गुरुग्राम में पानी का संकट गहराया, रोज 10 करोड़ लीटर भूजल खींच रहा शहर; हर साल 7 सेमी तक गिर रहा स्तर
गुरुग्राम में प्रतिदिन 10 करोड़ लीटर भूजल दोहन से गंभीर जल संकट गहरा गया है, जिससे भूजल स्तर में सालाना ...और पढ़ें

चंदू बुढेड़ा स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, यहां से आधे शहर को नहरी पेयजल की आपूर्ति होती है। जागरण
HighLights
गुरुग्राम में प्रतिदिन 10 करोड़ लीटर भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा।
शहर में भूजल स्तर सालाना औसतन 7 सेंटीमीटर नीचे गिर रहा।
उपचारित जल का केवल आधा ही पुनः उपयोग, मांग बढ़ रही।
संदीप रतन, गुरुग्राम। साइबर सिटी में रोजाना दस करोड़ लीटर (सौ एमएलडी) से ज्यादा भूजल दोहन हो रहा है। नतीजन, गुरुग्राम शहर और आसपास के क्षेत्र में वर्ष 2023 से 2026 के बीच भूजल स्तर में औसतन 0.07 मीटर यानी सात सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गिरावट दर्ज की गई है।
शहर में पेयजल की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि भूजल पर निर्भरता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। जीएमडीए के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्लान के अनुसार गुरुग्राम-मानेसर अर्बन काम्प्लेक्स क्षेत्र में वर्ष 2031 तक पेयजल की मांग करीब 1135 एमएलडी पहुंचने का अनुमान है।
वर्तमान में सेक्टर-1 से 115 तक आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र की पानी की मांग करीब 815 एमएलडी है, जबकि बसई और चंदू बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से करीब 770 एमएलडी पानी ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
नहर आधारित पेयजल आपूर्ति बढ़ने से नगर निगम क्षेत्र में ट्यूबवेल से पानी लेने की मात्रा करीब 100 एमएलडी से घटकर 60 एमएलडी हुई है। इसके बावजूद शहर के भूजल स्तर में गिरावट चिंता बढ़ा रही है। शहर में नगर निगम के 581 बोरवेल पानी की कमी को पूरा करने के लिए भूजल की आपूर्ति कर रहे हैं।
पूरे जिले में स्थिति अलग, शहरी क्षेत्र पर दबाव ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम शहर और आसपास के क्षेत्र में तीन वर्षों के दौरान औसतन 0.07 मीटर प्रति वर्ष भूजल स्तर नीचे गया, वहीं पूरे गुरुग्राम जिले में इसी अवधि में औसतन 0.02 मीटर प्रति वर्ष की वृद्धि दर्ज की गई।
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नगर निगम क्षेत्र में 327 पारंपरिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू हैं, जबकि 188 माड्यूलर सिस्टम को मंजूरी दी गई है। इनमें 126 पूरे, 29 पर काम चल रहा और 33 लंबित हैं। भूजल दोहन पर कुल नौ बोरवेल सील किए गए हैं।
408 एमएलडी ट्रीटेड पानी, फिर भी पूरी खपत नहीं
शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से करीब 408 एमएलडी उपचारित पानी निकल रहा है, लेकिन इसमें से करीब 202 एमएलडी का ही दोबारा उपयोग किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल निर्माण, उद्योग, पार्कों, ग्रीन बेल्ट, झील-तालाबों और सिंचाई में किया जा रहा है।
2023 से 2026 तक भूजल स्तर की गहराई
| वर्ष | गुरुग्राम शहर | फरुखनगर | पटौदी | सोहना |
|---|---|---|---|---|
| 2023 | 33.55 मीटर | 22.77 मीटर | 38.25 मीटर | 25.67 मीटर |
| 2024 | 33.76 मीटर | 22.76 मीटर | 38.05 मीटर | 25.71 मीटर |
| 2025 | 33.81 मीटर | 22.73 मीटर | 37.88 मीटर | 25.78 मीटर |
| 2026 | 33.76 मीटर | 22.64 मीटर | 37.74 मीटर | 25.91 मीटर |
तालाबों और जलाशयों पर भी जोर
- 73 तालाब विकसित किए गए हैं।
- 28 तालाबों को वर्ष 2026 में जलभराव वाले हॉटस्पॉट से जोड़ा गया है।
- वजीराबाद झील को घाटा जलाशय से जोड़ने की योजना है।
- 3 से ज्यादा जलाशय वजीराबाद, चकरपुर और घाटा क्षेत्र में विकसित किए गए हैं।
तालाबों को बरसाती नालों से जोड़ने का कार्य चल रहा है। नए मॉडल रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के निर्माण के साथ ही पुराने सिस्टम को भी चालू किया जा चुका है। इस बार मानसून के दौरान तालाबों में वर्षा जल संचयन होने से भूजल रिचार्ज में मदद मिली है।
“तालाबों को बरसाती नालों से जोड़ने का कार्य चल रहा है। नए मॉडल रेन वाटर हार्वेस्टिंग निर्माण के साथ ही पुराने सिस्टम को चालू किया जा चुका है। इस बार मानसून के दौरान तालाबों में वर्षा जल संचयन होने से भूजल रिचार्ज में मदद मिली थी।”
विजय ढाका, चीफ इंजीनियर, नगर निगम गुरुग्राम
