स्पेन की जीत के पीछे था गोलकीपर का 'आत्मघाती' दांव, अगर होती चूक तो एमबापे तबाह कर देते फाइनल का सपना
स्पेन की फ्रांस पर जीत में गोलकीपर उनाइ सिमोन का जोखिम भरा दांव निर्णायक साबित हुआ। सिमोन ने 42वें मिनट में एमबापे के संभावित गोल को बहादुरी से नाकाम ...और पढ़ें

फ्रांस बनाम स्पेन

समय कम है?
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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। फ्रांस के विरुद्ध स्पेन की जीत के तमाम कारण आपने पढ़े होंगे लेकिन अगर आपने मैच नहीं देखा तो आप इस मैच का सबसे महत्वपूर्ण पल मिस कर गए। स्पेन ने 22वें मिनट में पेनल्टी के जरिए बढ़त ले ली थी लेकिन फ्रांस लगातार हमले कर रहा था खासतौर से मैच के 35वें मिनट के बाद एकाएक फ्रेंच हमलों की बाढ़ आ गई।
40वें मिनट में काइलियन एमबापे ऑफसाइड करार दिए गए लेकिन 42वें मिनट में ही वह एक बार फिर से हमला करने बढ़ रहे थे और तभी स्पेन के गोलकीपर उनाइ सिमोन ने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया और बहुत बहादुरी से बड़ी जीत भी हासिल की।
उनाइ सिमोन की रणनीति
सेमीफाइनल में उनाइ सिमोन ने ज्यादातर वक्त अपने पेनल्टी बॉक्स की लाइन पर ही बिताया, वह रेगुलर गोलकीपर की जगह से बहुत आगे खड़े हो रहे थे। दरअसल सिमोन इस मैच में डिफेंडरों की मदद के लिए ऐसा कर रहे थे और जब भी डिफेंडरों पर दबाव पड़ने की संभावना रही तो वह गेंद सिमोन की ओर बढ़ा देते और सिमोन बाकी का काम कर ले रहे थे।
उनाइ सिमोन ने लिया सबसे बड़ा रिस्क
हालांकि गोलकीपर का इतना आगे खड़ा होना बहुत रिस्की होता है लेकिन कोच लुइस दे ला फुएंते के साथ मिलकर सिमोन ने इस रिस्क की तैयारी कर रखी थी। उन्हें पता था कि रिस्क कामयाब हो तो इनाम बड़ा मिलता है और उन्हें सबसे बड़ा इनाम मिला 42वें मिनट में जब फ्रांक के मिडफील्डर आद्रियन राबियो ने एक गेंद बड़ी चतुराई से एमबापे के आगे की ओर धकेली।
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फुटबॉल की भाषा में इसे थ्रूबॉल कहते हैं और एमबापे इस पर बहुत तेजी से झपटे लेकिन दूसरी ओर से सिमोन ने बहुत तेजी दिखाई और भागते हुए गेंद को एमबापे के पैरों के नीचे से क्लियर कर दिया। इस वक्त सिमोन अपने गोल से बहुत दूर थे और अगर वह गेंद तक नहीं पहुंचते तो एमबापे बेहद आसानी से गोल भी कर सकते थे। इसमें एमबापे पर फाउल होने का खतरा भी था लेकिन सिमोन ने अपनी बहादुरी से इन दोनों खतरों को अकेले निपटा दिया।