Repo Rate पर RBI के फैसले से क्या बढ़ेगी होम लोन की EMI, FD पर मिलेगा ज्यादा ब्याज? समझें
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित (RBI Repo Rate Unchanged) रखा है। इस फैसले से होम लोन की EMI में फिलहाल क ...और पढ़ें

Repo Rate पर RBI के फैसले से क्या बढ़ेगी होम लोन की EMI, FD पर मिलेगा ज्यादा ब्याज? समझें
नई दिल्ली। 3 दिनों तक चली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 8 अप्रैल को समाप्त हो गई। इस बैठक में RBI ने रेपो रेट को अपरिवर्तित (Repo Rate Unchanged) रखने का फैसला किया। यानी रेपो रेट की जो दरें चलती आ रही है, वही रहेंगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है।
रेपो रेट की दर 5.25% ज्यों की त्यों बनी रहेगी। अब सवाल यह है कि क्या RBI के रेपो रेट पर इस फैसले से आपकी होम लोन की ईएमआई (Home Loan EMIs) कम होगी या ज्यादा, साथ ही FD पर मिलने वाला ब्याज (FD Interest Rate) घटेगा या बढ़ेगा? आइए जानते हैं।
Repo Rate पर RBI के फैसले से क्या Home Loan की EMI बढ़ेगी?
RBI के रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का मतलब है कि फिलहाल होम लोन की EMI बढ़ने की संभावना कम है, जिससे खरीदारों और मौजूदा कर्जदारों को थोड़ी और स्थिरता मिलेगी।
जो लोग घर खरीदने की योजना बना रहे हैं या पहले से ही होम लोन चुका रहे हैं, उनके लिए यह फैसला साफ तौर पर सकारात्मक है। रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से, बैंकों से यह उम्मीद है कि वे लोन के इंटरेस्ट को स्थिर रखेंगे। इसका मतलब है कि फिलहाल EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।
इससे Home Loan लेने वालों को ज्यादा स्पष्टता मिलती है और फाइनेंशियल प्लानिंग आसान हो जाती है। जब भी रेपो रेट में बदलाव होता है तो इसका सीधा फ्लोटिंग ब्याज दरों पर लोन लेने वालों की EMI पर पढ़ता है। फ्लोटिंग ब्याज दरों पर लोन लेने से रेपो रेट में बदलाव होने से EMI कम और ज्यादा हो सकता है।
स्क्वायर यार्ड्स के को-फॉउंडर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर पीयूष बोथरा ने कहा- "रेपो रेट पर मौजूदा अपडेट घर खरीदने वालों और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बहुत जरूरी अनुमान लगाने की क्षमता लेकर आया है। उधार लेने की लागत स्थिर रहने से, मांग खासकर मध्यम-आय और प्रीमियम सेगमेंट में के आने वाले समय में मज़बूत बने रहने की उम्मीद है। ब्याज दरों में यह स्थिरता खरीदारों के भरोसे को भी बढ़ाती है और डेवलपर्स तथा उधार देने वालों को ज्यादा आत्मविश्वास के साथ योजना बनाने का मौका देती है। भविष्य में दरों में कोई भी बदलाव बाहरी कारकों से गहराई से जुड़ा होगा, और घर खरीदने वालों तथा उद्योग जगत के लोगों दोनों को ही लंबे समय के फ़ैसले लेते समय बदलते हुए मैक्रोइकोनॉमिक हालात के प्रति सचेत रहना चाहिए।"
रेपो रेट में बदलाव से क्या बदलती है FD की ब्याज दरें?
रेपो रेट में बदलाव से FD की ब्याज दरें कम होती हैं या ज्यादा। इसे समझने से पहले हमें रेपो रेट को समझना होगा। रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को पैसा उधार देता है। Repo Rate घटने से बैंकों के लिए उधार लेने की लागत कम हो जाती है, जिससे ग्राहकों के लिए लोन और FD पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं।
जब रेपो रेट बदलता है, तो फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें (FD Interest Rate) भी आम तौर पर उसी दिशा में बदलती हैं, जिसका सीधा असर आपकी बचत से होने वाली कमाई पर पड़ता है। रेपो रेट बढ़ने पर बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए FD की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं, ताकि ग्राहक उनके बैंक में ज्यादा से ज्यादा एफडी कराएं। वहीं, जब रेपो रेट कम होता है तो अक्सर FD से मिलने वाला रिटर्न कम हो जाता है। यानी बैंक एफडी की ब्याज दरें घटा देते हैं।
अगर आपने रेपो रेट में कटौती से पहले अपनी Fixed Deposit (FD) बुक की थी, तो आपकी ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं होगा। भले ही बैंक कटौती के बाद दरें कम करने का फैसला कर ले। FD की ब्याज दरें जमा की पूरी अवधि के दौरान एक जैसी ही रहती हैं। इसलिए, खाता खोलते समय आपसे जिस ब्याज दर का वादा किया गया था, वह वैसी ही रहेगी। उसमें किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन नई FD पर इसमें बदलाव हो सकता है।
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