98000 रुपये किराया... सुविधाओं के नाम पर सत्य निकेतन के PG 'जीरो'; हादसे के बाद डरे हुए हैं छात्र
सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद आसपास के पीजी में रहने वाले छात्र डरे हुए हैं, जहां संकरे रास्ते, ...और पढ़ें
HighLights
सत्य निकेतन पीजी में संकरे रास्ते, सीलन और दरारें।
एक कमरे का किराया 98 हजार रुपये, सुरक्षा नहीं।
हादसे के बाद छात्र डरे, पीजी बदलने को मजबूर।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पीजी में प्रवेश करते ही महज तीन मीटर का रास्ता है। दीवार के दोनों तरफ कई मीटर लगे हैं, जिनमे अगर चिंगारी भी सुलगती है तो रास्ता ही बंद हो जाएगा।
वहीं, ऊपर लिंटर पर बड़ी-बड़ी दरारें पडी हैं और कई जगहों पर सीलन के साथ पानी टपकता देखा जा सकता है। यह स्थिति है सत्य निकेतन में हुए हादसे वाली जगह पर मौजूद कई पीजी की है।
डरे हुए हैं छात्र
सत्य निकेतन में एक दिन पहले हुए हादसे के बाद आसपास के पीजी में रहने वाले विद्यार्थी डरे हुए हैं। कई छात्र छुट्टी के बाद हादसे के चलते पीजी वापस ही नहीं आ रहे हैं और कई पीजी बदलने का विकल्प तलाशने लगे हैं।

98 हजार रुपये किराया
एक कमरे और किचन के पीजी में चार लड़कियों के साथ रहने वाली नताशा ने बताया कि हम लोग कमरे का किराया, ब्रोकेज और सिक्योरिटी मिलाकर कुल एक महीने के 98000 रुपये देते हैं। खाना-पीना और बिजली का बिल अलग से है।
कोई एमरजेंसी रास्ता नहीं
बताया कि बिल्डिंग में आने-जाने का रास्ता एक ही है और वह भी इतना संकरा है कि एक समय में एक ही व्यक्ति निकल सकता है। कोई एमर्जेंसी रास्ता नहीं है।
उन्होंने बताया कि अगर कोई हादसा हो जाए तो हम लोग भाग ही नहीं सकते। परिवार वाले दूसरा पीजी तलाशने को बोल चुके हैं। नंदिनी ने बताया कि वो भी पीजी बदलने का मन बना चुकी है।
सत्य निकेतन के पीजी में रहने वाली लक्षिता ने बताया कि वे सिंगल रूम का 15 हजार रुपये किराया दे रही हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद से यहां डर का माहौल है। हम भी जल्द फ्लैट में शिफ्ट हो जाएंगे।
सत्य निकेतन के पीजी में रहने वाली शाम्भवी ने बताया कि डर की वजह से कल रात की उन्होंने वेंकटेश्वर कॉलेज में बिताई है। उन्होंने कहा कि इस हादसे के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई है और वे दूसरी जगह शिफ्ट होने की सलाह दे रहे हैं।
शाम्भवी का कहना है कि पढ़ाई करने के लिए दूर-दूर से छात्र दिल्ली आते हैं। छात्रों के पैरेंट्स पीजी वालों के भरोसे ही अपने बच्चों को छोड़कर जाते हैं, लेकिन अगर वे ही बच्चों का ध्यान नहीं रखेंगे तो हम कैसे रह पाएंगे। उन्होंने कहा कि सिर्फ सत्य निकेतन ही नहीं नार्थ कैंपस के पीजी का भी यही हाल है।
