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    नीदरलैंड में गूंजा हरियाणा का नाम, कृषि में तकनीकी नवाचार के लिए मिला प्रतिष्ठित 'जियोस्पेशियल एक्सीलेंस अवार्ड'

    Updated: Sun, 17 May 2026 09:21 AM (IST)

    हरियाणा को नीदरलैंड में कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार के लिए 'जियोस्पेशियल एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित किया गया है। ...और पढ़ें

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    कृषि में तकनीकी नवाचार के लिए मिला प्रतिष्ठित 'जियोस्पेशियल एक्सीलेंस अवार्ड' (AI Generated फोटो)

    HighLights

    1. हरियाणा को जियोस्पेशियल एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया।

    2. कृषि में तकनीकी नवाचार और किसान सहायता हेतु पुरस्कार।

    3. हरसैक की 'अंतरिक्ष से नागरिक सेवा' प्रणाली को पहचान मिली।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा को कृषि क्षेत्र में किए गए तकनीकी नवाचार तथा किसानों व पर्यावरण की मदद के लिए विकसित की गई नई तकनीक के लिए विश्व स्तर पर पहचान मिली है। नीदरलैंड के एम्स्टर्डम में आयोजित जियोस्पेशियल वर्ल्ड फोरम-2026 में हरियाणा को जियोस्पेशियल एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

    नागरिक संसाधन सूचना विभाग के अंतर्गत संचालित हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (हरसैक) द्वारा ‘अंतरिक्ष से नागरिक सेवा’ की अवधारणा पर आधारित एक व्यापक एवं यूनिफाइड जियो इनेबल्ड प्रणाली विकसित की गई है। इसके लिए हरियाणा को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया है।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरसैक की समस्त टीम को बधाई देते हुए इसे हरियाणा के लिए गौरव का क्षण बताया। हरसैक द्वारा कृषि क्षेत्र में किसानों की मदद के लिए खोजी गई नई तकनीक तथा फसल अवशेष प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किए गए नए प्रयोग बहुत उपयोगी साबित हुए हैं।

    हरसैक के निदेशक डा. सुल्तान सिंह ने बताया कि नई प्रणाली कृषि, भूमि संसाधनों तथा संबंधित क्षेत्रों में वास्तविक समय निगरानी, पारदर्शी शासन एवं वैज्ञानिक योजना निर्माण को सक्षम बनाती है।

    यह प्रणाली प्रति फसल सीजन में प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को सहायता प्रदान कर रही है तथा एक करोड़ से अधिक खेतों पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही 4000 से अधिक सक्रिय दैनिक उपयोगकर्ता भी इससे जुड़े हैं जिनमें नीति निर्धारक, अधिकारी, राजस्व विभाग से संबंधित हितधारक, पटवारी, सर्वेक्षक, युवा नवाचारकर्ता, उद्यमी एवं विद्यार्थी शामिल हैं।

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    हरसैक का एडवांस जियोस्पेशियल प्लेटफार्म फसल निगरानी, उत्पादन आकलन, जल संसाधन प्रबंधन, भूमि उपयोग योजना, फसल बीमा विश्लेषण, चित्र-आधारित फसल स्वास्थ्य निगरानी, फसल अवशेष प्रबंधन, मंडी मानचित्रण, कृषि योजना निर्माण, जलवायु अनुकूलन क्षमता तथा सतत विकास पहलों में काफी उपयोगी हैं।

    हरसैक उपग्रह चित्रों, दूरसंवेदी तकनीक, भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित पटलों, मोबाइल अनुप्रयोगों, मानव रहित हवाई सर्वेक्षण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण के माध्यम से हरियाणा के जल स्रोतों, परिवहन नेटवर्क, पंचायत परिसंपत्तियों तथा भूमि उपयोग परिवर्तन की व्यापक मैपिंग एवं निगरानी भी कर रहा है। इससे पारदर्शिता, दक्षता तथा वैज्ञानिक संसाधन प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    हरसैक निदेशक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय निर्णायक मंडल ने खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय सततता तथा जलवायु अनुकूलन क्षमता के उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु जियो इनेबल्ड प्रणाली के व्यावहारिक एवं व्यापक रूप से लागू किए जा सकने वाले मॉडल की विशेष सराहना की है। इस सम्मान ने अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग से हरियाणा को गवर्नेंस एवं कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य के रूप में पहचान दिलाई है।