ईरान युद्ध के चलते भारतीय बाजार में सूखे मेवे, खजूर और कृषि उत्पाद महंगे होने की आशंका
ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण भारत-ईरान के गैर-तेल व्यापार पर गहरा असर पड़ रहा है। कृषि, खाद्य और औद्योगिक सामान के व्यापार में बाधा आ रही है, जिस ...और पढ़ें

ईरान युद्ध का असर भारतीय बाजार पर पड़ने की आशंका।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध का असर भारत और ईरान के बीच चल रहे गैर-तेल व्यापार पर भी दिखने लगा है। युद्ध के कारण संचार संपर्क टूटने से भारत और ईरान के बीच चल रहे कृषि, खाद्य और औद्योगिक सामान के व्यापार में बाधा आ रही है। व्यापार के लिए समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली बाधित होने से सप्लाई में देरी और नुकसान का जोखिम बढ़ गया है।
भारत और ईरान के बीच सूखे मेवे, खजूर, केसर, पिस्ता, किशमिश, सेब, औद्योगिक रसायन, उर्वरक और निर्माण सामग्री की सप्लाई, भुगतान व्यवस्था और परिवहन मार्ग प्रभावित हो गए हैं।
व्यापार संगठनों के अनुसार, फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन और इंडियन ड्राय फ्रूट एसोसिएशन ने आशंका जताई है कि युद्ध के कारण सप्लाई में देरी और परिवहन लागत बढ़ने से सूखे मेवे, खजूर और केसर की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसी तरह कृषि और रसायन उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि उर्वरक और केमिकल सप्लाई में बाधा आने से उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
भारत से ईरान को निर्यात होने वाले सामान जैसे बासमती चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, मेडिकल उपकरण, मशीनरी और रेडीमेड कपड़ों का व्यापार भी प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय भुगतान चैनलों और बैंकिंग व्यवस्था पर दबाव बढ़ने से भारत से भेजे जाने वाले सामान की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। सामुद्रिक मार्ग पर युद्ध की स्थिति के कारण फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग खतरे में है।
कई शिपिंग कंपनियां जोखिम के कारण अपनी खेप भेजने में देरी कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो गैर-तेल व्यापार लगभग रुक सकता है। इंडियन ड्राय फ्रूट एसोसिएशन के अनुसार ‘सूखे मेवे और खजूर की खेप देरी से आने के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
निरंतर युद्ध की स्थिति रही तो किल्लत भी सामने आ सकती है।’ इस स्थिति में दोनों देशों के व्यापारिक संगठन और उद्योग को उम्मीद है कि जल्द सुरक्षित और व्यवस्थित मार्ग अपनाकर व्यापार को सुचारू बनाने का रास्ता निकाला जाएगा। इससे कीमतों पर नियंत्रण और सप्लाई सुनिश्चित हो सकेगी।
‘ईरान युद्ध के कारण ईरान और ईरान के रास्ते से होने वाले आयात-निर्यात पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। सूखे मेवे से लेकर कई अन्य वस्तुओं का व्यापार प्रभावित हुआ है। यूरोप के साथ होने वाले आयात-निर्यात के लिए अब लंबा समुद्री मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन लागत बढ़ गई है और समय भी अधिक लग रहा है।’ - डॉ. अजय सहाय, महानिदेशक, फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन्स (एफआइईओ)
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