टेरर फंडिंग केस में इंजीनियर रशीद की मुश्किलें बढ़ी, दिल्ली HC में NIA बोली- जमानत के हकदार नहीं
एनआईए ने दिल्ली हाई कोर्ट में बारामूला सांसद इंजीनियर रशीद की जमानत याचिका का विरोध किया है। एजेंसी ने आरोप ...और पढ़ें

टेरर फंडिंग केस में इंजीनियर राशिद की मुश्किलें बढ़ीं। फोटो: आर्काइव
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आतंकी फंडिंग मामले में बारामूला से सांसद इंजीनियर रशीद की जमानत का राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध किया है।
एनआईए ने कहा कि आतंकी फंडिंग मामले में इंजीनियर रशीद ने गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की है और वह जमानत के हकदार नहीं हैं। एनआईए की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि अब तक दर्ज गवाहों के बयानों से पता चलता है कि रशीद ने तीन गवाहों को प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि कम से कम दो सुरक्षित गवाह अपने बयानों से पलट गए हैं। जांच एजेंसी व रशीद के तर्कों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह व न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा कि अदालत याचिका पर निर्णय सुनाएगी।
तीन गवाहों को प्रभावित करने का आरोप
सिद्धार्थ लूथरा ने आरोप लगाया कि रशीद ने भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए और भारत-विरोधी गतिविधियों का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि रशीद का काफी प्रभाव है और जमानत मिलने पर वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सकते हैं।
एनआईए ने यह भी कहा कि बीमार पिता से मिलने के लिए मिली जमानत के दौरान रशीद कुछ गवाहों से मिले थे।
बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं, रशीद की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने जांच एजेंसी के आरोपों को बेबुनियाद बताया। रशीद की तरफ से तर्क दिया गया कि संबंधित अवधि में रशीद ज्यादातर समय हिरासत में थे और जिन गवाहों को प्रभावित करने का आरोप है, उनमें एक उनका ड्राइवर और दो निजी सहायक (पीए) हैं, जो वर्षों से उनके लिए काम कर रहे हैं।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि रशीद सांसद हैं और उन्होंने संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली है। इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं रशीद
रशीद को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था और पिता के निधन से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत मिली थी।
रशीद पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी समूहों को फंडिंग करने का आरोप है। 2017 के मामले में एनआईए की गिरफ्तारी के बाद से वे 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।
अक्टूबर 2019 में आरोपपत्र दाखिल किया गया था और एनआईए की विशेष अदालत ने मार्च 2022 में रशीद और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 124ए (देशद्रोह) सहित अन्य व यूएपीए के संबंधित प्रावधानों के तहत आरोप तय किए थे।
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