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नो बॉल फेंकने वालों के साथ गेंदबाजी कोच पर भी लगे जुर्माना

Updated: Sun, 30 Aug 2026 11:34 AM (IST)

कोलंबो टेस्ट में भारतीय गेंदबाजों का आखिरी चार विकेट न ले पाना WTC फाइनल की राह मुश्किल कर रहा है। ...और पढ़ें

भारत ने श्रीलंका को 1-0 से दी मात

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HighLights

  1. भारतीय गेंदबाजों का कोलंबो टेस्ट में प्रदर्शन चिंताजनक

  2. सुनील गावस्कर ने नो-बॉल पर जताई कड़ी आपत्ति

  3. गेंदबाजों और कोच पर जुर्माने का सुझाव दिया

सुनील गावस्कर कॉलम

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। कोलंबो टेस्ट मैच के पांचवें और आखिरी दिन भारतीय गेंदबाजों का श्रीलंका के आखिरी चार विकेट न ले पाना, भारत के लिए डब्ल्यूटीसी फाइनल में जगह बनाने की चुनौती को और मुश्किल बना दिया है। जाहिर तौर पर वह बचे हुए सातों टेस्ट जीतकर अभी भी फाइनल तक जा सकते हैं, लेकिन अगर वो टर्न वाली पिच पर पुछल्ले बल्लेबाजों के विकेट नहीं ले पाए तो ऐसे में भारतीय प्रशंसक निश्चित तौर पर थोड़ी घबराहट में होंगे।

मैंने जितनी भी गेंदबाजी देखी उसमें समानता ही दिखी। बाएं हाथ के गेंदबाज सटीक और हवा में तेज थे जबकि पदार्पण कर रहे ऑफ-स्पिनर सारांश जैन ने पूरी कोशिश की लेकिन उनके पास इस स्तर पर बल्लेबाजों को परेशान करने भर की विविधता का अभाव दिखा। निश्चित तौर पर वह पदार्पण को लेकर थोड़े घबराए रहे होंगे, लेकिन इसके बावजूद उनकी गेंदबाजी में हवा में चकमा देने की कला बिल्कुल भी नहीं थी और वह मदद के लिए पिच पर बहुत ज्यादा निर्भर थे।

ऐसी पिच, जो मैच आगे बढ़ने के साथ धीमी होती जा रही थी, वहां हमारे तेज गेंदबाजों को उछाल हासिल करने में संघर्ष करना पड़ा। यहां शायद गुरनूर बराड़ की अतिरिक्त तेजी और लंबा कद काम आ सकते थे। लेकिन जाहिर है, घटना के बाद समझदारी दिखाना आसान होता है। कुलदीप यादव की कमी भी खली, क्योंकि एक अच्छा कलाई का स्पिनर अक्सर निचले क्रम के बल्लेबाजों को बहुत जल्दी आउट कर सकता है।

जब विरोधी टीम के बल्लेबाज अच्छी लय में हों तो टीम में अच्छी यॉर्कर फेंकने वाला तेज गेंदबाज होना भी बहुत फायदेमंद होता है। बुमराह की कमी बहुत खली, खासतौर से जब दूसरे टेस्ट के आखिरी दिन बल्लेबाजों ने भारत को खूब छकाया। हालांकि, इन सबके बावजूद सोनल दिनुशा आने वाले भविष्य में श्रीलंका के लिए बड़ा नाम बनते दिख रहे हैं। ठीक है कि दूसरे सीजन में जब गेंदबाज उसकी बल्लेबाजी के वीडियो अच्छी तरह देख लेंगे, उसकी खूबियों और कमजोरियों को बेहतर ढंग से जान जाएंगे, तब पता चलेगा कि वह असल में कितना अच्छा है।

हमने कामिंदु मेंडिस और उससे पहले माइक हसी के मामले में देखा है कि जब दुनिया को आपकी बल्लेबाजी के बारे में थोड़ी और जानकारी हो जाती है तो लगातार अच्छा स्कोर करते रहना कितना मुश्किल होता है। अब उसका स्वभाव और थोड़ी किस्मत ही तय करेगी कि वह कितना आगे जाता है।

भारतीय गेंदबाजों ने लगातार डाली जा रही नो-बॉल पर काफी चर्चा हुई। इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि इससे खेल का रुख बदल सकता है। खेल के बहुत कम पहलू ऐसे होते हैं जो पूरी तरह से खिलाड़ियों के कंट्रोल में होते हैं जैसे बैटर का गार्ड लेना और गेंदबाज का नो बॉल न फेंकना। जब खिलाड़ी इंटरव्यू के लिए आते हैं तो वे उन चीजों के बारे में बात करते हैं जो उनके कंट्रोल में होती हैं। आज जब रनअप को मार्क करने के लिए टेप इत्यादि उपलब्ध हैं तो बॉलिंग क्रीज से आगे पैर रखने का कोई बहाना नहीं होना चाहिए।

भारतीय टीम के स्पिनिंग कोच ने मजाक में कहा कि नो बॉल के बाद फ्री-हिट देने से इस गलती को रोकने में मदद मिल सकती है। प्लीज, इस जुर्माने से टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना आसान न करें। वैसे भी, एक ओवर में बाउंसर की संख्या दो तक सीमित करने और बाउंड्रीज को पास लाने से रन बनाना थोड़ा आसान हो गया है। इसके बजाय, क्यों न हर बार गलती दोहराने पर जुर्माना दोगुना कर दिया जाए और गेंदबाजी कोच पर भी जुर्माने की आधी रकम लगाई जाए? जमा हुए पैसों का इस्तेमाल किसी दौरे पर आखिरी टीम डिनर के लिए किया जा सकता है।

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