जैमर लगा, चादर तानी और वांगचुक अस्पताल में... दिल्ली पुलिस के नए कप्तान आते ही 30 सेकेंड में उठाए गए सोनम वांगचुक
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा की विदाई को सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर अनशन और संसद कूच के एलान से जोड़ा जा रहा है, जिसमें पुलिस की शुरुआती ढिलाई को ...और पढ़ें
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नए आयुक्त के निर्देश पर वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया।
स्वदेश कुमार, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस आयुक्त पद से सतीश गोलछा की विदाई को जंतर मंतर पर 20 जून को काकरोच जनता पार्टी द्वारा प्रदर्शन और फिर 28 जून से लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन से जोड़कर देखा जा रहा है।

पुलिस महकमे में शुक्रवार को नाटकीय घटनाक्रम के बाद गोलछा की विदाई के पीछे इसे प्रमुख कारण माना जा रहा है। शनिवार सुबह जिस तरह से सोनम वांगचुक को पुलिस ने रणनीति बनाकर उठाया और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया, इसने भी इस कयास को बल दे दिया है।

माना जा रहा है कि शनिवार को की गई कार्रवाई नए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के निर्देश पर ही की गई। हालांकि पुलिस अधिकारी वांगचुक की तबीयत का हवाला देकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की बात कह रहे हैं।

जंतर-मंतर पर वैसे तो बीएनएस की धारा-163 (चार से अधिक लोगों के एक जगह एकत्रित होने पर पाबंदी) लागू रहती है। इसी वजह से यहां लोगों को प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलती है। लेकिन 20 जून को सीजेपी के एकदिवसीय प्रदर्शन को पुलिस ने अनुमति दे दी।
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पेपर लीक मामले को लेकर सीजेपी ने अगले दिन से बिना अनुमति प्रदर्शन शुरू कर दिया। लेकिन प्रदर्शनस्थल पर समर्थकों की संख्या काफी सीमित थी। संभवत: पुलिस अधिकारी यह मानकर चल रहे थे कि धीरे-धीरे ये प्रदर्शन खत्म हो जाएगा। लेकिन आठ दिन बाद सोनम वांगचुक इसी स्थल पर अनशन पर बैठ गए। सीजेपी के संस्थापक पीछे हो गए और वांगचुक का चेहरा आगे आ गया।
शुरुआत में यहां कार्यकर्ताओं की संख्या कम देख पुलिस ने शिथिलता बरती। लेकिन इसी दौरान वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद कूच का एलान कर दिया। इसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू होना है। इसके बाद पिछले तीन-चार दिनों से यहां हलचल बढ़ गई।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. विजय, दिल्ली के पूर्व सीएम व आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और सपा सांसद डिंपल यादव के अलावा सांसद चंद्रशेखर, अभिनेत्री स्वरा भास्कर सहित कई हस्तियां यहां पहुंचने लगी थीं। इससे प्रदर्शनकारियों में उत्साह बढ़ने लगी लेकिन पुलिस की तरफ से इन्हें हटाने की कोई कवायद नहीं हुई।
विपक्षी पार्टियों के नेताओं के जमघट से यह आशंका प्रबल हो गई कि वे सोनम वांगचुक के संसद कूच को भूनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेेंगे। ऐसे में ही सरकार के स्तर पर सतीश गोलछा को हटाने पर सहमति बन गई। उन्हें उपराज्यपाल कार्यालय से संबद्ध करना यह बताता है कि उन्हें हटाने की प्रक्रिया सामान्य नहीं थी।
उनके खिलाफ नाराजगी थी। हालांकि पुलिस महकमे में ही एक वर्ग ऐसा है जो इस कार्रवाई को थानाप्रभारियों की तैनाती से भी जोड़कर देख रहा है। उसका मानना है कि थानाप्रभारियों थानाप्रभारियों की एक लिस्ट तैयार हो चुकी थी। इसमें लेनदेन के आरोप लग रहे थे। इसकी शिकायतें भी ऊपर तक पहुंची थीं।
नए कप्तान के नेतृत्व में वांगचुक को हटाने के लिए पुलिस ने दिखाई सूझबूझ
पुलिस के नए कप्तान के नेतृत्व संभालने के अगले ही दिन पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने में काफी सूझबूझ का परिचय दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शनिवार तड़के 3:00 बजे नई दिल्ली जिला पुलिसकर्मियों को इकट्ठा किया गया और शुरुआत में उन्हें बताया गया कि यह संसद के मानसून सत्र से पहले एक माक ड्रिल है।
बाद में उन्हें मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया और जानकारी दी गई कि जंतर-मंतर से वांगचुक को 30 सेकेंड के भीतर हटाया जाना है। जंतर-मंतर पर पहुंचने के साथ ही फोन जैमर लगा दिया गया। पुलिसकर्मियों ने सादे कपड़ों में मंच पर पहुंचकर सोनम वांगचुक को सफेद चादर में लपेटा।
सफेद चादर में इसलिए लपेटा गया ताकि उनकी तस्वीर या वीडियो इंटरनेट मीडिया प्रसारित हो। वहां मौजूद लोग पर्दे के पीछे क्या चल रहा है यह देख पाते, उससे पहले ही पुलिसकर्मी वांगचुक को तेजी से स्ट्रेचर के जरिये एम्बुलेंस तक लेकर गए और फिर अस्पताल पहुंचाया गया।