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    दिल्ली-एनसीआर में 15,000 किलोमीटर सड़कों पर अवैध पार्किंग-अतिक्रमण, क्या स्वीडन जैसी सख्ती से होगा समाधान?

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 12:07 PM (IST)

    दिल्ली-एनसीआर के करोड़ों लोग रोज़ाना जाम के उस 'चक्रव्यूह' में फंसते हैं, जिसका कोई सिरा नहीं। कभी बढ़ती जनसंख्‍या और वाहनों की संख्‍या का हवाला दिया ...और पढ़ें

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    दिल्ली-एनसीआर में यातायात जाम एक गंभीर समस्या है। जागरण

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में ऐसा आमतौर पर देखा जाता है कि एनसीआर के शहरों से राजधानी में प्रवेश करने वाले हाईवे या मुख्य सड़कों पर जब यातायात जाम लगता है तो उनके साथ लगती सड़कों पर भी कुछ ही देर में जाम लग जाता है और क्षेत्र के लोगों का भी वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है।

    ऐसा इसलिए होता है कि मुख्यतया दिल्ली की रिंग रोड से भीतरी इलाकों की ओर जाने वाली ये सड़कें अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के कारण संकरी हो जाती हैं। निराशाजनक यह है कि इन सड़कों को चौड़ा करने या अतिक्रमणमुक्त करने की दिशा में कभी कोई ठोस पहल नहीं हुई, जिसके परिणामस्वरूप साल दर साल सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने के साथ ही इन भीतरी सड़कों से गुजरना किसी जंग जीतने से कम नहीं रह गया है।

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    एनसीआर के शहरों की भीतरी सड़कों की भी यही स्थिति है। सवाल यही कि राजधानी की इन भीतरी सड़कों को चौड़ा करने व इन्हें अतिक्रमणमुक्त करने की दिशा में कोई ठोस काम क्यों नहीं होता, इसमें कहां लापरवाही रहती है? साथ ही दिल्ली की इन सड़कों को चौड़ा करना व अतिक्रमणमुक्त करना कितना है जरूरी और वर्तमान में इन्हें वाहनों का भारी दबाव सहने योग्य बनाने के लिए क्या किए जाएं ठोस उपाय :

    दिल्ली सहित एनसीआर में सारी सरकारी एजेंसियां अतिक्रमण हटाने के दावे बहुत करती हैं, लेकिन उनकी खुद ही मिलीभगत उसे साथ ही पलीता भी लगाती हैं। नगर निगम, पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण सभी की मिलीभगत के कारण जनता को जाम झेलना पड़ता है।

    यही कारण है, दिल्ली सहित एनसीआर में बीते पांच साल में अतिक्रमण हटाने के दावे तो बहुत हुए लेकिन कहीं भी ऐसी प्रेरक व्यवस्था नहीं कि जहां दोबारा अतिक्रमण नहीं हुआ हो। कहीं कुछ घंटों बाद तो कहीं थोड़े दिन बाद अतिक्रमण हो जाता है।  

    क्या आप मानते हैं कि दिल्ली समेत एनसीआर की भीतरी सड़कें वर्तमान में वाहनों का दबाव झेलने योग्य नहीं रह गई हैं?

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    क्या दिल्ली समेत एनसीआर की भीतरी सड़कों को अतिक्रमणमुक्त करने को लेकर संबंधित विभाग उदासीन दिखते हैं?

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    ट्रैफिक का दबाव, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हैं कारण

    दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए)  के पूर्व योजना आयुक्‍त अशोक कुमार जैन बताते हैं कि दिल्ली के ट्रैफिक ग्रिडलाक को अनलाक करने के लिए केवल नई सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं। इसके लिए अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बेहतर पैदल यात्री सुविधाएं और एक ऐसी एकीकृत क्षेत्रीय योजना की आवश्यकता है जो दिल्ली और उसके पड़ोसी शहरों को एक सूत्र में पिरो सके। 1,483 वर्ग किलोमीटर में फैली दिल्ली की आबादी लगभग 2.2 से 2.3 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

    यह जनसंख्या 2025 आवासीय कालोनियों, छह लाख अपार्टमेंट्स, 367 गांवों, पुरानी दिल्ली (शाहजहांनाबाद), 675 झुग्गी बस्तियों और 2000 अनधिकृत कालोनियों में विभाजित है। दिल्ली भारत के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक है, जहां वाहनों की वृद्धि दर जनसंख्या वृद्धि दर से तीन गुना अधिक है।

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    अशोक कुमार जैन के मुताबिक, दिल्ली में वाहनों की स्थिति देखें तो 82 प्रतिशत वाहन पेट्रोल पर, 7 प्रतिशत सीएनजी पर और केवल 2.8 प्रतिशत इलेक्ट्रिक पर चलते हैं। हालांकि, पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण भविष्य में डीजल और पेट्रोल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना है। पैदल चलने वालों की स्थिति और भी दयनीय है।

    शहर की कुल सड़क लंबाई के 40 प्रतिशत हिस्से पर फुटपाथ ही नहीं है। जहां हैं भी, वहां उनकी गुणवत्ता, चौड़ाई और बनावट मानकों के अनुरूप नहीं है। विडंबना यह है कि दिल्ली की 84 प्रतिशत आबादी दैनिक आवागमन के लिए पैदल यात्रा करती है, जबकि केवल 47 प्रतिशत लोग कार का उपयोग करते हैं। साथ ही, 58 प्रतिशत दिव्यांग और 45 प्रतिशत बुजुर्गों के लिए सड़कों पर बने ऊंचे स्टेप्स और रैंप एक बड़ी बाधा हैं।

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    अशोक कुमार जैन कहते बताते हैं कि दिल्ली का लगभग 20 प्रतिशत भूभाग सड़कों के अधीन है, जिसकी कुल लंबाई 15,598 किलोमीटर है। इसमें से 6,129 किमी सड़क एमसीडी और 789 किमी पीडब्ल्यूडी के पास हैं। दिल्ली में ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण सड़कों की कमी नहीं, बल्कि ट्रैफिक का भारी दबाव, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग है।

    रसूखदार कालोनियों से लेकर धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों तक ने सड़कों और सर्विस लेन पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जनवरी 2026 तक 62 ऐसे गलियारों की पहचान की है जहां भारी जाम लगता है, जिनमें नेहरू प्लेस, आश्रम चौक, चिराग दिल्ली, विकास मार्ग और कश्मीरी गेट जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

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    आज दिल्ली केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक सघन महानगरीय क्षेत्र (एनसीआर) बन चुकी है। गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों की दिल्ली पर निर्भरता ने ट्रैफिक की समस्या को और गंभीर बना दिया है। जाम का एक बड़ा कारण 'फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी' का अभाव है।

    विश्व संसाधन संस्थान (डब्ल्यूआरआइ) के अनुसार, मेट्रो यात्रा में शुरुआती और अंतिम हिस्सा कुल दूरी का 18 प्रतिशत होता है, लेकिन इसमें 40 प्रतिशत समय और 48 प्रतिशत खर्च लग जाता है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली के 31 प्रतिशत पड़ोस में 500 मीटर के दायरे में कोई बस स्टाप नहीं है।

    समाधान के मुख्य बिंदु

    • यूएमटीए का गठन : एक एकीकृत महानगर परिवहन प्राधिकरण की आवश्यकता है जो योजना और कार्यान्वयन में समन्वय कर सके।
    • सिटी रीजन कान्सेप्ट : बजट 2026-27 के अनुसार, शहरों के समूहों को एक एकल आर्थिक इकाई के रूप में मानकर नियोजन करना होगा।
    • सार्वजनिक परिवहन का विस्तार : वर्तमान में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी 30-35 प्रतिशत है, जिसे मास्टर प्लान 2041 के तहत 80 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य होना चाहिए।
    • ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी): केवल मेट्रो ही नहीं, बल्कि बस, पैरा-ट्रांजिट और गैर-मोटर चालित परिवहन को भी प्राथमिकता देनी होगी।

     

    कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत 

    केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पूर्व विशेष महानिदेशक डीसी गोयल बताते हैं कि दिल्ली में हाईवे एक्सप्रेस की दूरी बहुत छोटी है, हालांकि चारों तरफ से दिल्ली से दूसरे राज्यों में जाने वाले हाईवे और एक्सप्रेस शुरू जरूर होते हैं। अब जब ये दिल्ली में पहुंचते हैं तो इनकी स्थिति इस शहर के मुख्य मार्गों के तौर पर हो जाती है। यह बात सही है कि दिल्ली में अक्सर इन मुख्य मार्गों पर जाम लगता है और यह जाम शहर की इन मुख्य मार्ग से मिलने वाली सड़कों तक पहुंच जाता है। 

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    यह समस्या केवल एक भाग की नहीं है दिल्ली भर की यही समस्या है। इसके अलग-अलग कारण भी हैं। दिल्ली देश की राजधानी जरूर है मगर यह ना तो अपने नियमों पर पालन करती है और ना ही दूसरे विकसित देशों से ही यातायात प्रबंधन के मामले में कुछ सीखती है या सीखना चाहती है। यहां सड़कों पर ही नहीं फुटपाथों पर भी कब्जा रहा है। जहां पर फुटपाथ नीचे हैं वहां लोग अपनी कार पार्क करते हैं और अन्यथा सड़कों पर भी अवैध पार्किंग रहती है।

    वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, यह एक अलग समस्या है। सार्वजनिक परिवहन के मजबूत न होने के कारण लगातार वाहन दिल्ली में बढ़ रहे हैं। कुछ साल पहले जब स्वीडन में एक अध्ययन टीम में मैं गया, वहां की यातायात प्रबंधन का निरीक्षण किया तो पता चला कि वहां पर निजी वाहनों की संख्या कम है और ज्यादातर लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं। नियम सख्त हैं और सड़कों पर अवैध रूप से पार्क किए वाहन नहीं मिलते हैं।

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    वाहन को उठा लिया जाता है जिसको ले जाकर शहर के बाहर डंपिंग ग्राउंड में छोड़ दिया जाता है और उसे वहां से वापस लेना एक लंबी प्रक्रिया हो जाती है। ऐसे में वहां लोग सड़कों पर अपना वाहन पार्क नहीं करते हैं। यह जानकारी मैं केवल इसलिए बता रहा हूं कि व्यवस्था को कड़ी निगरानी के माध्यम से भी ठीक किया जा सकता है।

    दिल्ली की स्थिति ऐसी है कि यहां जिन मुख मार्गो के रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है वे सड़कें भी उसके पास नहीं है। इसका मालिकाना हक डीएमसी एक्ट के अनुसार दिल्ली नगर निगम के पास है। लोक निर्माण विभाग इन्हें अपने अधिकार क्षेत्र में लेने के लिए पिछले कई सालों से मांग कर रहा है मगर यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए मामला संसद तक जाना है।

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    बहरहाल लोक निर्माण विभाग की सड़कों से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी दिल्ली नगर निगम के पास है। मगर कार्रवाई और पुन: अतिक्रमण का ऐसा गड़बड़झाला है कि यह व्यवस्था कभी भी सुधर नहीं पाती है। यहां सड़कों पर अतिक्रमण के अलग अलग तरीके हैं, कई जगह तो स्थाई तो कई जगह अस्थाई अतिक्रमण है। समस्या दोनों से बढ़ रही है। स्थाई अतिक्रमण हटाया जाता है तो कुछ दिन बाद फिर हो जाता है।

    दूसरा अस्थाई अतिक्रमण हटाए जाने के कुछ घंटे बाद हो जाता है। इसमें सड़कों पर लगने वाली रेहडि़यां, अस्थाई दुकानें, बैटरी रिक्शा,  आटो आदि भी शामिल हैं। इनके कारण भी समस्या बढ़ रही है। यहां स्थिति यह है कि दिल्ली नगर निगम के तहत एक भी इलाका ऐसा नहीं है जहां यातायात जाम की समस्या नहीं है। 

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    दिल्ली में लोक निर्माण विभाग और दिल्ली नगर निगम भी ऐसी एजेंसी हैं जहां पर हाईवे से उनकी सड़कें जुड़ी हैं और हाईवे पर जाम होने के बाद इनकी सड़कें सबसे पहले प्रभावित होती हैं। स्थाई जाम भी बहुत बुरी तरह यातायात प्रबंधन को प्रभावित कर रहा है।

    सड़कों को चौड़ा करने की बात है तो दिल्ली में कई जगह सड़कों को चौड़ा भी किया गया है। मगर स्थिति फिर जस की तस  हो जाती है। कारण निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। जब तक कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, इसमें सुधार की संभावना कम है।

    एनसीआर शहरों में सड़कें, वाहन और यातायात व्यवस्था

    दिल्ली

    विवरण आंकड़ा
    कुल मुख्य और छोटी सड़कें 33,198 किलोमीटर
    कुल पंजीकृत वाहन 80 लाख
    प्रतिमाह औसतन पंजीकृत वाहन 50 हजार
    रखरखाव का जिम्मा लोक निर्माण विभाग, दिल्ली नगर निगम, NDMC, DDA, दिल्ली छावनी बोर्ड

    राजमार्ग जाम से प्रभावित भीतरी सड़कें

    • दिल्ली-जयपुर हाईवे → महिपालपुर, कापसहेड़ा, धौलाकुआं, वसंत विहार
    • दिल्ली-सोनीपत NH → संत नगर, बुराड़ी, रोहिणी
    • दिल्ली-मथुरा हाईवे → आश्रम से बदरपुर
    • दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे → लक्ष्मी नगर, पटपड़गंज, त्रिलोकपुरी, कल्याणपुरी, गाजीपुर

    पिछले 5 वर्षों में चौड़ीकरण

    विकास मार्ग, जगतपुरी रोड, लक्ष्मी नगर, आर्य समाज रोड, पूसा रोड, शंकर रोड आदि।

    गुरुग्राम

    विवरण आंकड़ा
    कुल सड़कों की लंबाई 900 किलोमीटर
    प्रतिमाह औसतन पंजीकृत वाहन (डेटा उपलब्ध नहीं)

    जाम वाली मुख्य जगहें

    राजीव चौक, इफको चौक, एंबियंस माल, एमजी रोड, पालम विहार रोड, डूंडाहेड़ा रोड

    पिछले 5 वर्षों में चौड़ीकरण

    20 सड़कों को GMDA ने चौड़ा किया।

    अतिक्रमण/अवैध पार्किंग

    यातायात पुलिस: मासिक 2000+ वाहन क्रेन से उठाकर पार्किंग में। प्राधिकरण से कोई अभियान नहीं।

    फरीदाबाद

    विवरण आंकड़ा
    कुल सड़कें 3,215 किलोमीटर
    कुल पंजीकृत वाहन 12 लाख 68 हजार 315
    प्रतिमाह औसतन पंजीकृत वाहन 10 हजार

    जाम वाली जगहें (राजमार्ग जाम से प्रभावित)

    सराय ख्वाजा, सूरजकुंड गोल चक्कर

    पिछले 5 वर्षों में चौड़ीकरण

    18 सड़कों को चौड़ा किया गया।

    अतिक्रमण हटाया

    84 सड़कों को अतिक्रमण मुक्त किया। (यातायात पुलिस, NHAI, नगर निगम, HUDA संयुक्त)

    गाजियाबाद

    विवरण आंकड़ा
    कुल सड़कें 2,909.13 किलोमीटर
    कुल पंजीकृत वाहन 9,23,576
    प्रतिमाह औसतन पंजीकृत वाहन 8,500

    जाम वाली जगहें

    जीटी रोड, दिल्ली-वजीराबाद रोड

    पिछले 5 वर्षों में चौड़ीकरण

    जीटी रोड, दिल्ली-मेरठ रोड, लिंक रोड, संजय नगर रोड

    अतिक्रमण हटाया

    100+ सड़कों को खाली कराया। यातायात पुलिस: चालान + वाहन जब्ती।

    गौतम बुद्ध नगर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा)

    विवरण आंकड़ा
    कुल सड़कें 6,000 किलोमीटर
    कुल पंजीकृत वाहन 12.20 लाख
    प्रतिमाह औसतन पंजीकृत वाहन 8,000

    जाम वाली जगहें

    सेक्टर-62 गोलचक्कर से 59, फिल्म सिटी लूप, सेक्टर-18 अंडरपास, डीएनडी लूप, मॉडल टाउन, सेक्टर-61 एलिवेटेड

    पिछले 5 वर्षों में चौड़ीकरण

    नोएडा-ग्रेटर नोएडा की 7 सड़कों का चौड़ीकरण।

    अतिक्रमण हटाया

    60+ सड़कों पर अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराया।

    सामान्य कारण (सभी शहरों में अतिक्रमण/जाम बने रहने के)

    • निगरानी की कमी और अधिकारियों की मिलीभगत
    • विभागों (प्राधिकरण, निगम, ट्रैफिक पुलिस) में सामंजस्य का अभाव
    • गलत जगह पार्किंग का आवंटन

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    (नोट- केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पूर्व विशेष महानिदेशक डीसी गोयल ने जैसा दैनिक जागरण के संवाददाता वीके शुक्ला और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) पूर्व योजना आयुक्त अशोक कुमार जैन ने जैसा दैनिक जागरण के वरिष्ठ संवाददाता संजीव गुप्ता को बातचीत में बताया)