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दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों पर नई परिभाषा: MCD ने कचरे को तीन श्रेणियों में बांटा

Updated: Sun, 16 Aug 2026 11:20 PM (IST)

दिल्ली नगर निगम ने लैंडफिल पर मौजूद कचरे की परिभाषा बदल दी है, इसे लिगेसी, सेमी-लिगेसी और फ्रेश वेस्ट में बांटा है। यह बदलाव कचरा निस्तारण की प्रगति रिपोर्ट को प्रभावित करेगा, साथ ही पांच नए कचरा निस्तारण संयंत्र भी विकसित किए जा रहे हैं।

पिछले डेढ़ साल में लैंडफिल पर डाले गए कचरे को नहीं माना जाएगा पुराना।

पिछले डेढ़ साल में लैंडफिल पर डाले गए कचरे को नहीं माना जाएगा पुराना।

HighLights

  1. MCD ने लैंडफिल कचरे को तीन श्रेणियों में बांटा।

  2. 31 मार्च 2025 तक का कचरा 'लिगेसी वेस्ट'।

  3. दिल्ली में पांच नए कचरा निस्तारण संयंत्र विकसित हो रहे।

निहाल सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली के तीनों कूड़े के पहाड़ खत्म करने की समय-सीमा भले ही बार-बार बदल रही हो, लेकिन अब नगर निगम ने इन लैंडफिल साइट पर मौजूद कचरे की परिभाषा ही बदल दी है। एमसीडी ने लैंडफिल पर पड़े कचरे को तीन श्रेणियों में बांटा है। इसके तहत 31 मार्च 2025 तक डाला गया कचरा ही ‘लिगेसी वेस्ट’ यानी पुराना कचरा माना जाएगा। इसके बाद का कचरा पहले ‘सेमी-लिगेसी’ (अर्ध पुराना) और फिर ‘फ्रेश वेस्ट’ (ताजा कचरा) की श्रेणी में रखा गया है। इससे पुराना कचरा हटाने की प्रगति रिपोर्ट में आंकड़े अलग-अलग दिखेंगे, लेकिन लैंडफिल पर मौजूद कुल कचरे की मात्रा इससे कम नहीं होगी।

एमसीडी द्वारा कूड़ा निस्तारण को लेकर तैयार किए गए दस्तावेज के अनुसार, एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक लैंडफिल पर डाला गया कचरा ‘सेमी-लिगेसी वेस्ट’ माना जाएगा। वहीं, एक अप्रैल 2026 के बाद डाला जा रहा कचरा ‘फ्रेश वेस्ट’ कहलाएगा। निगम का तर्क है कि इससे पुराने और हाल के वर्षों में लैंडफिल पर पहुंचे कचरे का अलग-अलग आकलन और निस्तारण किया जा सकेगा।

करीब 43 एकड़ भूमि पर पांच नए कचरा निस्तारण संयंत्र विकसित

एमसीडी अधिकारियों के अनुसार कूड़े की सही मात्रा और आकलन के लिए यह व्यवस्था की गई है। इसलिए लैंडफिल पर पहुंच रहे नए कचरे के निस्तारण की अलग व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत दिल्ली में करीब 43 एकड़ भूमि पर पांच नए कचरा निस्तारण संयंत्र विकसित किए जा रहे हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 5900 टन प्रतिदिन होगी।

सिंघोला में 6.6 एकड़ में बनने वाले संयंत्र की क्षमता 700 टन प्रतिदिन

निगम को उम्मीद है कि ये संयंत्र 30 सितंबर तक शुरू हो जाएंगे। हालांकि मानसून और बाद में वायु प्रदूषण के कारण ग्रेप लागू होने की स्थिति में काम प्रभावित होने की आशंका है। एमसीडी के दस्तावेज के अनुसार भलस्वा में करीब 12 एकड़ में बनने वाले संयंत्र की क्षमता 1800 टन प्रतिदिन होगी। यहां करीब 401 रुपये प्रति टन की दर से कचरा निस्तारण प्रस्तावित है। वहीं सिंघोला में 6.6 एकड़ में बनने वाले संयंत्र की क्षमता 700 टन प्रतिदिन होगी और यहां करीब 294.50 रुपये प्रति टन की दर से निस्तारण किया जाएगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में एनजीटी के आदेश के बाद दिल्ली के तीनों लैंडफिल से कूड़े के पहाड़ को खत्म करने का काम शुरू हुआ था। ऐसे में कचरे की श्रेणी बदलने के साथ निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लैंडफिल पर मौजूद कुल कचरे में वास्तव में कितनी कमी आती है।

तीनों लैंडफिल पर अब भी लाखों टन जमा है कचरा

एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, ओखला लैंडफिल से पुराना कचरा लगभग साफ हो चुका है, लेकिन वहां अभी करीब 15 लाख टन कचरा मौजूद है। भलस्वा में करीब 19.4 लाख टन और गाजीपुर में करीब 68.5 लाख टन कचरा जमा है। भलस्वा में करीब 15.17 लाख टन लिगेसी और सेमी-लिगेसी वेस्ट है, जबकि करीब 4.24 लाख टन नया कचरा है। गाजीपुर की स्थिति सबसे खराब है। यहां मौजूद करीब 68.5 लाख टन कचरे में लगभग 66.8 लाख टन लिगेसी और सेमी-लिगेसी वेस्ट है। यानी कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए पुराने कचरे की बायोमाइनिंग के साथ नए कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोकना भी निगम के लिए बड़ी चुनौती है।

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