ईरान-इजरायल युद्ध के बीच इस डिफेंस कंपनी पर NSE-BSE ने ठोका लाखों का जुर्माना, कल शेयरों पर दिखेगा असर?
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) पर NSE और BSE ने बोर्ड कंपोजिशन नियमों का पालन न करने पर ₹5.42-₹5.42- लाख का जुर्माना लगाया है। ...और पढ़ें

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच इस डिफेंस कंपनी पर NSE-BSE ने ठोका लाखों का जुर्माना, कल शेयरों पर दिखेगा असर?
नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से डिफेंस के शेयरों में तूफानी तेजी देखी जा रही है। इस तेजी के बीच भारत के एक डिफेंस स्टॉक पर NSE-BSE ने मोटा जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) पर लगा है। अब इस खबर का असर कल यानी होली वाले दिन कंपनी के शेयरों पर दिख सकता है। सोमवार को इसके शेयर NSE पर -1.08 % गिरकर 262.10 रुपये के स्तर पर बंद हुए थे।
दरअसल, भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग PSU में से एक BHEL पर देश के बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का जरूरी कंपोज़िशन बनाए रखने में नाकाम रहने के लिए पेनल्टी लगाई है।
BHEL के ऊपर लगा लाखों का जुर्माना
एक रेगुलेटरी फाइलिंग में, कंपनी ने बताया कि उसे BSE लिमिटेड और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) दोनों से अलग-अलग नोटिस मिले हैं, जिनमें से हर एक ने ₹5,42,800 (GST मिलाकर) का जुर्माना लगाया है।
ये पेनल्टी दिसंबर 2025 को खत्म होने वाली तिमाही के लिए SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशन्स, 2015 के रेगुलेशन 17(1) का पालन न करने पर लगाई गई हैं।
SEBI के नियमों के मुताबिक, एक लिस्टेड कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एग्जीक्यूटिव और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स का सबसे अच्छा कॉम्बिनेशन होना चाहिए, जिसमें बोर्ड में कम से कम 50% इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स होने चाहिए। BHEL ने एक्सचेंज को बताया कि इस तिमाही के दौरान उसका कंपोजिशन इस जरूरत से कम था, क्योंकि इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की संख्या बोर्ड की असल संख्या के 50% से कम थी।
BHEL ने रेगुलेटरी ब्रीच और उससे जुड़ी पेनल्टी से निपटने के लिए अपनी स्ट्रैटेजी बताई है। कंपनी एक्सचेंज द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) सर्कुलर के प्रोविज़न के अनुसार दोनों स्टॉक एक्सचेंज द्वारा लगाए गए फाइन में छूट मांगने की योजना बना रही है।
कंपनी ने एक सरकारी कंपनी के तौर पर अपनी खास जगह पर जोर दिया है, जहां इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स समेत डायरेक्टर्स की नियुक्ति भारत सरकार के दायरे में आती है। यह स्ट्रक्चरल अरेंजमेंट रेगुलेटरी कम्प्लायंस टाइमलाइन बनाए रखने में खास चुनौतियां पेश करता है।
Source- BSE
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयरों की जानकारी दी गयी है। यह निवेश की सलाह नहीं है। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
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