16 की उम्र में शादी, 4 बच्चों की मां और अंग्रेजों के खिलाफ बगावत... शराबी पति को छोड़ बनीं सिनेमा की पहली 'हिट मां'
हिंदी सिनेमा की पहली ग्रेजुएट अभिनेत्री जिनकी कम उम्र में शादी हुई, पति से लड़ी, अकेले बच्चों को पाला, यहां तक कि उन्होंने अंग्रेजों से बगावत तक कर डा ...और पढ़ें

सिनेमा की पहली ग्रेजुएट एक्ट्रेस की कहानी

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई अभिनेत्रियां ऐसी रहीं, जिन्होंने मुकाम तो खूब हासिल किए लेकिन निजी जिंदगी में आए वक्त के थपेड़ों ने उन्हें क्या से क्या बना दिया। आज जहां अभिनेत्रियों की जिंदगी इतनी लग्जरी से भरी है, वहीं एक वक्त था जब हिंदी सिनेमा में एक ऐसी हीरोइन आई जिसने अपने संघर्षों के दम पर फिल्मों में अपनी जगह बनाई। यहांतक कि इन्हें हिंदी सिनेमा की पहली ग्रेजुएट एक्ट्रेस कहा जाता है। आज कहानी इन्हीं की...
कौन थी सिनेमा की पहली ग्रेजुएट एक्ट्रेस?
दरअसल जिस एक्ट्रेस की हम बात कर रहे हैं, उनका नाम लीला चिटनिस है। 9 सितंबर, 1909 को लीला चिटनिस कर्नाटक के ब्राह्मण परिवार में जन्मीं। लीला चिटनिस पढ़े लिखे परिवार से आती थीं। लीला के पिता अंग्रेजी के प्रोफेसर थे, तो ऐसे में लीला चिटनिस खुद भी खूब पढ़ी लिखी थीं। उन्हें महाराष्ट्र की पहली ग्रेजुएट लेडी का खिताब मिला था।
15 या 16 की उम्र में उनकी शादी हो गई। वह चार बच्चों की मां बनीं लेकिन, अभिनय से उनका लगाव कम नहीं हुआ। उन्होंने 'नाट्यमानवांतर' नाम का मराठी थिएटर ज्वॉइन किया। यहां अभिनय और कॉमेडी प्ले करते हुए अपने अभिनय के शौक को पूरा करना शुरू किया। इसके बाद वह फिल्मों में आ गईं।
कम उम्र में शादी फिर अंग्रेजों के खिलाफ उठाई आवाज
लीला लिटनिस करीब 15-16 साल की थीं, तभी उनकी शादी डॉक्टर गजानन यशवंत चिटनिस से हो गई थी। कम उम्र में ही लीला मां बन गईं और चार बच्चे लीला को हुए। इस दौरान लीला अपने पति के साथ अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठा भी उठा रही थीं। हालांकि लीला के पति के साथ उनका ज्यादा अच्छा रिश्ता नहीं रहा।
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पति की शराब की लत ने लीला को परेशान कर दिया था। आखिरकार वह पति से अलग हो गईं और बच्चों की परवरिश में लग गई। इसके बाद लीला ने स्कूल में टीचर के तौर पर नौकरी शुरू की। धीरे-धीरे लीला का सफर सिनेमा की ओर बढ़ा।
बॉम्बे टॉकीज ने पहचाना था लीला का हुनर
4 बच्चों का पालन-पोषण और घर चलाना, आसान नहीं था। आखिरकार लीला चिटनिस को पहला ब्रेक 'जेंटलमैन डाकू' से मिला था, जिसमें उन्होंने पुरुषों की पोशाक पहनी थी। लीला ने यह किरदार बखूबी निभाया था। उनकी एक्टिंग से निर्देशक इतने प्रभावित हुए कि उनके पास फिल्मों की बाढ़ आने लगी। उस समय लीला अपने करियर के ऐसे पड़ाव पर थीं कि, वह जिस भी फिल्म को हाथ लगातीं, वह चमक उठती।
ऐसे समय में लीला को बॉम्बे टॉकीज से जुड़ने का मौका मिला। हालांकि लीला लिटनिस के करियर को संवारने वाली फिल्म कंगन थी, जो उन्होंने बॉम्बे टॉकीज के साथ की। फिल्म में लीला और अशोक कुमार की एक्टिंग की खूब तारीफें हुईं और बाद में दोनों ने साथ में कई फिल्में कीं।
साल 1940 में उन्होंने बंधन आजाद फिल्म में काम किया इसके बाद वह 1941 में झूला में नजर आईं। इसी बीच साल 1941 में उन्होंने इतिहास रच दिया। वो पहली ऐसी भारतीय एक्ट्रेस थीं, जो लक्स गर्ल बनीं और इस साबुन ब्रांड की पहली भारतीत एक्ट्रेस थीं जिन्होंने इसे एंडोर्स किया।

सिनेमा की पहली हिट मां
लीला (Leela Chitnis) ने अपने करियर में हर तरह के रोल निभाए। उन्होंने कभी भी किसी किरदार से परहेज नहीं किया और फिर एक वक्त ऐसा आया, जब लीला सिनेमा की हिट मां बन गईं। साल 1948 में फिल्म शहीद में लीला ने पहली बार मां का किरदार निभाया और इस फिल्म में लीला ने दिलीप कुमार की मां के किरदार में दिखीं।
उस दौर में कई अभिनेत्रियां थीं, जो पर्दे पर मां के किरदार निभाती थीं, लेकिन लीला की बात ही अलग थी। वो जब भी मां का किरदार निभातीं, दर्शक उसे खूब प्यार देते। दिलीप कुमार, देवानंद और राज कपूर से लेकर वो सुपरस्टार्स की मां के किरदारों में दिखीं।
करियर में बुलंदियों पर होने के बाद भी लीला चिटनिस ने 1987 की फिल्म दिल तुझको दिया के बाद इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। लाइमलाइट से दूर लीला अमेरिका में अपने बच्चों के साथ रहने लगीं। उन्हें महाराष्ट्र की पहली ग्रेजुएट लेडी का खिताब मिला था।
कई दशकों तक उन्होंने काम किया, सिनेमा में कदम जमाए, अंग्रेजों से लड़ीं, पति से लड़ीं और कई यादगार फिल्में देकर उन्होंने अंतिम सांस अमेरिका में ही ली। साल 2003 में 94 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।