हिमाचल सरकार लेगी और लोन, चार वर्ष में ब्याज सहित चुकानी होगी सारी रकम; एक लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गया है आंकड़ा
हिमाचल प्रदेश सरकार जल्द ही और ऋण लेने वाली है, जिसे ब्याज सहित चार वर्षों में चुकाना होगा। इस नए ऋण के साथ, राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा, जिससे प्रदेश के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा। यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार 350 करोड़ रुपये का ऋण लेने जा रही है। सरकार ने इसके लिए आवेदन कर दिया है। सरकार इस वित्तीय वर्ष में 7200 करोड़ रुपये का ऋण ले लेगी, इससे जो ऋण सीमा इस वर्ष की थी उसे पूरा कर लिया है। अब प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण हो गया है।
सरकार ने 350 करोड़ रुपये के सरकारी बांड को लेकर अधिसूचना जारी की है और इसकी नीलामी दो दिसंबर को होगी। ऋण चार वर्ष के लिए लिया जा रहा है। यह प्रतिभूतियां भारतीय रिजर्व बैंक (आबीआइ) के माध्यम से उपज आधारित नीलामी में बेची जाएंगी। इस राशि का उपयोग प्रदेश के विभिन्न विकास कार्यों को गति देने के लिए किया जाएगा।
केंद्र से मिली अनुमति, 2029 तक करनी होगी अदायगी
ऋण के लिए केंद्र सरकार की अनुमति मिल गई है। इसकी अदायगी तीन दिसंबर 2029 तक की जाएगी। इस ऋण को जल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा।
हर वर्ष जून और दिसंबर में देना होगा ब्याज
ब्याज हर वर्ष तीन जून और तीन दिसंबर को देय होगा। आरबीआइ ई-कुबेर प्लेटफार्म पर दो दिसंबर को नीलामी रखी है।
हर माह निपटानी होती हैं 2800 करोड़ की देनदारियां
राज्य सरकार लगातार केंद्र के समक्ष ऋण लेने की सीमा बढ़ाने की मांग कर रही है। मौजूदा समय में सरकार को प्रतिमाह लगभग 2800 करोड़ रुपये की प्रतिबद्ध देनदारियां निपटानी होती हैं। इसमें वेतन के लिए 2000 करोड़, पेंशन के लिए 800 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है।

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