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    Budget 2026 में बदलेगा क्रिप्टो 'गेम'? टैक्स नियम सुधरे तो भारत लौट सकता है ₹4.87 लाख करोड़ का कारोबार, समझें गणित

    By Edul PatelEdited By: Ankit Kumar Katiyar
    Updated: Wed, 14 Jan 2026 08:09 PM (IST)

    भारत में क्रिप्टो निवेशकों की बढ़ती संख्या के बावजूद, मौजूदा 30% टैक्स और 1% टीडीएस नियम ₹4.87 लाख करोड़ के कारोबार को विदेशी प्लेटफॉर्म पर धकेल रहे ह ...और पढ़ें

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    Budget 2026 में बदलेगा क्रिप्टो 'गेम'? टैक्स नियम सुधरे तो भारत लौट सकता है ₹4.87 लाख करोड़ का कारोबार, समझें गणित

    नई दिल्ली| पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) भारत की मुख्यधारा की वित्तीय चर्चा का हिस्सा बन चुकी है। आज भारत में क्रिप्टो निवेशकों में महानगरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों के लाखों आम निवेशक शामिल हैं। ये निवेशक केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय में संपत्ति बनाने के लिए भी क्रिप्टो का उपयोग कर रहे हैं, जैसे कि सिस्टमैटिक निवेश और विविध पोर्टफोलियो के जरिए।

    डिजिटल एसेट्स की बढ़ती स्वीकार्यता यह दर्शाती है कि भारतीय निवेशक उनके साथ जिम्मेदारी से जुड़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन भारत की मौजूदा टैक्स और रेगुलेटरी व्यवस्था अभी इस बदलती हकीकत के साथ पूरी तरह तालमेल नहीं बिठा पाई है। जैसे-जैसे हम यूनियन बजट 2026 (Budget 2026) के करीब पहुंच रहे हैं, यह क्रिप्टो टैक्सेशन को सरल और व्यावहारिक बनाने का सही समय है, जिससे निवेशकों, प्लेटफॉर्म्स और सरकार, सभी को फायदा हो।

    मुनाफे पर 30% टैक्स और हर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS

    2022 में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के लिए जो टैक्स ढांचा लाया गया था, उसमें मुनाफे पर 30% का फ्लैट टैक्स (tax on cryptocurrency) और हर ट्रांजैक्शन पर 1% टीडीएस (1% TDS on every cryptocurrency transaction) शामिल है। इन नियमों का उद्देश्य ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना और निगरानी बढ़ाना था। लेकिन व्यवहार में, 1% TDS ने ईमानदार निवेशकों के लिए कई मुश्किलें पैदा की हैं। इससे पूंजी फंस जाती है, लिक्विडिटी कम होती है और बार-बार या लंबे समय तक निवेश करना कठिन हो जाता है।

    नतीजतन, 2025 में लगभग ₹4.87 लाख करोड़ का ट्रेडिंग वॉल्यूम विदेशी, ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स पर चला गया, जो भारत के टैक्स और रेगुलेटरी दायरे से बाहर हैं।

    यह भी पढ़ें- क्या है ब्लॉकचेन और डिजिटल एसेट्स, देश का युवा कैसे भारत को बना सकता है नई डिजिटल ताकत?

    क्रिप्टो एक्सचेंज से सरकार को ₹1096 करोड़ का TDS मिला

    2022 से अब तक, नियमों का पालन करने वाले क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए सरकार को लगभग ₹1,096 करोड़ का TDS मिला है। वहीं, गैर-नियमित विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हुए ट्रांजैक्शन के कारण सरकार को करीब ₹11,000 करोड़ के टैक्स राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। अगर TDS की दर को घटाकर 0.01% कर दिया जाए, जैसा कि अन्य वित्तीय बाजारों में होता है तो ट्रांजैक्शन की ट्रेसबिलिटी भी बनी रहेगी और निवेशक भारतीय प्लेटफॉर्म्स पर बने रहने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

    एक और बड़ी चिंता है क्रिप्टो मुनाफे पर 30% का फ्लैट टैक्स, जो होल्डिंग पीरियड या निवेशक की आय पर निर्भर नहीं करता। इसके अलावा, नुकसान (loss) को मुनाफे से समायोजित करने की अनुमति भी नहीं है। जबकि शेयर या म्यूचुअल फंड जैसे अन्य एसेट क्लास में टैक्सेशन होल्डिंग पीरियड से जुड़ा होता है और नुकसान को एडजस्ट करने की सुविधा मिलती है। क्रिप्टो टैक्सेशन को इन स्थापित नियमों के अनुरूप लाने से सिस्टम ज्यादा न्यायसंगत बनेगा और लंबी अवधि के जिम्मेदार निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

    रेगुलेशन पर भारत ने उठाए मजबूत कदम

    रेगुलेशन के मोर्चे पर भारत ने पहले ही मजबूत कदम उठाए हैं। FIU-IND द्वारा जारी किए गए नए दिशानिर्देश एक अहम पड़ाव हैं। इनमें KYC नियमों को मजबूत करना, साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी, ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया है। इनका मुख्य उद्देश्य ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना और धोखाधड़ी व गलत इस्तेमाल को रोकना है, जो टैक्स अधिकारियों के उद्देश्यों से भी मेल खाता है।

    रेगुलेशन और टैक्सेशन को अलग-अलग देखने की जरूरत नहीं है। जब FIU-IND जैसी संस्थाएं पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित कर रही हैं, तब टैक्स ढांचे को ऐसा बनाया जा सकता है जो बिना जवाबदेही से समझौता किए निवेशकों पर बोझ कम करे। केवल ऊंचे टैक्स लगाने के बजाय, मजबूत रेगुलेशन और व्यावहारिक टैक्सेशन का संयोजन ज्यादा असरदार होता है।

    बजट 2026 में क्रिप्टो को लेकर उठाए जा सकते हैं बड़े कदम

    भारत में निवेशकों का व्यवहार भी तेजी से बदल रहा है। छोटे शहरों से भागीदारी बढ़ रही है, महिलाओं की हिस्सेदारी में भी अच्छा इजाफा हुआ है, और ज्यादा निवेशक अब सट्टेबाजी के बजाय SIP जैसे अनुशासित तरीकों को अपना रहे हैं। यह दिखाता है कि भारतीय परिवार अब क्रिप्टो को एक गंभीर एसेट क्लास के रूप में देखने लगे हैं।

    बजट 2026 में TDS कम करने, कैपिटल गेन टैक्स को अन्य वित्तीय साधनों के अनुरूप लाने, नुकसान को समायोजित करने की अनुमति देने और FIU-IND जैसे मौजूदा रेगुलेटरी ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इससे ट्रेडिंग गतिविधियां फिर से भारत लौटेंगी, टैक्स की निगरानी बेहतर होगी, निवेशकों की सुरक्षा बढ़ेगी और इनोवेशन देश के भीतर ही रहेगा।

    एक स्पष्ट, निष्पक्ष और दूरदर्शी क्रिप्टो ढांचा न केवल भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि निवेशकों, रेगुलेटर्स और सरकार के बीच भरोसे को भी बढ़ाएगा। बजट 2026 के पास इस सोच को हकीकत में बदलने का सुनहरा मौका है।

    (नोट- लेखक एडुल पटेल क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Mudrex के सीईओ हैं।)