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    दिल्ली में जलवायु परिवर्तन का कहर, 2025 में आंधी-बारिश से गई 15 लोगों की जान 

    Updated: Tue, 03 Mar 2026 08:30 PM (IST)

    सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में 99% दिनों में तीव्र मौसमी घटनाएं हुईं। दिल्ली में भी आंधी और भारी ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्मक एआई फोटो (सौजन्य- gemini)

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन के चलते चरम मौसमी घटनाएं किस हद तक बढ़ रही हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जनवरी से नवंबर 2025 के दौरान देश भर में 99 प्रतिशत दिनों में कहीं न कहीं ऐसी घटनाएं घटीं।

    कुल 334 दिनों में से 331 दिन यह मौसमी घटनाएं देखने को मिलीं। इसमें से 320 घटनाएं अत्यधिक वर्षा, इससे जुड़ी बाढ़ और भूस्खलन की थी। 228 घटनाएं बिजली गिरने व आंधी की, 52 घटनाएं लू, 46 घटनाएं शीत लहर, 19 घटनाएं बादल फटने की और तीन घटनाएं बर्फबारी और चक्रवात की थीं।

    दिल्ली में भी बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं

    जनवरी से नवंबर 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में आंधी और वर्षा की तीव्रता साल दर साल बढ़ रही है। सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) द्वारा हाल ही में जारी स्टेट ऑफ एन्वायरमेंट 2026 रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में इस दौरान भारी वर्षा की तीन घटनाओं में नौ लोगों की जान गई। वहीं आंधी की पांच घटनाओं में छह लोगों को जान गंवानी पड़ी। चार दिन लू चली, लेकिन यह जानलेवा साबित नहीं हुई।

     

    महासागरों में बढ़ा खारापन

    रिपोर्ट में बताया गया है कि जीवाश्म ईंधन (मुख्य रूप से कोयला) की वजह से महासागरों में खारापन बढ़ा है। औद्योगिक युग की शुरूआत से समुद्र ही सतह का खारापन 30 से 40 प्रतिशत बढ़ चुका है। बढ़ता खारापन उन कोरल, मोलस्क, प्लवकों के लिए खतरा है जो कैल्शियम कार्बोनेट के खोल या कंकाल बनाते हैं।

    बचाव के उपाय

    जलवायु संकट से बचने के लिए व्यक्तिगत और वैश्विक स्तर पर तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। इनमें जीवाश्म ईंधन को कम करना, ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा (सौर/पवन) का उपयोग, वृक्षारोपण और जीवनशैली में बदलाव (प्लास्टिक कम करना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग) शामिल है। कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए टिकाऊ कृषि और पुनर्चक्रण भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

    जलवायु संकट अब उस जगह पहुंच रहा है जहां से वापसी संभव नहीं होगी। यदि हम बीते तीन सालों का औसत लें तो दुनिया पहली बार 1.5 डिग्री से अधिक तापमान को पार कर जाएगी। यह संकेत है कि हम सुरक्षा की निर्धारित सीमा का उल्लंघन कर रहे हैं। अगर अब भी हम भविष्य के प्रति नहीं चेते तो फिर शायद बहुत देर होती जाएगी।


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    -पदमश्री सुनीता नारायण, महानिदेशक, सीएसई