दुबई के शेख ने जिस 83 साल पुराने भारतीय बैंक को खरीदा, उसी पर चल गया चाबुक; इस विभाग ने मांग लिए ₹103 करोड़
RBL बैंक को जीएसटी विभाग से ₹103 करोड़ से अधिक की टैक्स मांग का कारण बताओ नोटिस मिला है। बैंक ...और पढ़ें

RBL बैंक को ₹103 करोड़ से अधिक का जीएसटी नोटिस मिला।
HighLights
RBL बैंक को ₹103 करोड़ से अधिक का जीएसटी नोटिस मिला।
यह नोटिस डिजिटल बैंकिंग के इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ा है।
बैंक ने कहा, इसका वित्तीय स्थिति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आजादी से भी पहले खुले जिस भारतीय बैंक को हाल ही में दुबई के सरकारी बैंक ने खरीदा है, उसी पर बड़ी खबर आई है। हम बात कर रहे हैं भारत के 83 साल पुराने रत्नाकर बैंक की, जिसका मालिक अब दुबई का शेख है। भारत के इस बैंक को दुबई के Emirates NBD ने खरीदा है। एमिरेट्स NBD के चेयरमैन महामहिम शेख अहमद बिन सईद अल मकतूम हैं। अब इसी बैंक (RBL) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
दरअसल, RBL Bank को वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग की ओर से एक बड़ा कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है। यह नोटिस ₹103 करोड़ से अधिक की टैक्स डिमांड से जुड़ा है।
RBL Bank को क्यों मिला GST नोटिस
स्टॉक एक्सचेंज (BSE और NSE) को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, RBL Bank को 27 अगस्त, 2026 को मुंबई के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ स्टेट टैक्स की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ है। यह नोटिस महाराष्ट्र गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 की धारा 74 के तहत जारी किया गया है।
इस नोटिस में वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कुल ₹103,76,98,197 (लगभग 103.77 करोड़ रुपये) की जीएसटी मांग का प्रस्ताव रखा गया है। इस राशि में टैक्स के साथ-साथ ब्याज और जुर्माना भी शामिल है।
टैक्स विभाग ने यह नोटिस बैंक द्वारा अपने 'डिजिटल बैंकिंग बिजनेस वर्टिकल' (Digital Banking business vertical) के लिए लिए गए अलग जीएसटी पंजीकरण के तहत प्राप्त किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के संबंध में जारी किया है। विभाग का मानना है कि इस क्रेडिट को लेने में नियमों का उल्लंघन हुआ है।
बैंक ने क्या कहा?
RBL Bank ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर इस कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल करेगा। बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 और 2019-20 में भी इसी तरह के मुद्दों पर जीएसटी अधिकारियों से बैंक के पक्ष में अनुकूल आदेश प्राप्त हुए थे।
बैंक का मानना है कि उसके पास इस मामले को मेरिट के आधार पर लड़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं। बैंक ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि वर्तमान स्थिति में इस नोटिस का बैंक के संचालन या वित्तीय स्थिति पर कोई भौतिक प्रतिकूल प्रभाव (Material Adverse Impact) पड़ने की संभावना नहीं है।
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