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    प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली में 365 दिन चलेगा अभियान, छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों ने शुरू किया काम

    Updated: Tue, 10 Feb 2026 02:00 AM (IST)

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ 365 दिन अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने 6 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों का उद्घाटन किया ...और पढ़ें

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    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों का ऑनलाइन उद्घाटन किया।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि प्रदूषण के विरुद्ध लड़ाई केवल सर्दियों में ही नहीं, बल्कि पूरे साल चलने वाला अभियान है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पिछली सरकार की लापरवाही के चलते वायु प्रदूषण लगातार गंभीर बन गया, जिसे नियंत्रित करने के लिए उनकी सरकार अब गंभीर व प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर काम करना सिर्फ तीन-चार महीनों की जिम्मेदारी नहीं है। यह 365 दिन का विषय है।

    मुख्यमंत्री ने सोमवार को छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों का ऑनलाइन उद्घाटन किया जबकि 100 ‘वायु रक्षक’ वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दिल्ली सचिवालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा व पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

    डेटा पारदर्शिता और नीति निर्माण पर जोर

    मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वायु गुणवत्ता डेटा पूरी तरह पारदर्शी होता है जिसे किसी भी स्तर पर बदला नहीं जा सकता। उन्होंने जानकारी दी कि पीएम 10 और पीएम 2.5 का डेटा हर घंटे और अन्य मानकों का डेटा हर पांच मिनट में ऑनलाइन अपडेट होता है। यह डेटा सार्वजनिक है, इसे छुपाया नहीं जा सकता।

    मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों की नीति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पहले सोच यह थी कि थोड़े दिन शोर मचाओ और फिर भूल जाओ। स्माग टॉवर जैसे दिखावटी उपाय किए गए, जिनका कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ा। हमारी सरकार समस्या की जड़ तक जाकर समाधान कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, मिस्ट स्प्रे, लिटर पिकर, मैकेनिकल रोड स्वीपर, एंटी स्माग गन और ग्रीन कवर के विस्तार जैसे कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लंबी है, रोज़ काम करना होगा और हम करके रहेंगे।

    सिरसा ने कहा कि वायु रक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर लागू हों। उन्होंने बताया कि 2024 में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) में 233 पद रिक्त थे, जिनमें से 157 पद सिर्फ 11 माह में भर दिए गए, जो पिछली 10 वर्षों की तुलना में लगभग दोगुना है। उन्होंने कहा कि 1985 से दिल्ली की हवा देश स्तर का मुद्दा है। दिल्ली में 15 साल कांग्रेस और 11 साल आम आदमी पार्टी ने शासन किया, लेकिन किसी ने स्थायी समाधान नहीं निकाला। पहली बार प्रदूषण के स्रोतों पर काम किया जा रहा है।

    वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क का प्रभावी विस्तार

    राजधानी में छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र जेएनयू, इग्नू, इसरो अर्थ स्टेशन (मालचा महल), कामनवेल्थ स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, दिल्ली कैंटोनमेंट और एनएसयूटी (वेस्ट कैंपस) में स्थापित किए गए हैं। इनके जुड़ने से दिल्ली में अब कुल 46 निगरानी केंद्र स्थापित हो चुके हैं, जो देश के किसी भी शहर से अधिक हैं। इन 46 स्टेशनों में से 30 डीपीसीसी, 10 मौसम विभाग एवं छह सीपीसीबी द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। आने वाले समय में 14 और केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

    ‘वायु रक्षक’: निगरानी के साथ-साथ सख्ती भी

    कार्यक्रम में 100 ‘वायु रक्षक’ की तैनाती की भी औपचारिक शुरुआत की गई, जो डीपीसीसी के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण सुनिश्चित करेंगे। इसके अतिरिक्त 600 वायु रक्षक दिल्ली पुलिस के सहयोग से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निगरानी कर रहे हैं।

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