9 साल पहले ही सामने आ गई थीं बारापुला फेज-3 की खामियां, AIIMS-मयूर विहार सफर सुधारने को एक्सपर्ट्स ने सुझाए उपाय
बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना में नौ साल पहले ही खामियां सामने आ गई थीं, जिस पर तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल ने भी सवाल उठाए थे।

मयूर विहार की ओर से बारापुला फ्लाईओवर चढ़ने के लिए सीधा मार्ग न होने के कारण वाहन चालकों को घूम कर जाना पड़ रहा है। जागरण
HighLights
नौ साल पहले ही बारापुला फेज-3 की खामियां सामने आई थीं।
तत्कालीन उपराज्यपाल ने जमीन न होने पर काम शुरू करने पर सवाल उठाए।
अब एलजी की सिफारिश पर एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कारिडोर परियोजना की खामियों को लेकर करीब नौ साल पहले ही सवाल उठ गए थे। तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल ने 2017 में परियोजना से जुड़ी फाइल पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई करने की टिप्पणी की थी।
उन्होंने पूछा था कि जब परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध नहीं थी तो निर्माण कार्य कैसे शुरू कर दिया गया। साथ ही डिजाइन तैयार कर उसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे।
हालांकि बाद में यह फाइल दब गई और जांच आगे नहीं बढ़ सकी। सत्ता में आने पर भाजपा सरकार की इस परियोजना की संपूर्ण जांच की सिफारिश पर एलजी वी के सक्सेना ने जांच भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को सौंप दी। इस मामले में एसीबी एफआइआर दर्ज कर जांच कर रही है।
बगैर जमीन उपलब्ध होने पर भी शुरू किया काम
लोक निर्माण विभाग में तैनात रहे एक वरिष्ठ अधिकारी इस बात की पुष्टि करते हैं कि 2017 में जब किसानों की जमीन बीच मेंं आ जाने पर काम रुक जाने की बात सामने आने का मामला उस समय के एलजी अनिल बैजल के सामने पहुंचा।
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उस समय आम आदमी पार्टी की सरकार एलजी पर परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दबाव बना रही थी, एलजी ने परियोजना को लेकर रिपोर्ट मांगी और अपने कार्यालय के अधिकारियोंं से अध्ययन करने के लिए कहा, जिसमेंं सामने आया कि बगैर पूरी जमीन उपलब्ध होने पर भी परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि फेज-3 की तीन लेन को गलत तरीके से फेज एक के दो लेन वाले क्लाेवरलीफ में मिलाया गया है और उस भाग काे बना भी दिया गया है जो भविष्य में समस्या खड़ी कर सकता है।
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मयूर विहार फेज- के सामने फ्लाईओवर चढ़ने का भाग भी ठीक नहीं है। यह भी बात कही गई कि बारापुला फेज एक के पास से सीधे मयूर विहार-फेज एक के सामने भी इसी मिलाया जा सकता था, मगर इसे बगैर किसी ठोस कारण के सराय काले खां के सामने ले जाया गया है।
बारापुला फेज-3
प्रमुख खामियां और परिवहन विशेषज्ञों के सुझाव
प्रमुख खामियां
- 1 मयूर विहार फेज-1 के सामने बारापुला फेज-3 पर चढ़ने के लिए सीधा संपर्क मार्ग नहीं
- 2 चढ़ने का रास्ता नहीं होने से यह हिस्सा बना बॉटलनेक
- 3 सड़क की चौड़ाई कम होने से वाहनों की रफ्तार प्रभावित हो रही है और जाम बढ़ रहा है
- 4 एम्स से मयूर विहार की ओर आने वाले वाहनों के लिए एनएच-9 की तरफ जाने का सीधा रास्ता नहीं
- 5 अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन आरओबी यू-टर्न पर वाहनों का दबाव बढ़ा
- 6 एनएच-9 पर कामनवेल्थ गेम्स विलेज फ्लाईओवर के नीचे बने यू-टर्न पर भी वाहनों का बढ़ा दबाव। यहां कार्यालय में काम कर रहे कर्मियों का यू-टर्न पार करना हो रहा मुश्किल
परिवहन विशेषज्ञों के सुझाव
त्वरित उपाय
- एनएच-24 की ओर से आने वाले यातायात को बारापुला पर जाने के लिए मयूर विहार फेज-1 फ्लाईओवर पार कराकर यू-टर्न देकर रास्ता दिया जाए
- मयूर विहार फ्लाईओवर के नीचे दोनों तरफ यू-टर्न बनाए जाएं
- अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन आरओबी यू-टर्न को चौड़ा किया जाए
- एनएच-9 से सहारनपुर हाइवे और बारापुला पर आने के लिए अक्षरधाम सीडब्ल्यूजी फ्लाईओवर से पहले निकास दिया जाए
- बारापुला के आईएनए निकास पर लगी लालबत्ती हटाई जाए
दूरगामी उपाय
- एनएच-24 की ओर से आने वाले यातायात को बारापुला पर जाने के लिए मयूर विहार फेज-1 फ्लाईओवर पर हाफ राइट-टर्न फ्लाईओवर बनाकर बारापुला पर सीधा संपर्क दिया जाए
- अक्षरधाम यूपी लिंक रोड फ्लाईओवर पर क्लोवरलीफ बनाकर बारापुला के यातायात को एनएच-9 पर गाजियाबाद की ओर रास्ता दिया जाए
- एनएच-9 से सहारनपुर हाइवे पर जाने के लिए एनएच पर अक्षरधाम के सामने कश्मीरी गेट की तर्ज पर हाफ यू-टर्न फ्लाईओवर बनाया जाए
- सूर्य घड़ी क्लोवरलीफ की चौड़ाई बढ़ाई जाए या बारापुला-3 को क्लोवरलीफ से आगे बारापुला-1 में मिलाया जाए
