हिसार: शिक्षा का यह कैसा मंदिर, बेहाल व्यवस्थ और सुविधाओं का टोटा; स्कूलों में बच्चों को भेजने से कतराने लगे अभिभावक
हिसार और हांसी के जर्जर सरकारी स्कूलों में मानसून के दौरान बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। दैनिक जागरण ने जमीन पर कितने सुरक्षित हैं स्कूल मुहिम शुरू की है ताकि शिक्षा विभाग का ध्यान आकर्षित किया जा सके। मामनपुरा के एक स्कूल में बच्चे जर्जर कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं जहाँ शौचालय तक की सुविधा नहीं है।

जागरण संवाददाता, हिसार/हांसी। मानसून सीजन चल रहा है। जर्जर हालत से जूझ रहे शिक्षा के मंदिरों में पढ़ने वाले नौनिहालों पर खतरा मंडराना शुरू हो गया है। आलम यह है कि मानसून सीजन में अभिभावक अब मासूमों को स्कूल भेजने में कतराने लगे हैं।
शिक्षा निदेशालय को जगाने के लिए दैनिक जागरण ने जमीन पर कितने सुरक्षित हैं स्कूल मुहिम शुरू की है ताकि शिक्षा के मंदिरों की हालात को सुधारा जा सके। राजस्थान के झालवाड़ जिले में हादसे के बाद शिक्षा के मंदिरों की व्यवस्था को सुधारना आवश्यक है।
आइये जानते हैं कि जिले के पुरानी सब्जी मंडी स्थित राजकीय मिडिल स्कूल नंबर-3, मुलतानी चौक स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर-4 व हांसी स्थित मामनपुरा सरकारी स्कूलों की स्थिति कैसी है।
कितने सुरक्षित हैं स्कूल दैनिक जागरण अपने सामाजिक दायित्व को समझते हुए स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रव्यापी समाचारीय अभियान शुरू कर रहा है। इसके अंतर्गत राज्य के स्कूलों के भवनों समेत अन्य जरूरी सुविधाओं की पड़ताल की जा रही है। आप अपने स्कूल की जानकारी फोटो के साथ मोबाइल नंबर 9991610100 पर भेज सकते हैं। इसे प्रमुखता से प्रकाशित कर शासन-प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा।
विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, लेकिन यह कथन हांसी उपमंडल के मामनपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला की हालत को देखकर एक खोखले वादे जैसा प्रतीत होता है। शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकारों की असलियत यहां की जर्जर स्कूल बिल्डिंग में साफ झलकती है।
35 साल पुरानी स्कूल इमारत अब पूरी तरह से कंडम हो चुकी है। बच्चों की पढ़ाई एक ही खस्ताहाल कमरे में संचालित हो रही है, जहां दीवारें दरक चुकी हैं, छत से पानी टपकता है और हर वक्त जानलेवा हादसे का खतरा मंडराता रहता है। वर्तमान में स्कूल में 26 छात्र और दो अध्यापक हैं।
सभी बच्चों को उसी एक कमरे में पढ़ाया जा रहा है, जहां आफिस का सामान, बेंच, स्टोर का सामान भी ठूंस-ठूंस कर रखा गया है। कमरे में गंदगी, सीलन, कीड़े-मकोड़े और अंधेरे में बच्चों की पढ़ाई हो रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बच्चों और स्टाफ के लिए शौचालय की कोई सुविधा नहीं है, जिससे बच्चों को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इतना ही नहीं, स्कूल के लिए नई बिल्डिंग के निर्माण का कार्य दो साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन बजट की कमी और ठेकेदार की लापरवाही के कारण यह काम बीच में रुकता रहा। स्कूल की बाहरी दीवारें भी टूट चुकी हैं, जिससे गाय-भैंस स्कूल परिसर में घूमते रहते हैं।
करीब 40 साल से पुरानी सब्जी मंडी स्थित 77 कैनाल 10 मरले की जगह पर राजकीय मिडिल स्कूल नंबर-3 बना हुआ है। छठी से आठवीं कक्षा में कुल 68 विद्यार्थी पढ़ते हैं। जिनके लिए तीन ही कमरे हैं। जबकि हैरान कर देने वाली बात है कि 68 विद्यार्थियों को पढ़ाने के 12 शिक्षक तैनात हैं।
कमरों की हालात इतनी खस्ता है कि बूंदाबांदी होने पर भी नौनिहालों के बस्ते भीग जाते हैं। कमरे में अनगिनत कोनों से पानी रिस-रिस कर विद्यार्थियों पर पड़ता है। कमरों की दीवारों में आई दरारें व पांच अतिरिक्त कंडम कमरे आज भी सरकार की मदद की मोहताज बनी है। मानसून सीजन में नौनिहालों पर खतरे के साये में शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
जिम्मेदार बोले- व्यवस्था में सुधार करना है जरूरी
पुरानी सब्जी मंडी स्थित राजकीय मिडिल स्कूल नंबर-3 के हेड टीचर महाबीर ने बताया कि बार-बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। न तो स्कूल से सरप्लस शिक्षकों को अन्य स्कूलों में भेजा जा रहा है और न ही बिल्डिंग से लेकर कमरों की हालत सुधारी जा रही है।
मुलतानी चौक स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल नंबर-4 की हेड टीचर सुमन लता ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए सिंगल कमरा तक उपलब्ध नहीं है। बार-बार पत्राचार किया जाता है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मामनपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला की शिक्षिका सीमा ने बताया कि स्कूल में कुल पांच कमरे हैं, जो कंडम घोषित हो चुके हैं। फिलहाल एक ही कमरा बचा है, जहां सभी गतिविधियां चलाई जा रही है। ठेकेदार की लापरवाही के कारण नई बिल्डिंग का कार्य बार-बार रूक रहा है।
नौनिहालों को अब तक नसीब नहीं हो सका कमरा
1950 में मुलतानी चौक स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल नंबर-4 की हालत और भी दयनीय है। कहने को बाल वाटिका से पांचवीं कक्षा में करीब 85 विद्यार्थी पढ़ते हैं। लेकिन नौनिहालों को आज तक एक सिंगल कमरा पढ़ने के लिए नसीब नहीं हो पाया है।
बड़ा सा हाल है, जिसमें छोटे-छोटे चार केबिन बनाकर नौनिहालों को पढ़ाया जाता है। एक केबिन में दो-दो कक्षाएं लगानी पड़ती है, जिससे पता नहीं चलता है कि कौन सी कक्षा की पढ़ाई केबिन के अंदर हो रही है। हेड टीचर समेत कुल 4 शिक्षक कार्यरत हैं।
स्कूल की बिल्डिंग में से पानी रिसता रहता है। जिससे मानसून सीजन में तो स्कूल में पढ़ने वाले मासूमों पर खतरा मंडराना शुरू हो गया है। उच्च अधिकारियों को पता होने के बावजूद स्कूल बिल्डिंग की हालत सुधर नहीं पाई है।

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