Momos खाने से 10 साल की बच्ची का लिवर फेल, याददाश्त खोई और चलना-फिरना भी मुश्किल; प्लाज्माफेरेसिस से बची जान
बुराड़ी की 10 वर्षीय बच्ची तान्या को मोमोज जैसे फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से लिवर फेलियर हो गया, जिससे उसके दिमाग में सूजन आ गई और वह आईसीयू में भर्ती ...और पढ़ें

बेटी तान्या के साथ बुराड़ी की रहने वाली सावित्री। जागरण
मुहम्मद रईस, दक्षिणी दिल्ली। बुराड़ी के रहने वाले परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब उनकी 10 वर्षीय बच्ची के दिमाग ने लगभग काम करना बंद कर दिया। छोटी-छोटी बात भी उसे याद नहीं। खुद चलना-फिरना भी मुश्किल। हालत खराब होती गई।
जांच में पता चला कि लिवर फेल हो चुका है। शरीर में विषाक्त पदार्थों के संक्रमण की वजह से दिमाग में सूजन आ गई है। आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। उसकी यह हालत मोमोज जैसे फास्ट फूड ने की।
दादा से पैसे लेकर बाहर से लाती थी मोमोज
माता-पिता दोनों वर्किंग हैं। दिनभर काम के चलते जब घर पर नहीं होते तो बच्ची दादा से पैसे लेकर बाहर से मोमोज वगैरह लेकर आती और चाव से खाती। प्लाज्माफेरेसिस से जान बचने के बाद अब उसने मोमोज से तौबा कर ली है।
माता सावित्री माथुर बताती हैं कि उनके पति किशोर मोबाइल का काम करते हैं। घर चलाने के लिए वे भी मुखर्जी नगर में केयरटेकर की जाॅब करती हैं। उनकी दो बच्चियां हैं। बड़ी बेटी तान्या 10 वर्ष की है तो वहीं छोटी बेटी गौरी आठ वर्ष की है।
शुरुआत में चीजें भूलने लगी, फिर थकान रहती थी
बच्चों के घर का बना खाना ही देते हैं। पति और मैं काम के सिलसिले में दिनभर बाहर ही रहते हैं। स्कूल से आने के बाद तान्या दादा से पैसे लेकर कभी मोमोज तो कभी चिप्स लाती थी। शुरुआत में वह चीजें भूलने लगी। थकान रहती।
बाद में उससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। पास के अस्पताल ले गए, जहां जांच के बाद पता चला की पीलिया काफी बढ़ा हुआ है। हालत इतनी खराब थी कि लगा कि अब बेटी को खो देंगे। यथार्थ हाॅस्पिटल माॅडल टाउन में भर्ती कराया।
पहले डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया था
पहले चिकित्सकों ने लिवर ट्रांसप्लांंट का सुझाव दिया, पर प्लाज्माफेरेसिस से बच्ची ठीक हो गई। बाल रोग विभाग के डाॅ. शैलेश शर्मा के मुताबिक दिल्ली के करीब 35 प्रतिशत बच्चों में फैटी लिवर के लक्षण मिल रहे हैं।
फास्ट फूड, स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। अब कम उम्र में भी गंभीर लिवर फेल्योर के केस सामने आ रहे हैं, जैसा इस मामले में देखने को मिला।
क्या होता है प्लाज्माफेरेसिस?
प्लाज्माफेरेसिस में शरीर में जो भी विषाक्त पदार्थ होते हैं, प्लाज्मा बदलकर उसे बाहर निकाल लेते हैं। वहीं शरीर में शुद्ध प्लाज्मा चढ़ा दिया जाता है।
इससे लिवर को रेस्ट मिलता है और वो जल्दी ठीक होता है। बच्ची को दो यूनिट प्लाज्मा चढ़ाना पड़ा था। पर इसका फायदा ये मिला कि लिवर ट्रांसप्लांट की नौबत टल गई।
पानी कम पीना और फास्ट फूड पहुंचा रहा नुकसान
यथार्थ हाॅस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलाॅजी एवं हेपेटोलाॅजी विभाग के प्रमुख डाॅ. अपूर्व पांडे ने बताया कि ओपीडी में आने वाले 30 से 40 प्रतिशत मरीज फैटी लिवर के होते हैं, जिनमें अधिकांश की उम्र 20 से 50 वर्ष के बीच होती है।
बच्चे हों या बड़े दिल्ली में लोग मुश्किल से दिनभर में एक से डेढ़ लीटर पानी पी रहे हैं, जबकि मेटाबॉलिज्म के लिए कम से कम ढाई लीटर पानी तो रोज पीना ही चाहिए। इसके अलावा रोजाना के खानपान में फास्ट फूड की मात्रा बढ़ना भी लिवर को नुकसान पहुंचा रहा है।
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