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    हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: इन दो प्राइवेट बैंकों में बंद होंगे सरकारी खाते, सिर्फ राष्ट्रीय बैंकों में मंजूरी

    Updated: Wed, 18 Feb 2026 07:04 PM (IST)

    हरियाणा सरकार ने दो प्राइवेट बैंकों में सभी सरकारी खाते बंद करने का निर्णय लिया है। अब सभी विभागों और बोर्ड-निगमों को केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही ...और पढ़ें

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    दो प्राइवेट बैंक में बंद होंगे सरकारी खाते (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने दो प्राइवेट बैंक में संचालित सभी सरकारी खातों को बंद करने का निर्णय लिया है। सभी विभागों और बोर्ड-निगमों को इन बैंकों में जमा राशि निकालकर खाते बंद करने के लिए निर्देशित किया गया है। अब केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही खाते खोले जा सकेंगे। प्राइवेट बैंकों में खाता खोलना भी पड़ा तो पहले ठोस कारण बताते हुए वित्त विभाग से मंजूरी लेनी पड़ेगी।

    वित्त विभाग की ओर से इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्ष, उपायुक्तों, बोर्ड-निगमों और सरकारी कंपनियों व स्वायत्त निकायों के प्रबंध निदेशक, मुख्य प्रशासक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार और मंडलायुक्तों को निर्देश जारी कर दिया है। विभागीय योजनाओं-परियोजनाओं और कार्यक्रमों के लिए बैंक खाते खोलने की स्वीकृति देने के लिए प्रशासनिक सचिवों को अधिकृत किया गया है।

    अगर कोई विभाग राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता नहीं खोलकर निजी बैंकों से लेन-देन करना चाहता है तो उसे इसका कारण और प्रस्तावित खाते/योजना का पूरा विवरण देना होगा। वित्त विभाग की मंजूरी के बिना निजी बैंक में खोला गया कोई भी खाता अनियमित माना जाएगा और उसे तत्काल बंद कर दिया जाएगा। आदेश का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर प्रशासनिक और वित्तीय कार्रवाई की जाएगी। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक सरकारी कामकाज से हटा दिया गया है।

    वहीं, वित्त विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ बैंक विभागों और निगमों द्वारा किए जा रहे सावधि जमा की शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं। कई मामलों में यह देखा गया है कि लचीली जमा या उच्च ब्याज दर वाले अन्य सावधि जमा साधनों में धनराशि रखने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बैंक बचत खातों में धनराशि रोक रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप सरकार को वित्तीय हानि हो रही है।

    कई विभाग और निगम संबंधित बैंकों के साथ अपने सावधि जमा और बैंक खातों का नियमित रूप से मिलान नहीं कर रहे, जिससे इस तरह की अनियमितताओं का समय पर पता नहीं चल पा रहा है। इन्हें सावधि जमा (फिक्स्ड डिपाजिट) अनुमोदित नियमों और शर्तों के अनुसार ही करने को कहा गया है। सभी सावधि जमा और संबंधित बैंक खातों का मासिक आधार पर मिलान करना होगा।

    संबंधित बैंकों के साथ तुरंत विसंगतियों का मुद्दा उठाकर गंभीर अनियमितताओं की रिपोर्ट वित्त विभाग को देनी होगी। सभी विभागों और बोर्ड-निगमों को 31 मार्च तक अपने बैंक खातों का मिलान कर चार अप्रैल तक अनुपालन रिपोर्ट वित्त विभाग को भेजने के लिए कहा गया है।