'जब काम नहीं होता तो...' Taarak Mehta में 'बाघा' का रोल निभाने वाले तन्मय बेकरिया का बयान, पिता की सीख का कर रहे पालन
तन्मय वेकारिया ने बताया कि कैसे वह अपने दिवंगत पिता अरविंद वेकारिया की 'शो मस्ट गो ऑन' की सीख का पालन करते हैं। यहां तक कि उनके निधन के दिन भी काम किय ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रियंका सिंह, मुंबई। अपने करियर में शो मस्ट गो आन यानी शो चलते रहना चाहिए, इसी तर्ज पर काम करते आए हैं धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा में काम कर रहे तन्मय वेकारिया (Tanmay Vekaria)। वह वर्ष 2011 से इस शो में बाघा की भूमिका निभा रहे हैं। पिछले दिनों तन्मय ने अपने पिता व गुजराती थिएटर के जाने-माने कलाकार, निर्माता-निर्देशक अरविंद वेकारिया को खो दिया। जिस दिन उनके पिता का निधन हुआ, उस दिन भी तन्मय अपना काम खत्म करके सेट से घर गए थे।
पिता ने क्या दी थी सीख
वह कहते हैं कि मेरे पिता गुजराती थिएटर से थे। वह जब अपने अंतिम दिनों के करीब थे तो उन्होंने यही कहा था कि मेरे बारे में कोई खबर आए तो तुम दौड़कर आ मत जाना। काम खत्म करना, फिर आना। कारण, वह नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से निर्माता का कोई नुकसान हो। उस दिन मैंने जितना जरूरी था, उतना काम करके निकला। मुझे बचपन से थिएटर के दिनों से सिखाया गया है कि कुछ भी हो जाए, शो मस्ट गो आन।
इस धारावाहिक में कई कलाकार आए और गए, लेकिन पिछले 15 साल से तन्मय बाघा का रोल कर रहे हैं। उन्हें इसे छोड़ने या दूसरे रोल करने का खयाल कभी नहीं आया। इस पर वह कहते हैं कि मेरे लिए काम, काम है। ऐसा विचार दिमाग में आने ही नहीं देना चाहता हूं, क्योंकि मुझे पता है कि जब काम नहीं होता है तो कैसा लगता है। मैं बाघा का रोल करके खुश हूं।
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सेट पर लोग करते हैं एक-दूसरे की मदद
ऐसा नहीं है कि वह केवल कॉमेडी ही करता है। पिछले दिनों उनकी मंगेतर बावरी के साथ एक पूरा भावनात्मक सीन चला था, जिसमें वह बावरी की भलाई के लिए उसे छोड़ने तक के लिए तैयार हो जाता है। यह सेट मेरा दूसरा घर ही नहीं, पूरी कास्ट और क्रू दूसरा परिवार भी है। अपने परिवार से ज्यादा समय उनके साथ बीतता है। एक उदाहरण देता हूं, पिछले दिनों मुंबई में बहुत बारिश थी। मेरी गाड़ी खराब हो गई थी तो सर्विसिंग के लिए दी थी। पैकअप के बाद उस दिन कई लोगों ने सेट पर मुझसे कहा कि हम आपको घर छोड़ देते हैं। हर कोई एक-दूसरे की मदद करता है।
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इस पारिवारिक माहौल में सीनियर-जूनियर का अंतर सेट पर कितना रह जाता है?
इस पर तन्मय कहते हैं कि सेट पर सबसे सीनियर कलाकार दिलीप भाई (जेठालाल की भूमिका निभाने वाले अभिनेता दिलीप जोशी) हैं। सेट पर हमेशा एक दायरा रहता है, जिसे कोई भी सह-कलाकार पार नहीं करता है। सीनियर सम्मान के हकदार हैं, इसलिए उनके साथ हंसी-मजाक भी उसी हद में किया जाता है। बाकी जो हम उम्र हैं, उनसे खूब मस्ती होती है। सेट पर हर कलाकार का लक्ष्य यही होता है कि सीन अच्छा होना चाहिए।
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इतने वर्षों में बाघा का रोल करते-करते क्या अब इस नाम से बुलाए जाने पर तन्मय पलटकर देखते हैं?
इस पर वह कहते हैं कि हां, मुस्करा देता हूं। गुजराती में बाघा का मतलब बेवकूफ होता है, लेकिन मैं खुश हूं कि मेरे इस रोल ने इस नाम के मतलब को ही बदल दिया है।
तारक मेहता का उल्टा चश्मा धारावाहिक पिछले काफी समय से किसी न किसी कारण से विवादों में भी रहा है।
इस पर तन्मय कहते हैं कि परिवार है तो छोटी-मोटी तकरार होती रहती है। दुर्भाग्यवश इंटरनेट मीडिया उसे बड़ा बना देता है। अगर मैंने कोई सीन सही से नहीं किया और किसी ने इस बात को लीक कर दिया कि परफार्मेंस बिगड़ रहा है तो इसे मिर्च मसाला लगाकर बना दिया जाता है, लेकिन जैसा दिखता है, वैसा होता नहीं है। कई बार अगर कहासुनी हो जाती है तो सब एक-दूसरे से माफी भी मांग लेते हैं।
बाघा का पात्र बच्चों के बीच काफी प्रसिद्ध है। हालांकि, वह अपने बच्चों को इस स्टारडम से दूर रखते हैं। तन्मय अपने बच्चों को चांदी का चम्मच नहीं पकड़ाना चाहते हैं। वह कहते हैं कि मेरी परवरिश संघर्ष वाले माहौल में हुई है। इसलिए मुझे पैसों की अहमियत है। वैसी ही परवरिश मैं अपने दोनों बच्चों की कर रहा हूं। मेरी बेटी कॉलेज में पढ़ती है। मैं उससे कहता हूं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आओ-जाओ। इससे उसे जिंदगी और पैसों की अहमियत पता चलेगी। मैं फिजूलखर्ची नहीं करता हूं, जो संस्कार मेरे माता-पिता ने दिए हैं, वही उन्हें दे रहा हूं। चीजें आसानी से मिलती हैं तो कहीं न कहीं अंहकार आ ही जाता है।