. Rahul Singh के अनुसार, "पुरानी पेंशन योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन का लगभग 50 प्रतिशत आजीवन पेंशन के रूप में मिलता था। इस पेंशन पर कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा तय नहीं थी और इसमें महंगाई भत्ता भी जुड़ता रहता था। यानी जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती, पेंशन भी बढ़ती जाती थी। यही कारण था कि यह योजना कर्मचारियों के लिए अधिक सुरक्षित मानी जाती थी।"

    इसके विपरीत, नई पेंशन प्रणाली में मिलने वाली राशि निश्चित नहीं होती। इसमें कर्मचारी और सरकार द्वारा जमा किए गए अंशदान तथा उस पर मिलने वाले बाजार आधारित रिटर्न के आधार पर पेंशन तय होती है। इसलिए इसमें न्यूनतम पेंशन की कोई गारंटी नहीं होती और अंतिम राशि निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।

    प्राइवेट कर्मचारियों को मिलती है इतनी पेंशन

    O. P. Jindal Global University के एसोसिएट प्रोफेसर Dr. Rahul Singh ने बताया, कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को पेंशन कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-1995 Pension) के तहत मिलती है। इस योजना में पेंशन की गणना अंतिम 60 महीनों के औसत वेतन और कुल सेवा अवधि के आधार पर की जाती है।

    उन्होंने आगे कहा, "लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण सीमा यह है कि पेंशन योग्य वेतन अधिकतम ₹15,000 तक ही माना जाता है। इसी सीमा के कारण वास्तविक वेतन चाहे कितना भी अधिक क्यों न हो, पेंशन की गणना सीमित दायरे में होती है और आमतौर पर अधिकतम पेंशन लगभग ₹7,500 के आसपास ही बन पाती है।"

    यही संरचनात्मक अंतर सरकारी और निजी क्षेत्र की पेंशन के बीच बड़ा अंतर पैदा करता है। सरकारी कर्मचारियों की पेंशन जहां वेतन और महंगाई से जुड़ी सुरक्षा प्रदान करती है, वहीं निजी क्षेत्र की पेंशन तय नियमों और वेतन सीमा के कारण अपेक्षाकृत कम रह जाती है।

    पर्सनल फाइनेंस से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।

    यह भी पढ़ें- EPFO Pension: 10 साल कर ली प्राइवेट नौकरी तो कितनी मिलेगी पेंशन, सरकारी से कम या ज्यादा; देखें कैलकुलेशन