हिमाचल की पंचायतों में 300 करोड़ का हिसाब अटका, केंद्र ने मांगा रिकॉर्ड; अगली किस्तों पर पड़ेगा असर
हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का हिसाब केंद्र सरकार तक नहीं पहुंचने से अगली ...और पढ़ें

हिमाचल की पंचायतों ने 300 करोड़ का हिसाब नहीं दिया है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
हिमाचल पंचायतों के 300 करोड़ के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित।
केंद्र सरकार ने विकास कार्यों का रिकॉर्ड मांगा।
अगली वित्तायोग किस्तों की प्रक्रिया पर पड़ेगा असर।
यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च हुई रकम का हिसाब केंद्र सरकार तक पहुंचाने की रफ्तार सुस्त होने से अटक गया है। 15वें वित्तायोग के तहत करवाए करीब 300 करोड़ रुपये के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं करवाए गए हैं। केंद्र सरकार ने पंचायतों से इन कार्यों का रिकॉर्ड मांगा है और वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान खर्च की राशि का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने को कहा है।
इतनी बड़ी राशि के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित होने से पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन, निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं हुए
पंचायतों में बीते वित्तीय वर्ष के विकास कार्यों को करवाने में देरी के कारण उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं हो सके। प्रदेश में नए पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में लगे समय के कारण यह देरी हुई है। उपयोगिता प्रमाणपत्र इस बात का आधिकारिक दस्तावेज होता है कि किसी योजना के तहत जारी धनराशि निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की है। इसके साथ कार्यों का विवरण, खर्च का हिसाब और संबंधित रिकार्ड महत्वपूर्ण होता है।
बिलों सहित जमा करवाने के निर्देश
पंचायतों को उपयोगिता प्रमाणपत्र बिलों सहित जमा करने के निर्देश दिए हैं। 15वें वित्त आयोग के अनुदान का बड़ा हिस्सा पेयजल, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए निर्धारित था, जबकि शेष राशि पंचायतों की स्थानीय जरूरतों पर खर्च की जा सकती थी।
अगली किस्तों की प्रक्रिया पर पड़ेगा असर
वित्तायोग के अनुदान निर्धारित शर्तों और वित्तीय नियमों के तहत जारी होते हैं। यदि पुराने अनुदान के उपयोग और खर्च का रिकार्ड अधूरा रहता है तो अगली किस्तों की प्रक्रिया में अड़चन आती है। ऐसे में अगली किस्त भी नहीं मिली है। उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित होने से हर मामले में धनराशि स्वतः रुकना तय नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव संबंधित अनुदान की शर्तों और केंद्र की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
पुराने वित्तीय वर्ष के 300 करोड़ रुपये के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाने को हैं। इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं।
-सी पाल रासु, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग।
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