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    शिमला में भू-धंसाव, 100 से अधिक भवनों को खतरा; कई घरों में पड़ी दरारें

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 10:42 PM (IST)

    शिमला ग्रामीण के शकराला-मल्याणा में भू-धंसाव की आशंका से 100 से अधिक घरों में दरारें आने का खतरा बढ़ गया है, जिससे स्थानीय लोग चिंतित हैं। ...और पढ़ें

    शिमला में भू-धंसाव से 100 से अधिक भवनों को खतरा।

    शिमला में भू-धंसाव से 100 से अधिक भवनों को खतरा।

    HighLights

    1. शिमला ग्रामीण के शकराला-मल्याणा में भू-धंसाव की आशंका

    2. करीब 100 से अधिक भवनों में दरारें आने का खतरा

    3. प्रशासन ने वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया, निगरानी जारी

    जागरण संवाददाता, शिमला। शिमला ग्रामीण क्षेत्र के शकराला-मल्याणा में भू-धंसाव की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में करीब 100 से अधिक भवन हैं और कई में बार-बार दरारें पड़ रही हैं। इससे भवनों के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। मानसून के दौरान जमीन में हलचल बढ़ने से लोगों में डर का माहौल है। क्षेत्र में कई वर्षों से जमीन खिसकने और धंसने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    एसडीएम शिमला ग्रामीण मनजीत शर्मा के अनुसार प्रशासन ने मौके का निरीक्षण किया है। प्रारंभिक निरीक्षण में अभी तीन मकानों में हल्की दरारें पाई गई हैं। फिलहाल बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है और रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी जाएगी।

    भू-धंसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से वैज्ञानिक अध्ययन करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेषज्ञ जमीन की स्थिति, जल निकासी और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन करेंगे। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन खिसकने के पीछे प्राकृतिक कारण हैं या मानवीय गतिविधियों की भी भूमिका है।

    2010 से समस्या झेल रहे लोग

    स्थानीय निवासी गुलाब सिंह का कहना है कि वह करीब 2010 से इस समस्या को देख रहे हैं। उनका चार मंजिला मकान है और ऊपर छत का एक और हिस्सा है। लगातार दरारें आने और जमीन धंसने से परिवार को सुरक्षा की चिंता रहती है।

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    बार-बार मरम्मत करवाने के बावजूद समस्या दोबारा सामने आ जाती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दो-तीन वर्षों में जमीन धंसने की समस्या ज्यादा महसूस हुई है। मकान की मरम्मत पर वे करीब 2.5 से तीन लाख रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन दरारें दोबारा आ आती हैं।

    ऊपर बने भवनों के मलबे पर बने हैं कई मकान

    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पहले से ही संवेदनशील है। उनका दावा है कि नीचे की ओर बने कई भवनों का निर्माण ऊपर की तरफ बने भवनों की कटिंग से निकाले मलबे और भराव पर हुआ है। वर्षा के दौरान इस मलबे में पानी जाने से जमीन की स्थिरता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन की विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस कारण का भू-धंसाव में कितना योगदान है।