9 महीने में 3320 मौतें, देश में क्लाइमेट चेंज की खौफनाक तस्वीर; CSE की रिपोर्ट में डराने वाला खुलासा
देश में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 92% दिनों में चरम मौसमी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 3320 लोगों की मौत हुई और 42.5 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई।

मौसम की मार से पांच साल में 16000 लोगों की मौत हो गई। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
9 महीने में 251 दिन चरम मौसमी घटनाएं हुईं।
इन घटनाओं में 3320 लोगों की जान गई।
उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित राज्य रहे।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। देश में मौसम की चरम घटनाएं अब लगभग रोजाना की चुनौती बनती जा रही हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) और डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट 'क्लाइमेट इंडिया 2026' के मुताबिक, इस साल जनवरी से सितंबर के बीच देश में 273 में से 251 दिन यानी 92 प्रतिशत दिनों में कहीं न कहीं अतिविषम मौसमी घटनाएं दर्ज की गईं।
इन घटनाओं में 3320 लोगों की मौत हुई, 42.5 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई, 1,28,334 मकान तबाह हुए और 47,244 पशुओं की जान गई।
मौसम की मार के मामले में उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित रहे। दोनों राज्यों में साल के शुरुआती नौ महीनों के करीब 64 प्रतिशत दिनों में चरम मौसमी घटनाएं दर्ज की गईं।
हालांकि, मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 811 के आंकड़े के साथ पहले स्थान पर रहा। महाराष्ट्र में 286 और बिहार में 245 लोगों की मौत हुई।

दिल्ली में गर्मी से लेकर बारिश तक मौसम के चरम रूप
राजधानी दिल्ली भी मौसम के बदलते मिजाज से अछूती नहीं रही। मई में भीषण गर्मी के दौरान रिज में अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
वहीं, अक्टूबर में भारी बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की चुनौती फिर सामने रखी। 12 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे समाप्त हुए 24 घंटों में सफदरजंग में 41.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो अक्टूबर में चार वर्षों का सर्वाधिक दैनिक आंकड़ा था।
रिज में 49 मिमी वर्षा हुई, जबकि सैनिक फॉर और महिपालपुर समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी।
पांच साल में 2.06 करोड़ हेक्टेयर फसल प्रभावित
रिपोर्ट के पांच वर्षीय विश्लेषण के अनुसार, 2022 से 2026 के बीच चरम मौसमी घटनाओं में 16,303 लोगों की जान गई। इनमें करीब 65 प्रतिशत मौतें 2024 से 2026 के दौरान हुईं।
इस अवधि में कम से कम 2.06 करोड़ हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ। वर्ष 2022 में 18.4 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 94.7 लाख हेक्टेयर हो गया।
इस साल भी सितंबर तक 42.5 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हो चुकी थी। महाराष्ट्र में सर्वाधिक 28.3 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 6.9 लाख हेक्टेयर और बिहार में 2.3 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा।

बदल रहा है मौसम का चक्र
रिपोर्ट के मुताबिक, सर्दियां गर्म हो रही हैं और शीतलहर की घटनाएं घट रही हैं। फरवरी 2026 पांच वर्षों में पहला ऐसा फरवरी रहा, जब शीतलहर या शीत दिवस की कोई घटना दर्ज नहीं हुई।
यह 125 वर्षों में चौथा सबसे गर्म फरवरी भी रहा। वहीं, इस साल मानसून के दौरान सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन इसके बावजूद मानसून के सभी 122 दिनों में देश के किसी न किसी हिस्से में भारी बारिश, बाढ़ या भूस्खलन हुआ।
हर साल लगभग रोजाना कोई न कोई चरम मौसमी घटना हो रही है। सरकारों को केवल आपदा के बाद राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय जोखिम कम करने, जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने, जल पुनर्भरण और हरित क्षेत्रों के संरक्षण पर ध्यान देना होगा।
- सुनीता नारायण, महानिदेशक, सीएसई
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