ICC के समझाने के बाद पलट सकता है पाकिस्तान, पीसीबी ने वैश्विक संस्था के अधिकारी से फोन पर की
भारत के विरुद्ध टी-20 विश्व कप मैच नहीं खेलने के फैसले पर अब पाकिस्तान फंसता नजर आ रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने दो लाइन का ईमेल लिखकर अ ...और पढ़ें

पाकिस्तान ने जीता पहला मैच।
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण मुंबई: श्रीलंका में 15 मार्च को भारत के विरुद्ध टी-20 विश्व कप मैच नहीं खेलने के फैसले पर अब पाकिस्तान फंसता नजर आ रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने दो लाइन का ईमेल लिखकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को कहा था कि वह फोर्स मेज्योर (अप्रत्याशित या नियंत्रण से बाहर की स्थिति) प्रविधान के तहत भारत के विरुद्ध मैच न हीं खेल सकता है।
इसके बाद ICC ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा कि आप ये बताएं कि ये मामला वैश्विक संस्था के फोर्स मेज्योर प्रविधान के तहत कैसे आता है। यही नहीं इसके बाद ICC ने पीसीबी को 10 प्वाइंट में समझाया कि अगर वह ये मैच नहीं खेलता है तो उसको किन-किन प्रतिबंधों और कितने नुकसान का सामना करना पड़ता है।
ICC के जवाब के बाद पीसीबी की हेकड़ी निकल गई और उसने ICC के एक अधिकारी को फोन करके पीछे के दरवाजे से बात करना शुरू कर दिया। उम्मीद की जा रही है कि रविवार की सुबह तक स्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी।
पीसीबी ने भारत से मैच नहीं खेलने के मामले में सारी जिम्मेदारी पाकस्तानी सरकार पर डालते हुए खुद को स्थिति से अलग करने की कोशिश की थी। ICC ने पीसीबी से पूछा है कि जब टीम सरकार के निर्देशों के तहत पूरे टूर्नामेंट में बाकी मैच खेलने को तैयार है तो सिर्फ एक मुकाबले से हटने का निर्णय कैसे जायज ठहराया जा सकता है।
पीसीबी ने कुछ दिन पहले आधिकारिक तौर पर ICC को ईमेल लिखकर फोर्स मेज्योर प्रविधान लागू करने की मांग की थी। इसमें पाकिस्तान सरकार के उस इंटरनेट मीडिया पोस्ट का हवाला दिया गया था जिसमें 15 फरवरी को कोलंबो में भारत के विरुद्ध होने वाले मुकाबले से टीम को दूर रहने का निर्देश दिया गया था।
ICC के एक निदेशक के अनुसार पीसीबी ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए ICC से संपर्क किया है। ICC का मानना है कि खेल के हित को किसी एकतरफा कार्रवाई से ऊपर रखा जाना चाहिए। फोर्स मेज्योर एक कानूनी प्रविधान है जो किसी पक्ष को असाधारण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों से हटने की छूट देता है। इसमें युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं, सरकारी आदेश या सार्वजनिक आपातकाल जैसी स्थितियां शामिल होती हैं।
इसका इस्तेमाल तभी मान्य होता है जब प्रभावित पक्ष साबित करे कि घटना अनपेक्षित और अपरिहार्य थीं। उसने सभी संभव प्रयास किए ताकि नुकसान को कम किया जा सके। इसके लिए सिर्फ असुविधा या राजनीतिक पसंद पर्याप्त नहीं होती।
पाकिस्तान सरकार ने पहले घोषणा की थी कि टीम केवल भारत के विरुद्ध मैच में हिस्सा नहीं लेगी, ताकि बांग्लादेश का समर्थन किया जा सके। बांग्लादेश ने भारत में सुरक्षा कारणों से खेलने से इन्कार किया था। पाकिस्तान, भारत के अलावा बाकी मैच खेलेगा। आईसीसी ने पीसीबी से पूछा है कि उन्होंने मैच नहीं खेलने का फैसला करने से पहले स्थिति को संभालने के लिए क्या कदम उठाए। इसके लिए विकल्प तलाशे या छूट मांगी।
आईसीसी ने फोर्स मेज्योर लागू करने की वैध शर्तों, बीच में मैच से हटने के लिए जरूरी सबूत, इसके खेल, व्यावसायिक और प्रबंधन पर पड़ने वाले व्यापक असर की जानकारी पीसीबी को दी है। फोर्स मेज्योर का इस्तेमाल अगर अवैध पाया गया तो आईसीसी संभावित हर्जाने की मांग भी कर सकता है।
आईसीसी ने यह भी कहा कि केवल कुछ मैच खेलना वैश्विक टूर्नामेंट के मूल सिद्धांत के खिलाफ है। इससे पीसीबी को अनुबंध उल्लंघन और नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। आईसीसी ने बांग्लादेश के मामले में अपनाए गए समान प्रक्रिया का पालन करते हुए पाकिस्तान के साथ कई दिनों तक इस पर व्यापक चर्चा की थी।
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