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    सुरक्षा ताक पर... अंतरराष्ट्रीय सराहन पाने वाले IGI एयरपोर्ट पर आखिर क्यों टकरा रहे हैं विमान?

    Updated: Fri, 17 Apr 2026 05:26 AM (IST)

    दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पिछले तीन वर्षों (2023-2025) में रनवे और टैक्सीवे पर विमानों की लगातार टक्करों ने सुरक्षा पर गंभीर सव ...और पढ़ें

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     इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रनवे और टैक्सीवे पर विमानों की लगातार टक्करों ने सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फाइल फोटो

    गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, जिसे अपनी आधुनिक सुविधाओं के लिए वैश्विक मंच पर सराहा जाता है, इन दिनों सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है।

    बृहस्पतिवार की घटना से पूर्व पिछले तीन वर्षों (2023-2025) का घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि रनवे और टैक्सीवे पर विमानों की सुरक्षा अब केवल दावों तक सिमट गई है। लगातार हो रही टक्करों ने यात्रियों के मन में भय और विमानन कंपनियों के लिए आर्थिक संकट पैदा कर दिया है।

    2025: तालमेल की कमी और पार्किंग का संकट

    पिछले वर्ष, अक्टूबर 2025 में हुई घटना ने सुरक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया था। जब एयर इंडिया एक्सप्रेस और स्पाइसजेट के दो विमान ''पुश-बैक'' (पार्किंग से रनवे की ओर ले जाने की प्रक्रिया) के दौरान आपस में रगड़ खा गए।

    जांच रिपोर्टों में यह कड़वा सच सामने आया कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि ग्राउंड स्टाफ और पायलटों के बीच कम्युनिकेशन गैप (संवाद की कमी) का नतीजा था। व्यस्ततम घंटों के दौरान बढ़ते दबाव ने मानवीय त्रुटियों को जन्म दिया, जिससे करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचा।

    2024 में पंखों की भिड़ंत और सुरक्षा में बड़ी सेंध 

    इससे पहले, मार्च 2024 में आइजीआइ एयरपोर्ट पर एक खौफनाक मंजर देखने को मिला था। एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो के विमानों के बीच टैक्सीवे पर ऐसी टक्कर हुई कि इंडिगो के विमान का विंग-टिप (पंख का सिरा) टूटकर रनवे पर जा गिरा। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।

    सवाल यह उठा कि अत्याधुनिक ''सरफेस मूवमेंट रडार'' होने के बावजूद दो विशालकाय विमान एक-दूसरे के इतने करीब कैसे आ गए कि उनके पंख टकरा गए।

    2023 में बुनियादी प्रशिक्षण और विजिबिलिटी पर सवाल

    वर्ष 2023 में एअर इंडिया का एक विमान पार्किंग स्टैंड की ओर जाते समय बिजली के खंभे से जा टकराया था। इस छोटी लगने वाली घटना ने एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया था। यह खतरा पायलटों की ट्रेनिंग और ग्राउंड विजिबिलिटी से जुड़ा था।

    सवाल यह उठा था कि क्या पायलटों को टैक्सीईंग के दौरान सटीक दूरी का अंदाजा नहीं था? या फिर एयरपोर्ट के ग्राउंड मार्किंग्स धुंधले पड़ चुके थे? इन सवालों ने डीजीसीए को अपनी नियमावली की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया।

    क्या रहे कारण?

    विशेषज्ञों के अनुसार एयरपोर्ट पर बार बार हो रही इन घटनाओं के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। आइजीआइ एयरपोर्ट अपनी अत्यधिक उड़ानों को संभाल रहा है, जिससे ग्राउंड स्टाफ पर काम का बोझ चरम पर है। नए और बड़े विमानों के लिए पुराने टैक्सीवे या बे एरिया में अब या तो कम चौड़ाई है या पर्याप्त जगह या नहीं रह गए हैं।

    24 घंटे चलने वाले आपरेशन्स में क्रू और स्टाफ की थकान अक्सर गलती का कारण बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उन्नत निगरानी प्रणाली और स्टाफ की बेहतर ट्रेनिंग सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ी त्रासदी होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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