'असली नायक बनाता है,' देशभक्ति फिल्मों से Jimmy Shergill को लगाव, 'ऑपरेशन सफेद सागर' के खोले राज
वेब सीरीज ऑपरेशन सफेद सागर में नजर आने वाले अभिनेता जिमी शेरगिल ने दैनिक जागरण को दिए लेटेस्ट इंटरव्यू में कई अहम पहलुओं पर चर्चा की है। ...और पढ़ें
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अभिनेता जिमी शेरगिल (फोटो क्रेडिट- स्क्रीन शॉट)
HighLights
ऑपरेशन सफेद सागर लेटेस्ट सीरीज
जिमी शेरगिल ने निभाया अहम किरदार
देशभक्ति की मिसाल कायम करती है सीरीज
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई: कारगिल युद्ध को भले ही 27 साल हो गए हैं, लेकिन उससे जुड़ी ढेरों कहानियां हैं। हाल ही में नेटफ्लिक्स पर वेब सीरीज आपरेशन सफेद सागर आई है। यह 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा चलाया गया सैन्य अभियान था।
इसका उद्देश्य कारगिल क्षेत्र की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी घुसपैठियों और उनकी सैन्य चौकियों के खिलाफ भारतीय थलसेना के आपरेशन विजय को हवाई सहायता देना था। इसमें जिमी शेरगिल वायुसेना अधिकारी की भूमिका में नजर आए हैं।
देशभक्ति फिल्मों पर बोले जिमी
देशभक्ति आधारित फिल्मों से लगाव को लेकर जिमी कहते हैं कि हर देशभक्ति आधारित फिल्म का मुझ पर प्रभाव होता है और मुझे इमोशनल करती हैं और कहानियां अलग होती हैं, जिस तरह से अब हमारी एक अलग कहानी आई है। अभी तक लोगों ने कारगिल युद्ध को ज्यादातर सेना के नजरिए से ही देखा है कि यह लड़ाई भारतीय सेना ने लड़ी।
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लेकिन इस युद्ध में भारतीय वायुसेना की क्या भूमिका थी और कैसे उनका योगदान युद्ध में एक अहम मोड़ साबित हुआ, यह आपको इस कहानी में देखने को मिलेगा क्योंकि जो विवरण मुझे स्क्रिप्ट पढ़ते हुए समझ में आई, वो मुझे भी नहीं पता थी। वो मेरे लिए आंखें खोलने वाली थी। इमोशन के इतर इसमें हर चीज को बहुत विस्तार से दिखाया गया है। चाहे इन पात्रों की निजी जिंदगी हो, एयरबेस के हालात हों, देशों के बीच की राजनीति और भू-राजनीतिक परिस्थितियां हों या फिर खुद इन किरदारों की कहानी।
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यह सिर्फ एक पहलू की बात नहीं करती, बल्कि कई पहलुओं को एक साथ सामने लाती है। सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसे बेहद सरल और वास्तविक तरीके से दिखाया गया है। असल जिंदगी में जब आप किसी युद्ध नायक से मिलते हैं और उनसे बात करते हैं, तो उनकी सादगी और विनम्रता देखकर लगता है कि अरे, ये तो बिल्कुल हमारे जैसे सामान्य इंसान हैं। लेकिन उन्होंने देश के लिए क्या किया है, वो बहुत बड़ा काम होता है और वही उन्हें असली नायक बनाता है।
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सिर्फ फिल्मों में काम करना चाहते आजकल के बच्चे
कुछ दिनों पहले जिमी ने कहा था कि आजकल के ज्यादातर बच्चे सिर्फ फिल्मों में काम करना चाहते हैं। इस संदर्भ में अभिनेता कहते हैं कि जब मैं स्कूल में था, तब 99.9 प्रतिशत युवा सशस्त्र बलों में जाना चाहते थे, क्योंकि उनके सामने सबसे बड़ा सपना और सबसे सम्मानजनक विकल्प देश की सेना में सेवा करना ही होता था। कितने लोग उसमें सफल हो पाते थे, यह अलग बात है, लेकिन 99 प्रतिशत युवाओं की पहली पसंद सेना होती थी।

आज माहौल बदल गया है। अब ज्यादातर लोग फिल्मों में आना चाहते हैं, गायक बनना चाहते हैं या मनोरंजन की दुनिया में करियर बनाना चाहते हैं। मैं हमेशा यही कहता हूं कि अगर आप सक्षम हैं, बुद्धिमान हैं, आपकी नजर ठीक है और सेना में भर्ती के लिए जरूरी सभी योग्यताएं आपके पास हैं, तो आपकी पहली पसंद सशस्त्र सेना ही होनी चाहिए।
इसकी कोई गारंटी नहीं कि आपका चयन हो जाएगा, लेकिन अगर आप योग्य हैं तो आपको कम से कम एक बार जरूर प्रयास करना चाहिए। हम लोग अक्सर शूटिंग के सिलसिले में सेना के ठिकानों और कैंपों में जाते हैं। वहां की दुनिया बिल्कुल अलग है। कमाल की दुनिया है। असली हीरो तो वहीं से निकलते हैं
वास्तविक किरदार निभाने पर जिमी का रिएक्शन
वास्तविक किरदार निभाने पर उसके फीडबैक को लेकर जिमी कहते हैं वास्तविक हो या काल्पनिक फीडबैक जरूरी होता है। हम हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं, लेकिन कहीं न कहीं कुछ कमी जाती है। कोशिश यही रहती है कि हम अपनी तरफ से सौ प्रतिशत दे रहे हैं और आपको लग भी रहा हो कि हमने तो कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन जब कोई दूसरा व्यक्ति उस दृश्य को देखकर कहता है कि उसे इसमें कुछ अलग लगा या कहीं कोई कमी नजर आई, तो मैं उसकी बात को ध्यान में रखता हूं।

मुझे लगता है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसा कह रहा है, तो उसकी बात के पीछे कुछ वजह जरूर होगी। दूसरों की प्रतिक्रिया से कई ऐसी छोटी- छोटी चीजें पता चलती हैं। मैं उन्हें समझने और सुधारने की कोशिश करता हूं।
भारतीय सशस्त्र बलों पर आधारित शो सॉफ्ट पावर के तौर पर देश की छवि मजबूत करते हैं। इस बात पर जिमी कहते हैं कि युद्ध के इतिहास में पहली बार इतनी अधिक ऊंचाई पर वायुसेना ने सटीक बमबारी की थी और एक विश्व रिकार्ड बनाया था। उस समय तक किसी भी लड़ाकू विमान ने कभी यह नहीं किया था। हमारे वायुसेना के जवानों ने अपनी गणना, कौशल और सूझबूझ के दम पर यह उपलब्धि हासिल की थी।
देश मानएगा 100 साल का जश्न
मुझे लगता है कि यह ऐसी कहानी है, जिसे पूरी दुनिया के सामने आना चाहिए, ताकि लोगों को पता चले कि हमारे वायुसेना के जवानों ने किन परिस्थितियों में और किस तरह यह असाधारण काम किया था। साल 2047 में देश आजादी के सौ साल का जश्न मनाएगा।
ऐसे में देश से उम्मीदों को लेकर जिमी कहते हैं कि मैं पेपर पर लिखी बातों की बात नहीं कर रहा हूं। अपनी जिंदगी के 55 वर्षों में जो प्रगति भारत ने की है आज तक। उतना हम अब अगले बीस साल में कर गए तो हम दुनिया में नंबर वन या नंबर दो होंगे क्योंकि पहले हम कहां थे आज हम कहां हैं।