IND vs ENG: किंग कोहली नहीं, शुभमन गिल ने जो रूट को बताया चेज मास्टर; वॉशिंगटन सुंदर के लिए बने रक्षा कवच
भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने इंग्लैंड के जो रूट की जमकर तारीफ की है जिनकी 99 रनों की पारी की बदौलत मेजबान टीम ने तीन मैचों की वनडे सीरीज में 1-1 ...और पढ़ें

शुभमन गिल ने जो रूट की जमकर की तारीफ

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। मौजूदा समय के महान बल्लेबाज जो रूट ने एक बार फिर शानदार पारी खेलते हुए इंग्लैंड को दूसरे वनडे में भारत के खिलाफ चार विकेट से जीत दिलाई। हालांकि, वह शतक पूरा नहीं कर सके और एक रन से चूक गए। हार के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने रूट की जमकर तारीफ की है और साथ ही अपनी टीम की हार के कारण भी बताए हैं।
रूट ने नाबाद 99 रनों की पारी खेली जिससे इंग्लैंड ने टीम इंडिया द्वारा दिए गए 234 रनों के टारगेट को 44.1 ओवरों में छह विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली है और अब 19 जुलाई को लॉर्ड्स में होने वाला आखिरी वनडे सीरीज का निर्णायक मैच होगा।
'रूट मास्टर हैं'
मैच के बाद गिल ने रूट को लेकर कहा कि वह इस तरह के चेज के मास्टर हैं और उन्हें पता था कि इंग्लैंड के इस बल्लेबाज को आउट करना बेहद मुश्किल होगा। गिल ने कहा, "हम हमेशा से जानते थे कि अगर रन रेट पांच या उससे ज्यादा को होगा तो हमें उन्हें गलत शॉट खेलने पर मजबूर करना होगा, लेकिन इस तरह के चेज के वह मास्टर हैं।"
गिल ने माना कि उनकी टीम जिस स्कोर तक जा सकती थी वहां जा नहीं सकी। एक समय भारत का स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर 180 रन था, लेकिन यहां से भारत ने लगातार विकेट खोए और बड़ा स्कोर नहीं कर सकी। उन्होंने कहा, "बेहद निराशाजनक। 25 ओवरों के बाद जो स्थिति थी तब हमने सोचा था कि 300-310 का स्कोर अच्छा होगा, लेकिन हमने मिडिल ओवरों में ज्यादा विकेट खो दिए। हमने अपने निचले क्रम से ज्यादा उम्मीद की थी, लेकिन वह अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल पाए।"
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सुंदर का किया बचाव
गिल ने इस मैच में वॉशिंगटन सुंदर का बचाव किया है। सुंदर बतौर ऑलराउंडर टीम में खेल रहे हैं, लेकिन उनको गेंदबाजी का मौका नहीं मिला। इसे लेकर गिल ने कहा, "सुंदर हमारी टीम का अहम हिस्सा हैं। हो सकता है कि उनको गेंदबाजी कराने से दबाव कम होता, लेकिन हमें पूरी पारी के दौरान अपने मुख्य गेंदबाजों से गेंदबाजी करानी पड़ी क्योंकि तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी। मुझे नहीं लगता कि इससे कोई ज्यादा फर्क पड़ा होगा।"