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    'हीट चैंबर' बन रही है दिल्ली, 15 साल में 2.6 डिग्री चढ़ा पारा; अब और सताएगी लू

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 09:08 PM (IST)

    दिल्ली में जलवायु अनुसंधान संस्था 'एनवायरोकैटालिस्ट्स' के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में तापमान में 2.6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में वार ...और पढ़ें

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    दिल्ली में पिछले 15 वर्षों में तापमान में 2.6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है।

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    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। जलवायु अनुसंधान संस्था 'एनवायरोकैटालिस्ट्स' के नवीनतम उपग्रह-आधारित विश्लेषण से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के 250 नगर निगम वार्डों में गर्मी का बढ़ना कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि 2011 से जारी एक खतरनाक प्रवृत्ति का हिस्सा है।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रिकॉर्ड बताते हैं कि मार्च महीने का औसत अधिकतम तापमान जो 2011 में 30.0 डिग्री था, वह 2026 में बढ़कर 32.6 डिग्री सेल्सियस हो गया है। यानी 15 वर्षों में 2.6 डिग्री सेल्सियस की सीधी वृद्धि। हैरत की बात यह कि सिर्फ हवा ही नहीं, जमीन भी तप रही है। उपग्रह डेटा के अनुसार, दिल्ली का औसत 'लैंड सरफेस टेम्परेचर' 2015 के 29.1 डिग्री से बढ़कर 2026 में 32.0 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है।

    वार्ड-स्तर पर भारी असमानता

    इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी चिंता यह है कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में गर्मी का प्रभाव एक जैसा नहीं है:-

    -सबसे गर्म इलाके: दक्षिण दिल्ली की घनी आबादी वाले संगम विहार (ए) में 2015 से 2026 के बीच तापमान में 6.1 डिग्री की भारी बढ़त देखी गई। मीठापुर, मदनगीर और तिगरी में भी 5 डिग्री तक की वृद्धि दर्ज हुई।

    -तापमान का अंतर : मार्च 2026 में जहां महिपालपुर 34.4 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा, वहीं नांगल ठकरान 29.2 डिग्री पर था। एक ही शहर और एक ही मौसम अलर्ट के बावजूद तापमान में 5 डिग्री का अंतर दर्ज किया गया।

    कंक्रीट का जाल और घटती वर्षा

    एनवायरोकैटालिस्ट्स के संस्थापक सुनील दहिया के अनुसार, 'जहां पहले पार्क या जल निकाय थे, वहां अब कंक्रीट के निर्माण ने ले ली है। यही सतह के तापमान में वृद्धि का मुख्य कारण है।' साथ ही, इस साल दक्षिण दिल्ली में सामान्य से 19 प्रतिशत और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में 33 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। कम वर्षा का मतलब है साफ आसमान और कंक्रीट द्वारा सोखी गई अधिक सौर विकिरण, जिससे गर्मी और बढ़ गई है।

    भविष्य की चेतावनी

    मई और जून के महीनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। डेटा दिखाता है कि दिल्ली के सभी 250 वार्ड 'हीट स्ट्रेस' जोन में हैं। 16 अप्रैल 2026 तक दिल्ली का तापमान पहले ही 40.3 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है।

    क्या है समाधान?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अब पूरी दिल्ली के लिए एक सामान्य योजना के बजाय ''वार्ड-लेवल हीट एक्शन प्लान'' की जरूरत है। दहिया कहते हैं, 'हमें वार्ड स्तर पर कूलिंग शेल्टर बनाने, प्राकृतिक निर्माण सामग्री का उपयोग करने और शहरी गलियारों को हरा-भरा करने पर तुरंत ध्यान देना होगा। डेटा हमें स्पष्ट बता रहा है कि काम कहां से शुरू करना है।'

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