कड़क स्वाद और बेमिसाल खुशबू का राज! क्या है एस्प्रेसो मशीन का वो इतिहास, जो इसे बनाती है सबसे खास
जब बात स्वाद और फुर्ती की हो, तो जुबान पर पहला नाम कॉफी का ही आता है। कॉफी की दुनिया में एस्प्रेसो ने अपने कड़क अंदाज और लाजवाब खुशबू से एक खास पहचान ...और पढ़ें

भाप के इंजन से लेकर मॉडर्न कैफे तक, कैसे हुआ एस्प्रेसो मशीन का आविष्कार? (Image Credit - Instagram)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हममें से ज्यादातर लोग सुबह की नींद भगाने से लेकर शाम की थकान गायब करने के लिए बस एक कप कॉफी का सहारा लेते हैं। जब मिनटों में तैयार होने वाली कॉफी की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है एस्प्रेसो का। यह कॉफी स्वाद में भले ही कड़वी होती है, लेकिन इसे पीने से हमारी सारी थकान मिनटों में फुर्र हो जाती है। साथ ही, शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है।
पहले के समय में कॉफी बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी और इसका बहुत लंबा प्रोसेस हुआ करता था। समय के बदलाव के साथ-साथ कॉफी बनाना काफी आसान हो गया है। अब हम एक बटन दबाकर कॉफी को इंस्टेंट तैयार कर लेते हैं। झटपट बनने वाली इस कॉफी को बनाने के लिए हम एस्प्रेसो मशीन का इस्तेमाल करते हैं।
यह वहीं मशीन है, जिसने कॉफी बनाने के लंबे प्रोसेस को मिनटों का काम बना दिया, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सबसे पहले एस्प्रेसो मशीन कहां से आई और किसने इसका आविष्कार किया? आइए इस आर्टिकल में आज हम जानेंगे एस्प्रेसो मशीन के पीछे छिपे दिलचस्प इतिहास के बारे में।
एस्प्रेसो मशीन का इतिहास

(Image Credit - Instagram)
आज हम जिस एस्प्रेसो कॉफी के दीवाने हैं, उस कॉफी मशीन का जन्म 19वीं सदी में इटली में हुआ था। साल 1884 में ट्यूरिन के एक उद्योगपति, एंजेलो मोरियोनडो ने दुनिया की पहली एस्प्रेसो कॉफी मशीन बनाई थी, जिसका उन्होंने पेटेंट कराया था, जो कॉफी को मिनटों में तैयार कर सकती थी।
उनका मकसद था कि कॉफी को तेजी से तैयार करना, ताकि लोग बिना इंतजार किए ताजी और स्वादिष्ट कॉफी का मजा ले सकें। मोरियोनडो ने एक एग्जीबिशन में इस मशीन को पेश किया था, जिसमें उनको ब्रॉन्ज मेडल मिला था।
मोरियोनडो ने इतनी बड़ी खोज के बावजूद इसे बड़े पैमाने पर बनाने का फैसला नहीं किया। उन्होंने कुछ गिनी-चुनी मशीनें ही तैयार कीं। फिर भी, उनकी सोच ने आगे आने वाली एस्प्रेसो मशीनों का रास्ता खोल दिया।
यह मशीन कैसे करती है काम?

नॉर्मल कॉफी मेकर कॉफी को उबालता है, लेकिन एस्प्रेसो मशीन का तरीका बिल्कुल अलग है। इसमें गर्म पानी को बहुत तेज दबाव के साथ बारीक पिसी हुई कॉफी से गुजारा जाता है। यही हाई-प्रेशर तकनीक कॉफी के असली स्वाद और खुशबू को पूरी तरह बाहर निकाल लाती है। इसी वजह से एस्प्रेसो अन्य कॉफी की तुलना में ज्यादा गाढ़ी, कड़क और खुशबूदार होती है।
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