अंटार्कटिका के समंदर में दिखा नया द्वीप, कैसे बनते हैं नए टापू और आखिर कौन होगा इसका मालिक?
अंटार्कटिका के समुद्र के बीच वैज्ञानिकों की एक टीम को एक नया द्वीप मिला है, जो पहले नक्शे पर अंकित नहीं था। ...और पढ़ें

समुद्र के बीच वैज्ञानिकों को अचानक दिखा एक नया द्वीप (Picture Courtesy: AWI)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अंटार्कटिका की जमा देने वाली लहरों और विशाल बर्फ की चादरों के बीच प्रकृति अक्सर अपने रहस्य छुपाए रखती है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक दल ने कुछ ऐसा ही करिश्मा देखा है, जिसने पूरी दुनिया के शोधकर्ताओं को हैरान कर दिया है।
अंटार्कटिका के वेडेल सागर में एक नए द्वीप की खोज की गई है, जो पहले कभी नक्शों पर दर्ज नहीं था। आइए जानें इस द्वीप की खोज कैसे हुई, नए द्वीप आखिर निकलते कैसे हैं और इस पर मालिकाना हक किसका होगा।
अल्फ्रेड वेगनर संस्थान के विशेषज्ञ साइमन ड्रुटर बताते हैं कि उन्हें दूर से एक बर्फ का पहाड़ दिखाई दिया। लेकिन जब उन्होंने ध्यान से देखा, तो वह बर्फ नहीं, बल्कि चट्टान थी। जैसे ही जहाज ने अपना रास्ता बदला और करीब गया, यह साफ हो गया कि उनके सामने एक नया द्वीप खड़ा था।
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(Picture Courtesy: AWI)
आखिर समुद्र के बीच से कैसे निकलते हैं नए द्वीप?
यह सवाल मन में आना स्वाभाविक है कि क्या समुद्र के बीच से अचानक कोई जमीन का टुकड़ा बाहर आ सकता है? लेकिन आपको बता दें यह पूरी तरह मुमकिन है। द्वीप बनने की प्रक्रिया मुख्य रूप से ज्वालामुखी विस्फोट और भूगर्भीय हलचलों पर निर्भर करती है।
ज्वालामुखी विस्फोट- जब समुद्र की गहराई में मौजूद ज्वालामुखी फटते हैं, तो उनसे निकलने वाला लावा पानी के संपर्क में आकर ठंडा हो जाता है। धीरे-धीरे यह जमाव समुद्र की सतह से ऊपर आ जाता है और एक द्वीप का रूप ले लेता है।
टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल- पृथ्वी के अंदर मौजूद प्लेटों के खिसकने से भी कभी-कभी नया भूभाग ऊपर की ओर उठ जाता है।
कोरल रीफ और डिप्रेशन- ट्रॉपिक क्षेत्रों में कोरल्स के अवशेषों या समुद्री धाराओं से जमा की गई रेत और मिट्टी से भी नए टापुओं का निर्माण होता है।
द्वीप तो खोज लिया, पर मालिक कौन होगा?
एक दिलचस्प सवाल यह उठता है कि क्या इस द्वीप को खोजने वाले वैज्ञानिक या उनका देश इस पर अपना कब्जा जमा सकते हैं? अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुसार, इसका जवाब ना है। कानून कहता है कि अगर कोई नया द्वीप किसी देश की समुद्री सीमा के 200 समुद्री मील के भीतर बनता है, तो उस पर उसी निकटतम तटीय देश का संप्रभु अधिकार होता है।
खोजने वाले व्यक्ति का उस पर कोई मालिकाना हक नहीं होता। अगर कोई द्वीप किसी भी देश की सीमा से 200 मील दूर, यानी इंटरनेशनल वॉटर्स में बनता है, तो तकनीकी रूप से वह किसी का नहीं होता। उसे अपना देश घोषित करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है, क्योंकि इसके लिए दुनिया के अन्य देशों से मान्यता मिलना जरूरी है।
कैसे हुई इस रहस्यमयी द्वीप की खोज?
यह खोज एक इत्तेफाक और वैज्ञानिकों की सजगता का नतीजा है। 8 फरवरी 2026 से, जर्मन रिसर्च आइसब्रेकर पोलरस्टर्न पर सवार 93 सदस्यों का एक दल उत्तर-पश्चिमी वेडेल सागर की खोज कर रहा था। यह दल मुख्य रूप से समुद्री धाराओं और पिघलती बर्फ का अध्ययन करने के लिए वहां मौजूद था।
अचानक समुद्र में मौसम खराब हो गया और तेज लहरों से बचने के लिए जहाज को जॉइनविले द्वीप की आड़ में शरण लेनी पड़ी। इसी दौरान वैज्ञानिकों की नजर एक ऐसी जगह पर पड़ी, जिसे समुद्री चार्ट पर केवल एक खतरे के क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया था।
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