Lee Cronin's The Mummy Review: कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है ये हॉरर फिल्म, हर सीन पर लगता है डर
Lee Cronin's The Mummy Review: 'भूत बंगला' की रिलीज के बीच बड़े पर्दे पर 'द ममी' आ गई है। फिल्म देखने से पहले इसे जान लें। ...और पढ़ें

ली क्रोनिन्स द ममी का रिव्यू। फोटो क्रेडिट- एक्स

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दीपेश पांडेय, मुंबई। साल 1999 में प्रदर्शित हॉलीवुड फिल्म द ममी (The Mummy) से ममी फ्रेंचाइजी की फिल्मों की शुरुआत हुई थी। इसके बाद अलग-अलग सालों में इस फ्रेंचाइजी से जुड़ी कई फिल्में आईं।
अब निर्देशक ली क्रोनिन ने अपनी नई संकल्पना के आधार पर फिल्म ली क्रोनिन्स द ममी (Lee Cronin's The Mummy) बनाई है। इससे पहले लो क्रोनिन के निर्देशन में प्रदर्शित हॉरर फिल्म एविल डेड राइज (2023) काफी लोकप्रिय हुई थी। ऐसे में द ममी फिल्म के आगे अपना नाम जोड़ना बताता है कि यह फिल्म उन्होंने अपनी ही शैली और हॉरर एलिमेंट्स के साथ बनाई है।
क्या है द ममी की कहानी?
फिल्म की कहानी शुरू होती है, मिस्र में रहने वाले टीवी पत्रकार चार्ली कैनन (जैक रेनोर) के परिवार से। जिसमें उसकी एक बेटी कैटी (एमिली मिशेल, बाल भूमिका), बेटा सेबस्टियन (शाइलो मोलिना ) और गर्भवती पत्नी लरीसा (लाइया कोस्टा ) हैं। कुछ घटनाक्रम होते हैं और चार्ली की बेटी कैटी गायब हो जाती है। काफी ढूंढ़ने पर चार्ली को उसका पता नहीं चलता। फिर वह परिवार सहित न्यू मैक्सिको रहने चला जाता है।
करीब आठ साल बाद उसे पता चलता है कि मिस्र में एक प्लेन दुर्घटना में कैटी (नैटली ग्रेस, वयस्क भूमिका) एक ममी में काफी बुरी हालत में मिलती है। उसके माता-पिता उसे घर लाते हैं, तब तक चार्ली की दूसरी बेटी माड (बिली राय) भी पैदा हो चुकी होती है। कैटी पर शैतान का साया है, उसके आते ही घर में असामान्य घटनाएं होने लगती हैं। पिछले आठ सालों में क्या हुआ, चार्ली उस शैतान से कैटी व अपने परिवार को बचा पाता है? कहानी इस संबंध में है।
कैसी है फिल्म का स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन?
सुपरनेचुरल हॉरर फिल्म के मामले में विशेषज्ञता रखने वाले ली क्रोनिन ने फिल्म का स्क्रीनप्ले अच्छा लिखा है और निर्देशन पर पकड़ बनाए रखी है। शुरू के आधे घंटे फिल्म पात्रों और परिस्थितियों को स्थापित करने में लेती है, उसके बाद हॉरर और पारिवारिक ड्रामा दोनों ही साथ चलते हैं।
अच्छी बात यह है क्रोनिन ने हॉरर फिल्म में पारिवारिक ड्रामा और परिवार की भावनाओं को भी संतुलित तरीके से दिखाया है। वर्तमान दौर में सिनेमा का स्तर काफी बढ़ चुका है, ऐसे में यह डराने में थोड़ी कमजोर पड़ती है। जो लोग खून-खराबा नहीं देख सकते हैं, ये फिल्म उनके लिए नहीं है।
यह भी पढ़ें- Toaster Review: 'महाकंजूस' पति बनकर छा गए राजकुमार राव, धांसू कहानी के बावजूद कहां हुआ फिल्म का बेड़ागर्क?
कलाकारों का प्रदर्शन
कलाकारों में जैक रैनोर, लाइया कोस्टा और मे कैलामावी ने अपनी भूमिकाएं अच्छी तरह निभाई हैं। फिल्म के तीनों बाल कलाकार (एमिली, शाइलो और बिली) प्रभावित करते हैं।
BGM और सिनेमैटोग्राफी का असर
हॉरर फिल्मों में बैकग्राउंड साउंड, सिनेमैटोग्राफी, लाइट, मेकअप और सीन में सामानों (एलिमेंट्स) का सही उपयोग महत्वपूर्ण होता है। स्टीफन मैकोन का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म डर और आश्चर्य का भाव अच्छी तरह से पकड़ता है।
मिस्र के रेतीले तूफान हों या अन्य सीन, डेव गार्बेट द्वारा की गई फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी सराहनीय है। कुल मिलाकर, हॉरर जॉनर में यह अच्छी फिल्म है। अगर स्क्रिप्ट पर और काम होता तो ज्यादा डरावनी बनाई जा सकती थी।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।