RD Burman ने डिप्रेशन से निकलकर बनाया था 53 साल पुराना कल्ट गाना, किशोर दा और Lata Mangeshkar की आवाज में हुआ अमर
Zeenat Aman पर फिल्माया गया 53 साल पुराने गाने को किशोर दा और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से सजाया था। ...और पढ़ें
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53 साल बाद भी आईकॉनिक है ये सॉन्ग
HighLights
53 साल बाद भी आईकॉनिक है ये सॉन्ग
किशोर दा और लता दीदी ने दी आवाज
कई बार बन चुके इस गाने के रीमिक्स
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कई सदाबहार गानों की सौगात दी है। लेकिन अगर बात करें उनके साथ गाए गए गीतों की तो वे आईकॉनिक गीतों में शुमार हैं। एक ऐसे ही कल्ट गाने की आज हम बात करने जा रहे हैं।
53 साल पहले रिलीज हुआ ये गाना आज भी उतना ही सदाबहार है और यह इतना पॉपुलर हुआ कि अब तक इसके कई रीमिक्स वर्जन आ चुके हैं।
काफी उदास थे आर डी बर्मन (RD Burman)
जिस फिल्म का यह गाना है उसके बनते वक्त गाने को कंपोज करने वाले आर डी बर्मन पहले उदास थे। कहा जाता है कि वे डिप्रेशन से गुजर रहे थे। तब फिल्म के अभिनेता देव आनंद (Dev Anand) ने उनसे तकरीबन 3 घंटे तक बातचीत की और तब जाकर आर डी बर्मन का हौसला बढ़ा और उन्होंने इस फिल्म के लिए धुनें तैयार कीं।
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उस समय जब बर्मन खुद पर शक कर रहे थे, तब देव आनंद की हौसला बढ़ाने वाली बातों ने एक टर्निंग पॉइंट का काम किया। इस बातचीत ने उनकी क्रिएटिविटी को जगाया, जिससे फिल्म के बेहतरीन गाने बने।
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कौन सा है ये गाना?
किशोर कुमार (Kishore Kumar) और लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के जिस गाने की हम बात कर रहे हैं- उसके बोल हैं- पन्ना की तमन्ना है (Panna Ki Tamanna Hai)। यह गीत फिल्म हीरा पन्ना (Heera Panna) के लिए बनाया गया था। फिल्म में देव आनंद (Dev Anand), जीनत अमान (Zeenat Aman) ने लीड रोल निभाया था और उनके साथ राखी, रहमान और धीरज कुमार अहम रोल में थे। फिल्म का संगीत आर डी बर्मन ने तैयार किया था। इस फिल्म को देव आनंद ने ही लिखा और निर्देशित किया था।
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पंजाबी गाने में हुआ इस्तेमाल
इस गाने के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे। यह गीत बिनाका गीत माला की 1974 की वार्षिक लिस्ट में 14वें पायदान पर रहा था। वहीं यह इतना पॉपुलर हुआ कि इसे पंजाबी गायक अरिंदर गिल के पॉपुलर गीत दिल्दारियां में भी इस्तेमाल किया गया था।
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आर डी बर्मन का डिप्रेशन से स्ट्रगल
हालांकि उन्होंने 70 के दशक की शुरुआत में आई इस मुश्किल का सामना कर लिया था, लेकिन उन्हें डिप्रेशन का सबसे गंभीर दौर 80 के दशक में झेलना पड़ा। इस दौरान, लगातार कई फिल्में कमर्शियली सफल नहीं रहीं, जिसकी वजह से फिल्म इंडस्ट्री ने उनसे दूरी बना ली। 1988 में उन्हें हार्ट अटैक आया और 1994 में 54 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। हालांकि आर डी बर्मन को आज भी उनके सदाबहार गानों के लिए याद किया जाता है और वे आज भी भारतीय सिनेमा के उम्दा संगीतकारों में से एक के रूप में सराहे जाते हैं।