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    याद है SITI Networks, जो हर घर में पहुंचाती थी केबल; आज लोन चुकान के नहीं बचे पैसे, दिवालिया हो गई कंपनी

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 02:50 PM (IST)

    सिटी नेटवर्क्स (पूर्व सिटी केबल) ₹1206.03 करोड़ के टर्म लोन पर डिफॉल्ट करने के बाद दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। कंपनी भारी कर्ज, प्रतिस्पर्धा और ...और पढ़ें

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    1206 करोड़ रुपये के लोन पर डिफॉल्ट हुई सिटी नेटवर्क्स

    HighLights

    1. सिटी नेटवर्क्स ₹1206 करोड़ के लोन पर डिफॉल्ट

    2. कंपनी दिवालिया समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही

    3. भारी कर्ज, प्रतिस्पर्धा से कंपनी का पतन हुआ

    नई दिल्ली। आपको सिटी नेटवर्क्स (Siti Networks Share Price Today) याद है, जिसे सिटी केबल के नाम से भी जाना जाता था। ये कंपनी घर-घर में केबल सर्विस पहुंचाती थी। आज ये दिवालिया प्रोसेस से गुजर रही है। इतना ही नहीं, कंपनी 1206.03 करोड़ रुपये के टर्म लोन पर डिफॉल्ट भी कर गयी है। कंपनी इस समय कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के अधीन है, और इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की शक्तियाँ निलंबित हैं।

    किस-किस का पैसा है बकाया?

    सिटी नेटवर्क्स के डिफॉल्ट होने से कर्जदाताओं का एक बड़ा ग्रुप प्रभावित हुआ है, जिसमें एक्सिस बैंक, एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी इंडिया लिमिटेड (एआरसीआईएल), आदित्य बिड़ला फाइनेंस लिमिटेड (एबीएफएल), आईडीबीआई बैंक, इंडसइंड बैंक, रत्नाकर बैंक लिमिटेड (आरबीएल), वाणी एजेंसीज प्राइवेट लिमिटेड और इंडियन केबल नेट कंपनी लिमिटेड (आईसीएनसीएल) शामिल हैं। इन सभी का पैसा अटका हुआ है।
    10 अगस्त, 2023 को दायर दावों के अनुसार, इन वित्तीय संस्थानों की कंपनी पर कुल बकाया उधारी ₹1,206.03 करोड़ है।

    3 साल से चल रही दिवालिया प्रोसेस

    सिटी नेटवर्क्स फरवरी 2023 से दिवालिया कार्यवाही के दायरे में है, जब IndusInd Bank ने ₹148 करोड़ के डिफॉल्ट को लेकर एक याचिका दायर की थी। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 10 अगस्त, 2023 को इस ऑर्डर के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए CIRP को बहाल कर दिया।

    कैसे डूबी कंपनी?

    Siti Networks भारी कर्ज, बाजeर में कड़ी प्रतिस्पर्धा और ऑपरेशनल संबंधी मुश्किलों के कारण डूबती चली गई। मगर एक समय था, जब सेट-टॉप बॉक्स से पहले यही कंपनी घर-घर केबल सर्विस पहुंचाया करती थी। एक समय था जब Siti Networks केबल सर्विस में मोनोपॉली की तरह काम करती थी, जो बेहतरीन चैनल क्वालिटी और जोरदार विस्तार के साथ भारतीय केबल और ब्रॉडबैंड बाजार पर अपना दबदबा बनाए हुए थी।
    मगर, भारी कॉर्पोरेट कर्ज, Zee/Essel Group से जुड़े फंड के दुरुपयोग के मुद्दों और खराब ऑपरेशनल प्रदर्शन के कारण कंपनी की दिशा में भारी बदलाव आ गया और आज ये बर्बाद है।

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