SIR को लेकर दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में बढ़ी टेंशन, बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम कटने से हलचल तेज
दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चिंता और सक्रियता देखी जा रही है। ...और पढ़ें

तुर्कमान गेट स्थित एक सामुदायिक भवन में लगे एसआईआर जागरूकता कैंप में जुटी महिलाएं। जागरण

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नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। जामा मस्जिद के नजदीक दीन दुनिया नामक इमारत में काफी मुस्लिम जुटे हैं जिसमें महिलाएं भी हैं। यहां एक एनजीओ द्वारा लगाए गए शिविर में दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जा रहा है। अधिवक्ता, नेता व समाजसेवी बता रहे हैं कि यह प्रक्रिया कैसे पूरा होगी तथा उसके लिए क्या- क्या दस्तावेज आवश्यक होंगे।
क्यों बढ़ी मुस्लिम मतदाताओं की चिंता?
साथ ही उससे संबंधित लोगों की शंकाओं के समाधान की भी कोशिश की जा रही है। कुछ सवाल है जो अब भी अनुत्तरित है कि वर्ष 2002 के मतदाता सूची में दर्ज नाम में त्रुटि है या पता बदल गया है तो आगे क्या होगा? इसी तरह, आधार कार्ड और मतदाता सूची में नाम अलग-अलग है।
दिल्ली में कब तक चलेगी एसआईआर की प्रक्रिया?
दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया मार्च से शुरू है। फिलहाल विधानसभा वार वोटर लिस्ट की मैपिंग की जा रही है। जिसमें, बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर या कैंप लगाकर वर्ष 2002 के मतदाता सूची के आधार पर मतदाताओं की मैपिंग की जा रही है और उसे एप में फीड किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरे अप्रैल माह चलेगी। मई से वास्तविक एसआईआर का काम शुरू होगा।
बहरहाल, दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में उस प्रक्रिया को लेकर चिंता के साथ सरगर्मी है। खासकर, उत्तर प्रदेश, बिहार व बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में लाखों लोगों के नाम कटने के मामले ने चिंता बढ़ाई है, जिसमें विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्तारूढ़ केंद्र सरकार विरोधी मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से जानबूझकर हटाया जा रहा है। तुर्कमान गेट में सामुदायिक केंद्र में स्थित संस्था मिशन एजुकेशन के अध्यक्ष शफी देहलवी कहते हैं कि एसआईआर को लेकर मुस्लिम समुदाय में शंका अधिक है।
चार विधानसभाओं में 35 से 40 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
पुरानी दिल्ली की चार विधानसभाओं में लगभग 35 से 40 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। उसमें मटिया महल व बल्लीमारान मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है। इलाके में राजनीतिक दलों के नेता भी खासे सक्रिय हैं। शफी देहलवी बताते हैं कि इस प्रक्रिया ने मुस्लिम लोगों की चिंता बढ़ाई हुई है, अगर मतदाता मैपिंग में नाम सही ही मिल रहे हैं तो मतदाता को कोई पर्ची नहीं दी जा रही है, जिससे कि वह मतदाता सूची से नाम न कटने को लेकर आश्वस्त हो सके।
कांग्रेस पार्टी के नेता कुंवर शहजाद कहते हैं कि पुराने वोट लिस्ट तलाशे जा रहे हैं। साथ ही कोई दूसरे स्थान से आया है तो वह अपने घर को जाकर वहां से तलाश कर ला रहा है। उससे परेशानी बढ़ी है। कई लोगों को नहीं पता है कि उनका क्षेत्र वर्ष 2002 में कौन सा था। उनका कौन सा बूथ था। वैसे, मुख्य निर्वाचन कार्यालय अधिकारी दिल्ली की वेबसाइट पर मतदाता सूची को डाल दिया गया है, जिससे लोगों को सहूलियत हो रही है।
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