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बालिग की मर्जी के खिलाफ नहीं दे सकते आदेश, वीरेंद्र देव आश्रम केस में स्वजन की अर्जी पर बोला दिल्ली HC

Updated: Mon, 31 Aug 2026 07:11 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में एक महिला के रहने के फैसले में हस्तक्षेप करने से ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने दखल देने से किया इनकार। फोटो: आर्काइव

दिल्ली हाई कोर्ट ने दखल देने से किया इनकार। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने बालिग महिला के फैसले में दखल से इनकार

  2. महिला ने कहा वह 2015 से स्वेच्छा से आश्रम में रह रही है

  3. दिल्ली सरकार ने आश्रम के कामकाज पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल की

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के फरार संस्थापक वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में रहने के महिला के फैसले में दखल देने से सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया।

महिला के स्वजन की अर्जी पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि अदालत किसी बालिग को उसकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।

अदालत ने ये रुख तब अपनाया जब अदालत में पेश होकर महिला ने कहा कि उसका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर है और वह 2015 से बिना किसी डर या दबाव के आश्रम में रह रही है।

बालिग की इच्छा के विरुद्ध नहीं दे सकते निर्देश

महिला के बयान को सुनने के बाद पीठ ने सवाल किया कि क्या कोई कोर्ट किसी बालिग को किसी जगह जाने का निर्देश दे सकता है? संविधान प्रत्येक व्यक्ति को कहीं भी आने-जाने की आजादी देता है और क्या अदालत महिला को किसी खास जगह जाने का निर्देश दे सकती है?

आश्रम में नशीली दवाएं देने का आरोप लगा था

महिला के स्वजन ने पिछली सुनवाई में आरोप लगाया था कि आश्रम में रहने वालों को नशीली दवाएं दी जा रही थीं और वे किसी भी चीज के लिए अपनी मर्जी से सहमति देने में मानसिक रूप से अक्षम थे।

महिला के बयान को देखते हुए पीठ ने कहा कि स्वजन की याचिका पर किसी फैसले की जरूरत नहीं है। पीठ ने स्पष्ट कहा कि जब तक कोई सदस्य यह शिकायत लेकर सामने नहीं आता कि उसे रोका जा रहा है, तब तक कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।

आश्रम के कामकाज पर 23 सितंबर को सुनवाई

इस दौरान दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए स्थायी अधिवक्ता समीर वशिष्ठ ने पीठ को बताया कि आश्रम के कामकाज को लेकर स्थिति रिपोर्ट दाखिल की गई है। इस पर पीठ ने कहा कि रिपोर्ट पर 23 सितंबर को विचार किया जाएगा।

दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया कि आश्रम में अभी लगभग 100 महिलाएं रह रही हैं और वहां कोई नाबालिग नहीं है। यह अर्जी, आश्रम में रहने वाले महिलाओं के रिश्तेदारों द्वारा पूर्व में दायर लंबित याचिकाओं पर दाखिल की गई है।

2017 का मामला, CBI को सौंपी गई थी जांच

वर्ष 2017 में एक एनजीओ की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था और हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी थी।

एनजीओ ने आरोप लगाया था कि रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में कई नाबालिग लड़कियों और महिलाओं को अवैध रूप से बंधक बनाकर उनसे दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था। यह भी कहा गया था कि बंधक युवतियों व महिलाओं को अपने माता-पिता से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

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