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    GDP के नए फॉर्मूले से बदलेगी भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल, अब कैसे होगा देश की कमाई का पूरा लेखा-जोखा?

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 02:19 PM (IST)

    भारत सरकार ने 27 फरवरी से जीडीपी गणना का नया फॉर्मूला लागू किया है। अब आधार वर्ष 2011-12 की जगह 2022-23 होगा। नए आंकड़ों में घरेलू खपत सर्वेक्षण, श्रम ...और पढ़ें

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    GDP के नए फॉर्मूले से बदलेगी भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार आज यानी, 27 फरवरी से देश की जीडीपी नापने के पुराने पैमान को बदल रही है। भारत अब इस नए फॉर्मूले से ऑनलाइन बिजनेस और गिग वर्कर्स की कमाई का अर्थव्यवस्था में मापन अधिक आधुनिक और सटीक तरीकों से करेगा।

    सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के नए आकड़े अब 2011-12 की जगह 2022-23 को कमाई का नया आधार वर्ष माना जाएगा। जीडीपी आंकड़ों की नई श्रृंखला में क्या क्या बदलाव किए गए हैं? आइए जानते हैं इससे संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्नों के बारे में...

    सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है?

    सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी किसी लेखा अवधि में घरेलू अर्थव्यवस्था में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है। इसके तहत एक अवधि से दूसरी अवधि तक अर्थव्यवस्था में हुए परिवर्तन का सार्थक आकलन करने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि दोनों अवधियों के लिए समान मापन विधियों और डेटा स्रोतों का उपयोग किया गया हो।

    आधार वर्ष क्या है?


    राष्ट्रीय लेखा मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली आधार पुनर्निर्धारण प्रक्रिया में आधार वर्ष वह होता है, जिसके तहत मूल्यों का उपयोग वास्तविक वृद्धि की गणना के लिए किया जाता है।

    क्यों संसोधित किया गया जीडीपी का आधार वित्त वर्ष?

    राष्ट्रीय लेखा का आधार वर्ष 2011-12 से संशोधित होकर 2022-23 किया गया है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MoSPI) का प्रयास हर पांच साल में आधार वर्ष को संशोधित करना रहा है। लेकिन जीएसटी लागू होने और कोविड महामारी के कारण वित्तीय वर्ष 2017-18 से वित्तीय वर्ष 2021-22 के बीच संशोधन नहीं हुए।

    कोविड महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार के आधार प्रभाव के कारण वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी में तीव्र वृद्धि देखी गई। जिसके बाद राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी सलाहकार समिति जिसमें विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, राज्य सरकारों, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों के सदस्य शामिल हैं।

    समिति ने पाया कि वित्त वर्ष 2022-23 एक सामान्य आर्थिक वर्ष था, और राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण डेटा भी इस वर्ष के लिए उपलब्ध था।

    नई जीडीपी में पिछले कितने वर्षों के आकड़े उपलब्ध कराए जाएंगे?

    नई जीडीपी में पिछले वर्षों के आंकड़े दिसंबर 2026 तक जारी होने की उम्मीद है। इसमें वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक के वार्षिक और त्रैमासिक अनुमान जारी किए जाएंगे। अभी तक के नियम के अनुसार भारत में पिछले वर्षों के अनुमानों की गणना नई जीडीपी श्रृंखला की संशोधित पद्धति का उपयोग करके पिछले आधार वर्ष तक की जाती है। फिर आंकड़ों को विखंडित स्तर पर जोड़ा जाता है और 1950-51 तक पीछे ले जाया जाता है।

    अनौपचारिक क्षेत्र में दिखेगी असर

    नई जीडीपी प्रणाली में घरेलू खपत सर्वेक्षण, श्रम बल सर्वेक्षण और जीएसटी जैसे आधुनिक प्रशासनिक डेटा का इस्तेमाल होगा। इससे अनौपचारिक क्षेत्र और गिग इकॉनमी से जुड़े कामगारों की मेहनत भी जीडीपी में साफ नजर आएगी। भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान 2008 की राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (एसएनए 2008) के अनुसार तैयार करता है, जो विश्व स्तर पर स्वीकृत मानक है।

    संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग (यूएनएसडी) अब एसएनए 2008 से एसएनए 2025 की ओर अग्रसर है। उम्मीद है कि देश 2029-30 के दौरान एक नया मानक अपना लेंगे।

    नई जीडीपी श्रृंखला में कौन से नए आंकड़े शामिल किए जा रहे हैं?

    जीडीपी के नए आकड़ों में कई नए और बेहतर डेटा स्रोतों का उपयोग किया जा रहा है ताकि अनुमानों को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाया जा सके। नई श्रृंखला में, वार्षिक असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण (ASUSE) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) जैसे नियमित वार्षिक सर्वेक्षणों का उपयोग करके वास्तविक स्तर के अनुमान तैयार किए जा रहे हैं। यह जीडीपी को अधिक सटीक और नियमित रूप से मापेंगे।

    जीएसटी डेटा

    जीएसटी से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग अखिल भारतीय निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र के अनुमानों को राज्यों में आवंटित करने और वार्षिक खातों में क्रॉस-वैलिडेशन के लिए किया जा रहा है, इसके अलावा इसका व्यापक उपयोग तिमाही खातों में और त्रैमासिक राष्ट्रीय खातों में एक संकेतक के रूप में भी किया जाता है।

    ई-वाहन-
    ई-वाहन से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग सड़क परिवहन सेवाओं से संबंधित निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है।

    घरेलू क्षेत्र को अधिक व्यापक रूप से शामिल करने के उपाय

    भारत के घरेलू क्षेत्र को अधिक व्यापक रूप से शामिल करने के लिए नए नियमों में प्रत्येक वर्ष नियमित सर्वेक्षणों जैसे कि गैर-निगमित क्षेत्र उद्यम का वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) का उपयोग करके तैयार किए गए हैं। यह दृष्टिकोण घरेलू क्षेत्र को अधिक सटीक और गतिशील रूप से मापने की अनुमति देता है, जिससे आधार वर्ष से एक्सट्रपलेशन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

    क्या घरेलू कामगारों को भी इसमें शामिल किया जाएगा?

    अब सबसे अधिक पूछे जाने वाला सवाल यह है कि क्या नई जीडीपी दर में घरेलू कामगारों (जैसे रसोइये, ड्राइवर, घरों की सफाई करने वाले व्यक्ति आदि) के योगदान को जीडीपी के आकलन में शामिल किया जाता है? तो इसका जवाब हां होगा। क्योंकि, घरेलू कर्मचारियों के नियोक्ता के रूप में परिवारों की गतिविधियां कहा जाता है और इनका योगदान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान में शामिल किया जाता है।

    कॉर्पोरेट सेक्टर के मापन में कैसे सुधार करेगा?

    कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एमसीए-21 के आंकड़ों के माध्यम से डिजिटल सेवाओं और मध्यस्थ प्लेटफार्मों आदि सहित सभी आर्थिक गतिविधियों को पहले से ही कवर किया गया था। सकल घरेलू उत्पाद में घरेलू क्षेत्र के गैर-पंजीकृत छोटे व्यवसाय, स्वरोजगार, अनौपचारिक आर्थिक कार्य आदि को सटीक रूप से दर्ज किया जा रहा है। नई श्रृंखला में सभी आर्थिक गतिविधियों को अधिक व्यापक रूप से शामिल किया जा रहा है।

    आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

    अर्थशास्त्रियों के अनुसार जीडीपी में हुए बदलाव से भारत की विकास तर पहले से अधिक तेज देखी जा सकती है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव के अनुसार, नई प्रणाली में सेवा क्षेत्र का वजन बढ़ेगा। बुनियादी अर्थव्यवस्था समान रहने पर भी औसत वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर ऊंची नजर आ सकती है।

    नए जीडीपी डेटा से अर्थव्यवस्था के आकार और पिछली तिमाहियों की विकास दर का दोबारा आकलन किया जाएगा। यह आंकड़े रिजर्व बैंक के लिए महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि इन्हीं के आधार पर ब्याज दरों और महंगाई से जुड़ी भविष्य की मौद्रिक नीतियां तय की जाएंगी।