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    बिना मुंह का इस्तेमाल किए मेढक कैसे बुझाता है अपनी प्यास? प्रकृति के इस कमाल को जानकर रह जाएंगे दंग

    Updated: Sun, 22 Mar 2026 01:58 PM (IST)

    जहां बाकी जानवर पानी पीने के लिए अपने मुंह का इस्तेमाल करते हैं, वहीं मेढक एक ऐसी अनोखी तकनीक अपनाते हैं जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे। ...और पढ़ें

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    प्यास बुझाने के लिए मुंह का इस्तेमाल क्यों नहीं करते मेढक? (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम देखते हैं कि जानवर पानी पीने के लिए अपने मुंह का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी किसी मेढक को पानी पीते देखा है?

    दरअसल, प्रकृति में मेढक एक ऐसा जीव है, जिसके पानी पीने का तरीका बेहद अनोखा और वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देने वाला है। मेढक अपनी प्यास बुझाने के लिए मुंह का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि वे अपनी त्वचा के जरिए पानी सोखते हैं।

    frog behaviour

    (Image Source: AI-Generated) 

    मेढक की अनोखी शारीरिक बनावट

    मेढक उभयचर (Amphibians) जीव होते हैं, जिसका मतलब है कि वे पानी और जमीन दोनों पर रह सकते हैं। उनकी त्वचा उनके जीवित रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंग है। वे अपनी त्वचा का इस्तेमाल न केवल सांस लेने के लिए करते हैं, बल्कि खुद को हाइड्रेटेड रखने और शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए भी करते हैं।

    क्या है 'पेलविक पैच' का रहस्य?

    मेढक के शरीर में पानी सोखने का असली राज उनके शरीर के निचले हिस्से में छिपा होता है। इसे 'पेलविक पैच' कहा जाता है। यह त्वचा का एक खास हिस्सा होता है जो मेढक के पेट और जांघों के निचले हिस्से में स्थित होता है। शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में यहां की त्वचा काफी पतली होती है, जिससे पानी को सोखना आसान हो जाता है। जब मेढक किसी गीली सतह पर बैठता है, तो यह हिस्सा सीधे संपर्क में आकर पानी सोखना शुरू कर देता है।

    frogs drinking water

    (Image Source: AI-Generated) 

    पानी सोखने की वैज्ञानिक प्रक्रिया

    मेढक के शरीर में पानी 'ओस्मोसिस' नामक प्रक्रिया के जरिए प्रवेश करता है। इस प्रक्रिया में पानी ज्यादा नमी वाली जगह (जैसे गीली मिट्टी या जमीन) से कम नमी वाली जगह (मेढक के शरीर) की ओर खिंचा चला जाता है। मेढक कभी पानी को 'पीता' नहीं है, बल्कि वह बस खुद को ऐसी जगह पर टिका देता है जहां उसे पर्याप्त नमी मिल सके। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करती है कि मेढक मुंह के बजाय अपनी त्वचा, खासतौर से पेलविक पैच से पानी प्राप्त करते हैं।

    सर्वाइवल और सुरक्षा के लिए जरूरी

    यह अनोखा तरीका मेढक को उन इलाकों में भी जीवित रहने में मदद करता है जहां पानी के खुले स्रोत (जैसे तालाब या नदियां) बहुत कम होते हैं। इसके अलावा, यह तरीका उन्हें शिकारियों से भी बचाता है। पानी पीने के लिए बार-बार इधर-उधर जाने के बजाय, वे एक ही जगह बैठकर शांति से हाइड्रेटेड रह सकते हैं, जिससे उन पर हमले का खतरा कम हो जाता है।

    Frog

    (Image Source: AI-Generated) 

    त्वचा की नमी और मेढक का बरताव

    मेढक के लिए उसकी त्वचा का नम रहना जीवन और मृत्यु का सवाल है। अगर उसकी त्वचा सूख जाए, तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। यही कारण है कि मेढक अक्सर कीचड़, गीली पत्तियों या पानी के पास बैठे पाए जाते हैं। सूखे के समय में वे अक्सर छायादार जगहों पर छिप जाते हैं या अपनी एक्टिविटीज को कम कर देते हैं ताकि शरीर की नमी बची रहे।

    प्रकृति का बेजोड़ तालमेल

    मेढक का पानी सोखने का यह तरीका हमें सिखाता है कि जीवित रहने के लिए प्रकृति ने हर जीव को अलग और प्रभावी ढंग से ढाला है। जिसे हम अजीब मान सकते हैं, वह वास्तव में लाखों वर्षों के विकास का परिणाम है जिसने मेढक को दुनिया के हर कोने में जीवित रहने के काबिल बनाया है।

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