फरीदाबाद में बाढ़ पीड़ितों का पुनर्वास प्रस्ताव अटका, उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार
साहूपुरा खादर पंचायत ने बाढ़ से प्रभावित लतीफपुर और दुल्हेपुर के ग्रामीणों को दूसरे गांव में बसाने का प्रस्ताव अभी तक पारित नहीं किया है। सरपंच ने इसका कारण उच्च न्यायालय में लंबित अपील को बताया है। ग्रामीणों ने बाढ़ के दौरान राहत शिविरों में रहने के बाद पंचायत की भूमि पर बसाने का अनुरोध किया था।

हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई 12 दिसंबर को करेगा। सांकेतिक तस्वीर
सुभाष डागर, बल्लभगढ़। साहूपुरा खादर गांव की पंचायत ने अभी तक लतीफपुर और दुल्हेपुर के गांववालों को यमुना में आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए दूसरे गांव में पंचायत की ज़मीन पर बसाने का प्रस्ताव पास नहीं किया है। गांव के सरपंच ने इस इनकार का कारण पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दायर अपील बताया है। हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई 12 दिसंबर को करेगा। उसके बाद ही इस प्लान पर कोई एडमिनिस्ट्रेटिव फैसला होगा।
अगस्त के आखिर और सितंबर की शुरुआत में जब यमुना में बाढ़ आई थी, तो साहूपुरा खादर पंचायत के लतीफपुर और दुल्हेपुर के गांववालों को निकालकर अरुआ गांव के सरकारी स्कूल में एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से बनाए गए रिलीफ कैंप में ठहराया गया था। डिप्टी कमिश्नर विक्रम सिंह भी इन लोगों से मिलने गए थे। उस समय लतीफपुर और दुल्हेपुर के गांववालों ने डिप्टी कमिश्नर से अरुआ में पंचायत की जमीन पर उन्हें बसाने की रिक्वेस्ट की थी, ताकि उन्हें यमुना में आने वाली बाढ़ से हमेशा के लिए बचाया जा सके।
वे पंचायत की जमीन का मुआवजा सर्कल रेट पर देने के लिए मान गए थे। साहूपुरा खादर पंचायत के सरपंच ताराचंद भी मौजूद थे। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर ने गांव वालों को भरोसा दिलाया कि स्कीम पर एक्शन लिया जाएगा। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर ने डिस्ट्रिक्ट पंचायत और डेवलपमेंट ऑफिसर प्रदीप कुमार को इस मामले पर एक्शन लेने का ऑर्डर दिया। इन ऑर्डर के बावजूद अभी तक स्कीम पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
स्कीम पर एक्शन न होने की यह है वजह
विपक्ष ने साहूपुरा खादर पंचायत के सरपंच ताराचंद पर पंचायत की ज़मीन पर गैर-कानूनी कब्ज़ा करने का आरोप लगाया है। इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डिप्टी कमिश्नर को उन्हें हटाने का ऑर्डर दिया था। सरपंच ताराचंद ने अब हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील फाइल की है। इस अपील पर 12 दिसंबर को हाई कोर्ट में सुनवाई होगी।
सरपंच ने हाई कोर्ट में अपनी अपील फाइल की है। इसलिए, गांव में कोई सरपंच नहीं है। हाई कोर्ट की अपील पर 12 दिसंबर को सुनवाई होगी। उसके बाद ही इस मामले पर कोई फैसला होगा। अगर हाई कोर्ट सरपंच को राहत देता है, तो पंचायत की तरफ से एक प्रस्ताव पास किया जाएगा। अगर सरपंच को कोई राहत नहीं दी जाती है, तो पंचायत में एक एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया जाएगा और पंचायत इस बारे में एक प्रस्ताव पास करेगी।
-प्रदीप कुमार, डिस्ट्रिक्ट पंचायत और डेवलपमेंट ऑफिसर, फरीदाबाद

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