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    यूएस-ईरान युद्ध से Sensex में भारी गिरावट, बाजार के लिए कितनी घातक ये जंग, किन शेयरों को फायदा और किसे नुकसान?

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 11:44 AM (IST)

    ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, सेंसेक्स 2,700 अंक से अधिक टूट गया। हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में क ...और पढ़ें

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    सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है।

    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका (Iran-US War) के बीच युद्ध के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है और इसका असर ग्लोबल मार्केट्स पर देखने को मिल रहा है। सेंसेक्स (Sensex Down) 2,700 अंकों से ज्यादा टूटकर 78,500 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी 24,700 के नीचे फिसल गया। वहीं, निफ्टी बैंक 59,000 के पास चला गया और मिडकैप इंडेक्स में 3% से ज्यादा की गिरावट ने रिटेल निवेशकों की धड़कनें तेज कर दीं। हालांकि, सुबह तेज गिरावट के बाद अब मार्केट में रिकवरी देखने को मिल रही है, लेकिन सवाल है कि यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी।

    इस सवाल का मार्केट एक्सपर्ट ने जवाब दिया है। जागरण बिजनेस से बातचीत में इंडिपेंडेंट मार्केट एक्सपर्ट अभिषेक भट्ट ने निफ्टी को लेकर अहम टेक्निकल लेवल बताए हैं।

    बाजार पर टेक्निकल व्यू

    अभिषेक भट्ट ने कहा कि Nifty ने हाल के सपोर्ट ज़ोन 24,800–24,750 को decisively तोड़ा है, जो शॉर्ट टर्म में कमजोरी का संकेत देता है। अगला अहम सपोर्ट 24,400–24,350 के आसपास दिख रहा है। अगर यह भी टूटता है तो 24,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर टेस्ट हो सकता है। ऊपर की तरफ अब 24,900–25,000 मजबूत रेजिस्टेंस बन गया है।

    बैंक निफ्टी 59,500 के नीचे टिकने में नाकाम रहा — 58,800–58,500 अगला सपोर्ट जोन है। मिडकैप इंडेक्स में ब्रॉड बेस्ड सेलिंग दिखी है, जो बताता है कि केवल लार्जकैप नहीं, बल्कि पूरी मार्केट में रिस्क-ऑफ मूड है।

    कमजोर एडवांस-डिक्लाइन रेश्यो

    बाजार का एडवांस-डिक्लाइन रेश्यो स्पष्ट रूप से निगेटिव है (लगभग 975 एडवांस बनाम 1900+ डिक्लाइन), जो बताता है कि गिरावट व्यापक है और सिर्फ कुछ भारी शेयरों तक सीमित नहीं।

    ग्लोबल ट्रिगर और सेक्टर इम्पैक्ट

    ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका बढ़ी है। यदि ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के ऊपर टिकता है तो भारत जैसे आयातक देश के लिए यह चालू खाते (CAD), महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इन सेक्टर की कंपनियों पर ज्यादा असर देखने को मिलेगा?

    • ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर मार्जिन दबाव
    • एविएशन सेक्टर पर लागत बढ़ने का खतरा
    • पेंट और केमिकल कंपनियों के इनपुट कॉस्ट में इजाफा
    • वहीं, अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों को सीमित लाभ होगा।

    FII/DII गतिविधि

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है। ग्लोबल अनिश्चितता में FIIs आमतौर पर इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालते हैं, जिससे वोलैटिलिटी और बढ़ती है।

    अब नजरें दो चीजों पर टिकी हैं —

    1. ईरान संकट की अगली दिशा


    2. कच्चे तेल और डॉलर इंडेक्स की चाल

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    रणनीति क्या हो?

    • हाई लेवरेज से बचें
    • मजबूत बैलेंस शीट और डिफेंसिव सेक्टर (FMCG, फार्मा) पर नजर रखें
    • गिरावट में चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाएं
    • शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए रेजिस्टेंस के पास हल्का रहें