AIIMS और ORBO का राष्ट्रीय स्किन डोनेशन-बैंकिंग सत्र, मरीजों के लिए मजबूत नेटवर्क और जागरूकता बढ़ाने पर जोर
एम्स और ओर्बो ने मिलकर राष्ट्रीय स्किन डोनेशन-बैंकिंग सत्र आयोजित किया। उद्देश्य था त्वचा दान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मरीजों के लिए मजबूत नेटवर्क बनाना। विशेषज्ञों ने स्किन डोनेशन के महत्व पर प्रकाश डाला और अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही। एक सुव्यवस्थित नेटवर्क से जरूरतमंदों तक त्वचा पहुँचाने पर जोर दिया गया। सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने की बात भी कही गई।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के प्लास्टिक, रीकंस्ट्रक्टिव और बर्न्स सर्जरी विभाग ने आर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गनाइजेशन (ओआरबीओ) के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्किन डोनेशन-बैंकिंग ब्रेनस्टार्मिंग सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्किन डोनेशन, स्किन रिट्रीवल और स्किन बैंकिंग प्रणाली की कमियों की समीक्षा कर बेहतर रणनीति बनाना था।
विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंघल ने बताया कि भारत में हर वर्ष लगभग 70 लाख लोग जलने का शिकार होते हैं। इनमें से लगभग 1.5 लाख लोगों की मृत्यु होती है और लगभग 2.5 लाख लोग स्थायी विकलांगता का सामना करते हैं। कहाकि देश में स्किन ग्राफ्ट की मांग उपलब्ध स्किन से कई गुना अधिक है, इसलिए स्किन डोनेशन और स्किन बैंक को बढ़ावा देना आवश्यक है।
जागरूकता की कमी
आर्गन रिट्रीवल बैंकिंग आर्गनाइजेशन (ओआरबीओ) की प्रमुख प्रो. आरती विज ने बताया कि स्किन डोनेशन को लेकर जन-जागरूकता बेहद कम है। साथ ही स्किन रिट्रीवल टीमों के प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं, तकनीकी निवेश, शोध और आर्गन-टिश्यू नेटवर्किंग में सुधार की भी जरूरत है।
नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन के निदेशक डा. अनिल कुमार ने राष्ट्रीय स्किन डोनेशन-रजिस्ट्री पोर्टल, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और नियमों की जानकारी दी। देशभर के स्किन बैंकों ने अपने स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी), कार्य-माडल, आंकड़े और चुनौतियां साझा कीं। नेशनल बर्न्स सेंटर, मुंबई के डा. सुनील केसवानी ने 17 वर्षों के अनुभव से जुड़े गुणवत्ता मानक और प्रभावी प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
22 स्किन बैंकों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
विशेषज्ञों ने कम जागरूकता, सीमित वित्तीय संसाधन और दूरस्थ इलाकों से छह घंटे के भीतर स्किन रिट्रीवल की कठिनाइयों को इस मामले में प्रमुख बाधा माना। बैठक इस सहमति के साथ समाप्त हुई कि देश में स्किन कलेक्शन-बैंकिंग का मजबूत नेटवर्क बनाकर मरीजों को समय पर जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सत्र में देश के 22 स्किन बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ प्लास्टिक व बर्न्स सर्जन, नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (एनओटीटीओ), अस्पताल प्रशासक, एनाटामी और फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ, नर्सें, टेक्निशियन और कई स्वयंसेवी संगठन शामिल हुए।

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