गुरुग्राम: बंधवाड़ी लैंडफिल में 28 घंटे बाद भी नहीं बुझी आग, कई जगहों से अभी भी धुआं निकल रहा
गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड स्थित बंधवाड़ी लैंडफिल में लगी आग 28 घंटे बाद भी पूरी तरह शांत नहीं हुई है। हालांकि, 80% आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन धुआं ...और पढ़ें
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बंधवाड़ी लैंडफिल में लगी आग को बुझाते दमकलकर्मी। सौजन्य : अग्निशमन विभाग
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड स्थित बंधवाड़ी लैंडफिल में लगी आग 28 घंटे बाद भी पूरी तरह नहीं बुझ सकी। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे कूड़े के ढेरों में लगी आग पर बृहस्पतिवार शाम सात बजे तक करीब 80 प्रतिशत काबू पा लिया गया, लेकिन कई स्थानों से धुआं लगातार सुलगता रहा। आग की तीव्रता भले कम हुई हो, लेकिन प्रदूषण और स्वास्थ्य पर खतरा बरकरार है।
आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की करीब दस गाड़ियां दिन-रात मौके पर डटी रहीं और लगातार पानी का छिड़काव किया गया। इसके साथ ही कूड़े के ढेरों को हटाने और अंदर सुलग रही आग तक पहुंचने के लिए भारी मशीनों का भी इस्तेमाल किया गया।
नगर निगम के एक्सईएन संदीप सिहाग ने बताया कि आग पर लगभग काबू पा लिया गया है, लेकिन जहां-जहां धुआं निकल रहा है, उसे पूरी तरह खत्म करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि कचरा निस्तारण कर रही एजेंसियों को टेंडर शर्तों के अनुसार आग से बचाव के सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
पर्यावरणीय लापरवाही पर भारी जुर्माना
बंधवाड़ी लैंडफिल लंबे समय से पर्यावरणीय चिंताओं का केंद्र बना हुआ है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम पर अब तक 6.3 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा तय किया है। अप्रैल 2020 से हर महीने 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा रहा है। यह कार्रवाई कचरा प्रबंधन में लापरवाही, पर्यावरण मानकों के उल्लंघन और लैंडफिल से फैलते प्रदूषण के चलते की गई है।
मिथेन गैस बनती है आग की बड़ी वजह
लैंडफिल साइट पर आग लगने का मुख्य कारण कूड़े के ढेरों के नीचे बनने वाली मिथेन गैस है। जब यह गैस अधिक मात्रा में बनकर हवा के संपर्क में आती है तो आग लग जाती है। यही वजह है कि ऐसी आग को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता है और यह लंबे समय तक सुलगती रहती है।
फायर सिस्टम की कमी पर उठे सवाल
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लैंडफिल साइट पर स्प्रिंकलर सहित आधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड मदद कर सकती है, लेकिन प्राथमिक जिम्मेदारी साइट प्रबंधन और नगर निगम की ही होती है। वर्षों से उठ रही शिकायतों और बार-बार लग रही आग की घटनाओं के बावजूद ठोस इंतजाम न होने से स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है।
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