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IAS अफसरों की ‘मेहरबानी’, हरियाणा में IDFC बैंक में लिमिट से ज्यादा जमा हुए करोड़ों रुपये, 3 अधिकारी हो सकते हैं अरेस्ट

Published: Fri, 04 Sep 2026 08:33 AM (GMT+05:30)

हरियाणा के 504 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में आईएएस डॉ. साकेत कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।

तीन आईएएस अधिकारियों की हो सकती है गिरफ्तारी (फाइल)

तीन आईएएस अधिकारियों की हो सकती है गिरफ्तारी (फाइल)

HighLights

  1. तीन आईएएस अधिकारियों पर 504 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप

  2. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में नियमों का उल्लंघन कर जमा हुई राशि

  3. सीबीआई ने डॉ. साकेत, विनीत, मोहम्मद शाइन के खिलाफ सबूत जुटाए

जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों से जुड़े करीब 504 करोड़ रुपये के आइडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में आइएएस डॉ. साकेत कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। इन तीनों के खिलाफ सीबीआइ ने पुख्ता सबूत एकत्रित कर लिए हैं और गिरफ्तार की संभावनाएं बढ़ गई है।

आइएएस अधिकारियों पर आरोप हैं कि इन्होंने नियमों को ताक पर रखकर आइडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाते खुलवाए और लिमिट से अधिक राशि चंडीगढ़ सेक्टर-32 की शाखा में ट्रांसफर करवाई।

ये अधिकारी पहले ही जेल में बंद

लिमिट 50 करोड़ रुपये थी, लेकिन इससे कहीं अधिक राशि इस बैंक खाते में जमा करवाए गए। इस प्रकरण में आइएएस अधिकारी प्रदीप कुमार, राम कुमार सिंह, पंकज अग्रवाल पहले से ही जेल में बंद है।

हालांकि कानूनी विशेषज्ञ कहते हैं कि सीबीआइ ने जांच के दौरान जिन आइएएस अधिकारयों को गिरफ्तार नहीं किया और उनके खिलाफ चार्जशीट आ गई है, उन्हें कोर्ट से जमानत मिलने में आसानी हो सकती है।

50 करोड़ रुपये जमा कराने में रही कथित भूमिका

सीबीआइ की जांच के अनुसार पूर्व आइएएस अधिकारी विनीत गर्ग की भूमिका हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के आइडीएफसी बैंक में खाते खुलवाने से जुड़ी रही।

जांच एजेंसी का आरोप है कि वित्त विभाग द्वारा सरकारी धन को किसी एक बैंक में केंद्रित करने के लिए निर्धारित 50 करोड़ रुपये की सीमा के बावजूद विनीत गर्ग ने तत्कालीन अधिकारी प्रदीप कुमार के साथ बैंक में सरकारी धनराशि केंद्रित करना जारी रखा।

आइएएस अधिकारी मोहम्मद शाइन के संबंध में सीबीआइ ने आरोप लगाया कि हरियाणा पावर जेनरेशन कॉ

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रपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) के प्रबंध निदेशक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान आइडीएफसी फर्स्ट बैंक में 50 करोड़ रुपये जमा कराने में उनकी कथित भूमिका रही।