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JNU को लेकर दिल्ली HC का बड़ा फैसला, डेप्रिवेशन प्वाइंट्स के साथ एडमिशन जारी रखने का आदेश; स्टे हटाया

Updated: Tue, 18 Aug 2026 07:29 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने जेएनयू को डेप्रिवेशन प्वाइंट का उपयोग कर छात्रों को दाखिला देना जारी रखने की अनुमति दी है। यह निर्णय एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ आया है, जिसने इस नीति पर रोक लगा दी थी।

जेएनयू में दाखिले पर लगा स्टे हटा। फोटो: आर्काइव

जेएनयू में दाखिले पर लगा स्टे हटा। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने जेएनयू को डेप्रिवेशन प्वाइंट उपयोग की अनुमति दी

  2. एकल पीठ के अंतरिम आदेश पर हाई कोर्ट ने रोक लगाई

  3. दाखिला प्रक्रिया जारी रहेगी, परिणाम याचिका पर निर्भर

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को जेएनयू को वंचित होने के आधार पर मिलने वाले अंक (डेप्रिवेशन प्वाइंट) का इस्तेमाल करके छात्रों को दाखिला देना जारी रखने की अनुमति दे दी।

एकल पीठ के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने आदेश दिया कि जेएनयू, ई-प्रास्पेक्टस में दिए गए प्रविधानों के अनुसार दाखिला प्रक्रिया जारी रखेगा।

इसमें एकल पीठ के समक्ष चुनौती देने वाले प्रविधान भी शामिल हैं। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि इसके बाद होने वाला कोई भी दाखिला याचिका के नतीजे पर निर्भर करेगा। मुख्य पीठ ने एकल पीठ से कार्यवाही में तेजी लाने और उसे जल्द से जल्द पूरा करने का भी अनुरोध किया।

एकल पीठ ने 14 अगस्त को दाखिले पर लगाई थी रोक

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की एकल पीठ ने 14 अगस्त को पारित एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए जेएनयू को इस नीति के आधार पर छात्रों को दाखिला देने से रोक दिया था।

 

पीठ ने कहा था कि डेप्रिवेशन प्वाइंट के माध्यम से जेएनयू ने कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) में छात्रों को मिले अंकों में बदलाव किया है। अगर इसकी अनुमति दी जाती है, तो दाखिला परीक्षा की पवित्रता खत्म हो जाएगी और यूनिवर्सिटी नियमों के जरिए किसी उम्मीदवार के प्रतियोगी परीक्षा में मिले स्कोर को बदल सकेगी। यह प्रतियोगी परीक्षा के पूरे स्वरूप के ही खिलाफ है।

डेप्रिवेशन प्वाइंट से मिल सकते हैं 36 तक अतिरिक्त अंक

डेप्रिवेशन प्वाइंट वे अतिरिक्त अंक होते हैं जो उम्मीदवारों को उनकी पिछली स्कूली शिक्षा की भौगोलिक स्थिति के आधार पर दिए जाते हैं। जेएनयू के 2026–27 के प्रास्पेक्टस में 12 तक डेप्रिवेशन प्वाइंट देने का प्राधान है। हर प्वाइंट तीन अंकों के बराबर होता है और इसका मतलब है कि एक उम्मीदवार को असल में 36 तक अतिरिक्त अंक मिल सकते हैं।

जेएनयू ने तर्क दिया कि डेप्रिवेशन प्वाइंट देने की नीति देश के अलग-अलग इलाकों से पर्याप्त संख्या में छात्रों को शामिल करने के मकसद से बनाई गई है। अमित मेहरा की याचिका पर एकल पीठ के निर्णय को जेएनयू ने चुनौती दी थी।

अपील को मंजूर करते हुए पीठ ने कहा कि जेएनयू डेप्रिवेशन प्वाइंट देने की नीति 1974 से चल रही है और एकल पीठ के आदेश की वजह से पूरी दाखिला प्रक्रिया रुक गई है।

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