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    दिल्ली में लाल किला पर ब्लास्ट से अल-कायदा कनेक्शन तक, NIA की 7,500 पेज की चार्जशीट में कई बड़े खुलासे 

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 10:02 PM (IST)

    दिल्ली के लाल किला के सामने हुए कार ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हुई थी, जिसे NIA ने फिदायीन हमला बताया। 7500 पन्नों की चार्जशीट में अल-कायदा के 'अंसार ...और पढ़ें

    दिल्ली ब्लास्ट में अल कायदा की साजिश का पर्दाफाश। फोटो: आर्काइव

    दिल्ली ब्लास्ट में अल कायदा की साजिश का पर्दाफाश। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. लाल किला कार ब्लास्ट में 15 लोगों की जान गई

    2. NIA ने 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की

    3. 'अंसार गजवत-उल-हिंद' मॉड्यूल का पर्दाफाश

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 10 नवंबर की शाम दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला इलाका रोजाना की तरह चहल-पहल से भरा हुआ था। लोग अपनी-अपनी धुन में थे कि अचानक एक जोरदार धमाके से पूरा इलाका थर्रा उठा।

    लाल किला के सामने एक आई-10 कार में भीषण ब्लास्ट हुआ था। इस दिल दहला देने वाले हमले में कुल 15 लोगों की जान चली गई। कई लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि अन्य घायलों की इलाज के दौरान अलग-अलग अस्पतालों में मौत हो गई।

    धमाका इतना भीषण था कि इसके प्रभाव से आतंकी की कार के आगे-पीछे चल रहे चार पहिया वाहनों, दोपहिया सवारों और पैदल चल रहे राहगीरों को भी नुकसान पहुंचा। चारों तरफ धुएं का गुबार, चीख-पुकार और तबाही का मंजर था। सड़क पर खड़े और गुजर रहे बड़ी संख्या में वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।

    अगले दिन खुला फिदायीन हमले का राज

    घटना के अगले दिन जब जांच एजेंसियों ने मामले की शुरुआती पड़ताल की तो पता चला कि यह फिदायीन (आत्मघाती) हमला था। कार ब्लास्ट करने वाला आतंकी उमर उन नबी था, जिसने आत्मघाती तरीके से विस्फोट को अंजाम दिया। धमाके में उसकी भी मौके पर ही मौत हो गई थी।

    NIA ने कई राज्यों में की ताबड़तोड़ छापेमारी

    घटना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई। NIA ने मामला संभालते ही कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की और साजिश के पीछे छिपे आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया।

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    जांच टीम ने इस पूरी साजिश को रचने और इसमें मदद करने वाले कई आतंकियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया। जांच पूरी करते हुए 14 मई को NIA ने पटियाला हाउस कोर्ट स्थित NIA की विशेष अदालत में 10 आतंकियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था।

    7500 पन्नों की चार्जशीट में अल-कायदा का जिक्र

    7500 पन्नों के आरोपपत्र में NIA ने धमाके के पीछे आतंकी संगठन अल-कायदा के माड्यूल का हाथ बताया था। यह माड्यूल अल-कायदा इन द इंडियन सबकांटिनेंट (AQIS) की शाखा ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ संगठन से जुड़े होने की बात कही गई थी।

    आरोपपत्र में कहा गया था कि हाई-इंटेंसिटी वाले ‘व्हीकल-बार्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस’ धमाके से जान-माल का भारी नुकसान हुआ।

    आतंकी उमर उन नबी समेत सभी 10 आतंकी ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ संगठन से जुड़े थे, जो ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकांटिनेंट’ (AQIS) की शाखा है। AQIS समेत इस संगठन की सभी शाखाओं को जून 2018 में गृह मंत्रालय ने आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था।

    किन धाराओं में दाखिल हुआ आरोपपत्र?

    आरोपपत्र यूएपीए अधिनियम 1967, भारतीय न्याय संहिता 2023, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908, शस्त्र अधिनियम 1959 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की संबंधित धाराओं के तहत दायर किया गया था।

    पुलवामा के रहने वाले फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन विभाग के पूर्व सहायक प्रोफेसर डॉ. उमर उन नबी की मौत हो जाने के कारण उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया था।

    चार्जशीट में 10 आतंकियों के नाम

    आरोपपत्र में डॉ. उमर के अलावा आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला, यासिर अहमद डॉर और शोएब का नाम था।

    588 गवाहों के बयान और 395 पेज की जांच

    आरोपपत्र जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली समेत एनसीआर में की गई जांच पर आधारित था। इसमें 588 गवाहों के बयान, 395 पेज की जांच रिपोर्ट और अन्य विस्तृत साक्ष्य शामिल थे।

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