पानी से बिजली बनाने वाली कंपनी में सरकार बेच रही हिस्सेदारी, 8% छूट पर मिल रहे शेयर; खरीदने का मौका सिर्फ 3 जून तक
सरकार ने NHPC में 6% हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है, जो ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए ₹71 प्रति शेयर पर बेची जाएगी। इस बिक्री से सरकारी खजाने में लगभग ₹4 ...और पढ़ें

NHPC में सरकार बेच रही हिस्सेदारी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। सरकार ने सोमवार को एलान किया कि वह पब्लिक सेक्टर की एनएचपीसी (NHPC Share Price Today) में छह प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचेगी। ये हिस्सेदारी आज मंगलवार 2 जून से शुरू होने वाले ऑफर फॉर सेल (NHPC OFS) इश्यू के माध्यम से बेची जाएगी। यह बिक्री 71 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर की जाएगी। इस खबर के बीच आज कंपनी का शेयर गिरावट के साथ खुला है। BSE पर एनएचपीसी का शेयर कल के 77.19 रुपये के क्लोजिंग भाव के मुकाबले 2.41 रुपये या 3.12 फीसदी की गिरावट के साथ 74.78 रुपये पर खुला है।
शेयर पर 8 फीसदी की छूट
निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने बताया है कि भारत सरकार ने एनएचपीसी में तीन प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है। इसके साथ 'ग्रीन शू' विकल्प यानी अधिक बोली आने की स्थिति में तीन प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी भी बेची जाएगी।
शेयर बिक्री के लिए मिनिमम प्राइस 71 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जबकि बीएसई पर सोमवार को कंपनी का शेयर 77.19 रुपये पर बंद हुआ। इसकी तुलना में 71 रुपये प्रति शेयर का ओएफएस प्राइस आठ प्रतिशत की छूट है।
कब तक कर सकेंगे आवेदन?
एनएचपीसी का शेयर शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस के मुकाबले सोमवार को 2.07 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ था। बता दें कि नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए ऑफर फॉर सेल दो जून को और रिटेल निवेशकों के लिए तीन जून को खुलेगा।
प्रति शेयर 71 रुपये के न्यूनतम मूल्य पर कुल छह प्रतिशत हिस्सेदारी यानी 60.27 करोड़ से अधिक शेयरों की बिक्री से सरकारी खजाने में लगभग 4,200 करोड़ रुपये आएगा।
क्या होता है ऑफर फॉर सेल?
शेयर बाजार में ऑफर फॉर सेल (Offer For Sale) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा किसी लिस्टेड कंपनी के प्रमोटर या मौजूदा शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के जरिए जनता और निवेशकों को अपने शेयर बेचकर अपनी हिस्सेदारी कम करते हैं।
इसका एक मकसद भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों का पालन करना है, जिसके अनुसार लिस्टेड कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 75% से अधिक नहीं होनी चाहिए। और दूसरा मकसद पैसा जुटाना है, जो प्रमोटर या सरकार को मिलता है, न कि कंपनी को।
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