माइकल जैक्सन ने संगीत से मिटाई नस्लभेद की दीवारें, बने ‘किंग ऑफ पॉप’; मगर अधूरी रह गई जिंदगी की आखिरी ख्वाहिश
किंग ऑफ पॉप कहे जाने वाले माइकल जैक्सन ने अपने संगीत से न सिर्फ ऑडियंस को झूमने पर मजबूर किया, ...और पढ़ें

माइकल जैक्सन बर्थ एनिवर्सरी / फोटो- इंस्टाग्राम
HighLights
माइकल जैक्सन ने संगीत से नस्लीय भेदभाव मिटाया
'किंग ऑफ पॉप' का पूरा नहीं हुआ एक सपना अधूरा
उनकी बायोपिक 'माइकल' अब ओटीटी पर उपलब्ध
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'माइकल जैक्सन'...संगीत की दुनिया का वो नाम जिनके गाने पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों ने सुने हैं। निया के 'किंग ऑफ पॉप' कहलाने वाले माइकल ने न सिर्फ अपने गानों पर लोगों को डांस करने पर मजबूर किया, बल्कि उनके पावरफुल सॉन्ग्स ने लंबे समय से अमेरिका में चली आ रहे भेदभाव की दीवार को भी गिराया।
वैसे तो माइकल जैक्सन ने अपनी जिंदगी में दौलत और शोहरत सब पाई, लेकिन मौत से पहले एक इच्छा उनकी अधूरी ही रह गई। कुछ महीनों पहले अप्रैल में माइकल जैक्सन की बायोपिक रिलीज हुई थी, जिसने सिनेमाघरों में धूम मचा दी थी। अब उनकी बायोपिक 'माइकल' सिंगर के जन्मदिन के खास मौके पर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आ गई है। इस खास मौके पर पढ़ें 'किंग ऑफ पॉप' से जुड़ी कई बातें।
सड़कों पर परिवार संग रहा करते थे माइकल
माइकल जैक्सन को शोहरत विरासत में नहीं मिली थी, बल्कि उन्होंने इसे कमाया था। पूरी दुनिया में अपने संगीत से छाने वाले माइकल जैक्सन का जन्म 29 अगस्त 1958 को गैरी इंडियाना में हुआ था। उनके 10 भाई-बहन थे, जिसमें वह 8वें नंबर पर थे। बचपन से ही माइकल की दिलचस्पी गानों की तरफ काफी ज्यादा थी।
माइकल जैक्सन का पूरा बचपन गरीबी में बीता था। किंग ऑफ पॉप की जिंदगी में वह समय भी आया, जब उन्हें सड़कों पर रहना पड़ा। उनके पिता मुक्केबाज थे और माँ पियानों बजाती थीं।

'जैक्सन-5' नाम से बनाया था बैंड
बचपन से ही संगीत प्रेमी रहे माइकल जैक्सन ने बहुत ही कम उम्र में अपने भाइयों के साथ मिलकर 'जैक्सन-5' नाम का एक बैंड बनाया। जिसमें वह पहले सिर्फ परफॉर्मेंस दिया करते थे, लेकिन धीरे-धीरे वह वह जल्द ही उस बैंड के लीडर बन गए। 1970 में जैक्सन 5 बैंड के हिट गानों ने उन्हें इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर लोकप्रियता दिलाई।
भेदभाव मिटाने के लिए संगीत का लिया सहारा
अमेरिकी गायक, गीतकार और डांसर के अलावा माइकल जैक्सन समाजसेवी भी थे। उन्होंने अपने गानों में अमेरिका में हमेशा से चले आ रहे नस्लीय-भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। पॉप किंग ने 'ब्लैक एंड व्हाइट' गाने में नस्लवाद की आलोचना की और बहुसंस्कृतिवाद का समर्थन किया। इसके अलावा 'रिमेंबर द टाइम' में उन्होंने अमेरिकन संस्कृति के बारे में बताया। उनकी गायकी ने पॉप कल्चर पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

अधूरा रह गया माइकल जैक्सन का एक सपना
साल 1971 में सोलों करियर शुरू करने वाले माइकल जैक्सन ने वैसे तो गॉट टू बी देयर, बेन, रॉक इन रॉबिन के साथ कई सफल हिट गाने दिए, लेकिन उनका जो एक ड्रीम अधूरा रह गया वह थे 'दिस इज इट' कॉन्सर्ट सीरीज तैयार करना। दरअसल, 25 जून 2009 में 50 साल की उम्र में जब सिंगर का निधन हुआ, उससे पहले वह इसी शृंखला पर काम कर रही थे। माइकल जैक्सन के निधन की खबर ने दुनियाभर में उनके चाहने वालों का दिल तोड़ दिया था। आज भी उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर फैंस उन्हें याद करते हैं।
